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जागरूकता का अभाव, नहीं मिल रहा योजना का लाभ

Sun, 22 Sep 2019 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2019 11:51 PM IST
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Lack of awareness, not getting the benefit of the scheme
सहारनपुर। प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान भारत योजना में गोल्डन कार्ड धारक लाभार्थियों को भी उपचार के नाम पर पैसा खर्च करना पड़ रहा है। यह सब हो रहा है जागरूकता के अभाव से। अस्पतालों में लगाए गए आरोग्य मित्र भी लाभार्थियों को उपयुक्त जानकारी नहीं दे पा रहे हैं, जिससे लाभार्थी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। योजना के तहत जिले के 23 अस्पताल चयनित हैं, जिनमें एसबीडी जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज पिलखनी, सीएचसी फतेहपुर, सीएचसी देवबंद और सीएचसी गंगोह सरकारी अस्पताल के अलावा 17 प्राइवेट अस्पताल शामिल हैं। सरकारी अस्पतालों में समस्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन चयनित प्राइवेट अस्पतालों में निर्धारित सुविधाओं के अनुसार ही योजना का लाभ मिलना बताया जा रहा है। उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार ही लाभार्थी को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलना तय है, लेकिन इसमें जागरूकता का अभाव आड़े आ रहा है। ऐसे काफी लोग हैं, जो गोल्डन कार्ड होने के बावजूद उपचार के दौरान पैसा लिया जाना बता रहे हैं। चयनित प्राइवेट अस्पताल में पहुंचने वाले लाभार्थियों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि उन्हें योजना का लाभ लेने के लिए किस अस्पताल में पहुंचना चाहिए। अस्पतालों की तरफ से भी उन्हें यह बात तब बताई जाती है, जब उपचार करा लिया जाता है और खर्च का बिल थमाया जाता है।
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केस एक - पिलखनी निवासी ब्रजपाल ने बताया कि उनका बेटा सौरभ हादसे में घायल हो गया था। सौरभ को दिल्ली रोड स्थित प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के बाद 25 हजार रुपये भुगतान करना पड़ा। ब्रजपाल को अस्पताल के चिकित्सक ने बताया कि मरीज को ट्रामा सेंटर में लेकर जाना चाहिए था, वहीं पर गोल्डन कार्ड का लाभ मिलता।
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केस दो -- चिलकाना रोड निवासी दीपा जैन ने बताया कि उनकी बेटी को प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद वह चयनित प्राइवेट अस्पताल में ले गए। उनकी बेटी की पहली डिलीवरी सर्जरी से हुई थी, जिस पर चिकित्सक ने कह दिया कि दोबारा सिजेरियन डिलीवरी पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
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केस तीन - देवबंद क्षेत्र के ऊंचागांव निवासी शिवकुमार ने बताया कि उनकी मां की पित्त की थैली में पथरी थी। देवबंद के अस्पताल में अपनी मां को उपचार के लिए लेकर गए, तो वहां उपचार के दौरान दवाई का खर्च लिया और बताया गया कि दवा का पैसा देना होगा। शिवकुमार ने बताया कि हमें यह मालूम नहीं था कि योजना में दवाई का खर्च भी मिलेगा या नहीं।
तो कहां हैं आरोग्य मित्र
प्रत्येक अस्पताल में एक आरोग्य मित्र की जिम्मेदारी लगाई गई है। ताकि वह आयुष्मान योजना के लाभार्थी को सही जानकारी उपलब्ध करा सकें। बावजूद इसके लाभार्थियों को भटकना पड़ रहा है, या फिर जानकारी के अभाव में खर्च वहन करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आरोग्य मित्र क्या कर रहे हैं, अस्पताल पहुंचने पर लाभार्थियों से वह मुलाकात करते भी हैं या नहीं।

आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को किसी भी अस्पताल में पहुंचने के दौरान आरोग्य मित्र से मिलना चाहिए और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेनी चाहिए। क्योंकि अलग अलग अस्पताल के चयन में उपलब्ध सुविधा का मानक है। - डाक्टर सुशील गुप्ता, जिला कार्यक्रम समनव्यक
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