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Saharanpur News: सांप्रदायिक दल से गठबंधन पर मौलाना बदरुद्दीन अजमल को जमीयत का नोटिस

Mon, 06 Apr 2026 01:14 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Mon, 06 Apr 2026 01:14 AM IST
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Jamiat Issues Notice to Maulana Badruddin Ajmal Over Alliance with Communal Party
देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने एआईयूडीएफ के अध्यक्ष और दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना बदरुद्दीन अजमल को नोटिस भेजा है। हालिया चुनावी अभियान के दौरान एक सांप्रदायिक राजनीतिक दल के साथ बदरुद्दीन के कथित गठबंधन और खुले समर्थन के संबंध में यह नोटिस भेजा गया है। 24 घंटे के भीतर उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि जमीयत ने आजादी के तुरंत बाद वर्ष 1951 में कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन किया था। जिसकी अध्यक्षता मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी ने की थी, इसमें चुनाव और मतदान के संबंध में एक स्पष्ट, सिद्धांतगत नीति को अनुमोदित किया था। मौलाना हकीमुद्दीन ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि जमीयत की नीति के अनुसार उसके सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसी भी सांप्रदायिक दल से किसी प्रकार का संबंध, राजनीतिक सहभागिता या समर्थन न रखें।
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इसके विपरीत, उन्हें केवल ऐसी राजनीतिक शक्तियों और दलों के साथ रहने का निर्देश दिया गया था जो राष्ट्रीय एकता, सांविधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और देश की बहुलतावादी सामाजिक संरचना की रक्षा की पक्षधर हो। मौलाना हकीमुद्दीन ने बताया कि हालिया चुनावी अभियान में मौलाना बदरुद्दीन अजमल कासमी द्वारा एक सांप्रदायिक दल के साथ राजनीतिक गठबंधन किए जाने तथा उसकी खुली हिमायत किए जाने की बात सामने आई है, जो जमीयत की घोषित नीति और उसके मूल सिद्धांतों से स्पष्ट विचलन माना जा रहा है। इसलिए मौलाना बदरुद्दीन अजमल से 24 घंटे के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि प्राप्त उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया तो संगठनात्मक नियमावली के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। मौलाना बदरुद्दीन अजमल जमीयत उलमा-ए-हिंद असम के अध्यक्ष होने के साथ ही एआईयूडीएफ के भी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
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