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Saharanpur News: जिले में खांडसारी उद्योग अस्तित्व खत्म, सभी इकाइयां हुईं बंद
Fri, 26 Dec 2025 12:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 26 Dec 2025 12:39 AM IST
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सहारनपुर। किसी दौर में खांडसारी के लिए प्रसिद्ध सहारनपुर का उद्योग अब दम तोड़ दिया। जिले में इस बार एक भी इकाई का संचालन नहीं हो रहा है, जबकि विभाग की ओर से 59 लाइसेंस जारी किए गए हैं। इसके पीछे मजदूरों की कमी से लेकर अन्य कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
दरअसल, जिले में बड़े स्तर पर गन्ने की खेती होती है। वर्तमान में गन्ने का रकबा बढ़कर 1,19,406 हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष से 1384 हेक्टेयर अधिक है। किसान अधिकांश गन्ना चीनी मिलों को सप्लाई करते हैं। इसके साथ ही कुछ गन्ना कोल्हुओं में भी जाता है। खांडसारी उद्योग एक समय जनपद की पहचान था, यहां बड़ी संख्या में खांडसारी की इकाइयों का संचालन होता था। सरकार ने उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 2018-19 में नई खांडसारी नीति बनाई थी। इसके बाद नीति को पांच वर्षों के लिए जारी किया गया। नई नीति के तहत चीनी मिल से 15 की बजाए साढ़े सात किलोमीटर दूरी करने पर इकाइयों को लगाया जा सकता है।
गुड़ बनाने वाली इकाई को लाइसेंस से मुक्त रखा गया था। इसके साथ ही लाइसेंस का सरलीकरण किया गया है। इकाई लगाने के इच्छुक उद्यमियों को विभाग के चक्कर न लगाने पड़े। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने आदि की सुविधा उद्यमियों को दी गई। ऐसी इकाइयां जिनके पास लाइसेंस है। वह संचालित नहीं हो रही है और इन इकाइयों का कोई बकाया नहीं है तो उन्हें बिना किसी विलंब शुल्क के नवीनीकृत लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन महंगा गन्ना, प्रदूषण के कड़े मानक, श्रमिकों की अनुपलब्धता उद्योग के न पनपने की बड़ी वजह मानी जा रही है, साथ ही आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी न होना भी एक कारण है। इन्हीं सब कारणों के चलते लाइसेंस होने के बाद भी उद्योग संचालित नहीं हो रहे हैं।
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- वर्जन
जिले में खांडसारी इकाइयों के लिए लाइसेंस जारी किए गए हैं, लेकिन खांडसारी इकाइयां संचालित नहीं हो पा रही है। विभाग उद्यमियों के साथ समय-समय पर वार्ता भी करता है।
- मनीष पटेल, सहायक चीनी आयुक्त
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दरअसल, जिले में बड़े स्तर पर गन्ने की खेती होती है। वर्तमान में गन्ने का रकबा बढ़कर 1,19,406 हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष से 1384 हेक्टेयर अधिक है। किसान अधिकांश गन्ना चीनी मिलों को सप्लाई करते हैं। इसके साथ ही कुछ गन्ना कोल्हुओं में भी जाता है। खांडसारी उद्योग एक समय जनपद की पहचान था, यहां बड़ी संख्या में खांडसारी की इकाइयों का संचालन होता था। सरकार ने उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 2018-19 में नई खांडसारी नीति बनाई थी। इसके बाद नीति को पांच वर्षों के लिए जारी किया गया। नई नीति के तहत चीनी मिल से 15 की बजाए साढ़े सात किलोमीटर दूरी करने पर इकाइयों को लगाया जा सकता है।
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गुड़ बनाने वाली इकाई को लाइसेंस से मुक्त रखा गया था। इसके साथ ही लाइसेंस का सरलीकरण किया गया है। इकाई लगाने के इच्छुक उद्यमियों को विभाग के चक्कर न लगाने पड़े। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने आदि की सुविधा उद्यमियों को दी गई। ऐसी इकाइयां जिनके पास लाइसेंस है। वह संचालित नहीं हो रही है और इन इकाइयों का कोई बकाया नहीं है तो उन्हें बिना किसी विलंब शुल्क के नवीनीकृत लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन महंगा गन्ना, प्रदूषण के कड़े मानक, श्रमिकों की अनुपलब्धता उद्योग के न पनपने की बड़ी वजह मानी जा रही है, साथ ही आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी न होना भी एक कारण है। इन्हीं सब कारणों के चलते लाइसेंस होने के बाद भी उद्योग संचालित नहीं हो रहे हैं।
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जिले में खांडसारी इकाइयों के लिए लाइसेंस जारी किए गए हैं, लेकिन खांडसारी इकाइयां संचालित नहीं हो पा रही है। विभाग उद्यमियों के साथ समय-समय पर वार्ता भी करता है।
- मनीष पटेल, सहायक चीनी आयुक्त