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भुगतान नहीं हुआ तो कोविड के मरीजों को नहीं मिलेगा भोजन

Tue, 20 Jul 2021 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 12:27 AM IST
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Kovid patients will not get food if payment is not made
सहारनपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में कोविड के मरीजों को भोजन मुहैया करा रही एसबी कांट्रैक्टर एंड कैटरिंग फर्म ने पैसों का भुगतान नहीं होने की स्थिति में कार्य जारी रखने में असमर्थता जताई है। इस संबंध में फर्म की ओर से प्राचार्य को पत्र लिखा गया है।
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फर्म का कहना है कि वह 12 नवंबर 2020 से राजकीय मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों को चाय, नाश्ता, भोजन उपलब्ध करा रही है। अभी तक पैसे का भुगतान नहीं हुआ है। इस संबंध में तीन बार पत्र लिखा जा चुका है। खर्च की राशि करीब 10 लाख रुपये हो चुकी है, जिसका भुगतान नहीं हो पा रहा है। फर्म की ओर से सोमवार 19 जुलाई को भी प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी को पत्र लिखा गया है, जिसमें पैसे का भुगतान जल्द नहीं होने पर आगे कार्य करने में असमर्थता जताई गई है। यानी यदि फर्म को पैसों का भुगतान नहीं होता है तो वह कोरोना के मरीजों को आगे से भोजन मुहैया नहीं कराएगी। उधर, प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी का कहना है कि फर्म को पैसे का भुगतान एनएचएम फंड से होना है, जिसके लिए एनएचएम के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। फिर से रिमाइंडर लेटर भेजकर भुगतान के लिए कहा जाएगा।
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मानदेय के लिए भटक रही लैब वैज्ञानिक
सहारनपुर। कोरोना काल में संक्रमित होने के बावजूद जान हथेली पर रखकर ड्यूटी करने वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज में बीएसएल-2 लैब की वैज्ञानिक ऐमन राशिद को मानदेय के लिए भटकना पड़ रहा है। पीड़िता ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है।
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ऐमन राशिद ने बताया कि वह बीएसएल-2 लैब में 20 मई 2021 से वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत है, लेकिन अभी तक उसको नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। नियुक्ति पत्र और मानदेय के लिए वह कई बार प्राचार्य के कार्यालय गई। वहां एक चिकित्सक और कर्मचारी ने उसके साथ अभद्र व्यवहार तक किया। ऐमन का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद उसने लैब में ड्यूटी की है। इतना करने के बाद भी उसको परेशान किया जा रहा है। इसके बाद उसे हारकर जिलाधिकारी से गुहार लगानी पड़ी है। ऐमन ने नियुक्ति पत्र और तीन माह का मानदेय जो करीब एक लाख 20 हजार रुपये बैठता है। उसे दिलाने की मांग जिलाधिकारी से की है। उधर, प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी का कहना है कि ऐमन जिस पद पर कार्य कर रही हैं वह उसके योग्य ही नहीं हैं। उनकी नियुक्ति गलत तरीके से हुई है। मामले की जांच कराई जा रही है। उसके बाद ही नियुक्ति पत्र और मानदेय के बारे में सोचा जाएगा।
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