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मां काली की मूर्ति स्थापित
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 18 Apr 2016 12:36 AM IST
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The program in the Shiva temple devotees sacrifice
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में सिद्घपीठ शिव मंदिर समिति शिव विहार में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ कार्यक्रम आयोजित हुआ। मंदिर में हनुमान और मां काली की मूर्ति स्थापित की गई। श्रद्घालुओं ने बड़ी संख्या में हिस्सेदारी कर धर्म लाभ उठाया।
रविवार को आयोजित कार्यक्रम में आचार्य मिथलेश नंदन कौशिक ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर यज्ञ कराया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सभी धर्मों की जड़ है। मूर्ति पूजा के बिना सनातन धर्म की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
आचार्य ने हनुमान एवं मां काली की प्रतिमा को स्थापित कराया। जिनमें आचार्य नितिन, सुमित, यज्ञदत्त, हरि आदि मौजूद रहे। पंडित अंबा प्रसाद कौशिक ने मूर्ति पूजा के महत्व पर प्रकाश डाला।
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कहा कि सनातन धर्म में देव उपासना के लिए मूर्ति पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। सनातन धर्म में ईश्वर उपासना से पहले मूर्ति पूजा को आवश्यक माना गया है। किसी भी देवालय में मूर्ति पूजा से पहले मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रों से की जाती है।
जिसमें नवीन मूर्तियों का जलाधिवास, अन्नाधिवास, शमाधिवास एवं अंगन्यास के बाद मूर्तियों में प्राण डाले जाते है। सप्तवास होने के बाद ही मूर्ति पूजा प्रारंभ होती है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि दिनेश चौधरी, कृष्ण चंद्र मुखिया, विशाल भारद्वाज, सुखदेव गुप्ता, सुशील गुप्ता, नरेंद्र पंवार, रक्षा वालिया, दिनेश चौधरी, डीके बंसल, दिनेश राठी आदि मौजूद रहे।
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रविवार को आयोजित कार्यक्रम में आचार्य मिथलेश नंदन कौशिक ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर यज्ञ कराया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सभी धर्मों की जड़ है। मूर्ति पूजा के बिना सनातन धर्म की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
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आचार्य ने हनुमान एवं मां काली की प्रतिमा को स्थापित कराया। जिनमें आचार्य नितिन, सुमित, यज्ञदत्त, हरि आदि मौजूद रहे। पंडित अंबा प्रसाद कौशिक ने मूर्ति पूजा के महत्व पर प्रकाश डाला।
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कहा कि सनातन धर्म में देव उपासना के लिए मूर्ति पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। सनातन धर्म में ईश्वर उपासना से पहले मूर्ति पूजा को आवश्यक माना गया है। किसी भी देवालय में मूर्ति पूजा से पहले मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रों से की जाती है।
जिसमें नवीन मूर्तियों का जलाधिवास, अन्नाधिवास, शमाधिवास एवं अंगन्यास के बाद मूर्तियों में प्राण डाले जाते है। सप्तवास होने के बाद ही मूर्ति पूजा प्रारंभ होती है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि दिनेश चौधरी, कृष्ण चंद्र मुखिया, विशाल भारद्वाज, सुखदेव गुप्ता, सुशील गुप्ता, नरेंद्र पंवार, रक्षा वालिया, दिनेश चौधरी, डीके बंसल, दिनेश राठी आदि मौजूद रहे।