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जसवंत सैनी को संगठन के प्रति निष्ठा का मिला इनाम

Sat, 26 Mar 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Mar 2022 12:15 AM IST
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Jaswant Saini received the reward of loyalty to the organization
जसवंत सैनी - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। भाजपा नेतृत्व ने जसवंत सैनी और विधायक बृजेश सिंह को योगी मंत्रिमंडल में शामिल कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के परंपरागत वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। संगठन के प्रति समर्पण और निष्ठा भी जसवंत का सियासी कद बढ़ाने में कारगर साबित हुई। वहीं देवबंद में लगातार दूसरी बार भगवा फहराने पर विधायक बृजेश सिंह को मंत्री पद का इनाम मिला है, साथ ही राजपूत समाज के प्रतिनिधित्व के लिए भी बृजेश सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल किया है, क्योंकि चुनाव में पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा और सरधना से विधायक ठाकुर संगीत सोम की हार के बाद बृजेश सिंह ही पश्चिम के जिलों में राजपूत समाज के अकेले विधायक बने।
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योगी आदित्यनाथ की पिछली सरकार में सहारनपुर जिले से डॉ. धर्म सिंह सैनी को आयुष राज्यमंत्री बनाया गया था। चुनाव से ऐन वक्त पहले स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी छोड़ने के बाद डॉ. धर्म सिंह सैनी भी पाला बदल गए थे। नकुड़ से वह सपा के सिंबल पर लड़े, लेकिन भाजपा के मुकेश चौधरी से हार गए। भाजपा हाईकमान ने डॉ. धर्म सिंह सैनी के विकल्प के लिए भी जसवंत सैनी का कद बढ़ाते हुए उन्हें राज्यमंत्री बनाया है। बीते 33 सालों से राष्ट्रीय स्वयं संघ से जुड़े रहे और भाजपा के समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता रहे। जसवंत सैनी को योगी सरकार ने गत वर्ष 16 जून को उप्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया था। पार्टी हाईकमान ने उन्हें किसी सीट से चुनाव नहीं लड़ाया, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। जहां उन्होंने डॉ. धर्म सिंह सैनी का विकल्प तलाशा, वहीं सैनी समाज के परंपरागत वोटों को भी साधने की कोशिश की है।
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किसी भी सदन के सदस्य नहीं जसवंत
सहारनपुर। राज्यमंत्री बनाए गए जसवंत सैनी अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। मंत्री बने रहने के लिए आगामी छह माह में उन्हें विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन का सदस्य होना अनिवार्य है। अब संगठन उन्हें विधान परिषद में भेजे या किसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ाए, यह देखने वाली बात है।
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