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धूमधाम से निकाली भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Apr 2017 12:26 AM IST
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भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा निकालते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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बड़ौत (बागपत)। श्री राधा गोविंद गौड़ीय वेदांत ट्रस्ट के योगदान में पंचवटी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास श्रीधर महाराज ने जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा, सुदर्शन चक्र की प्रकट होने की कथाएं सुनाई। कथा के बाद भगवान जगन्नाथ की विशाल शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई।
कथा व्यास ने बताया रोहिणी माता को द्वारिका की सभी रानियों ने घेर लिया और प्रश्न किया कि हम सभी श्रीकृष्ण भगवान की अच्छी प्रकार से सेवा करते है फिर भी भगवान हमसे संतुष्ट नहीं होते। वे ब्रज की याद में ही खोये रहते हैं ऐसा क्या है। तभी वहां पर पद्मावती जो कंस की माता है वो भी वहीं पर थी और कहने लगी सुखी व्यक्ति जल्दी भूल जाता है। किंतु दुखी नहीं भूलता है।
यशोदा ने कृष्ण के साथ सौतेला व्यवहार किया ना कुछ खाने को दिया और न ही कुछ पीने को दिया। इसलिए दूसरों के घर-घर जाकर वह माखन, दूध, दही चुराकर खाया करते थे। तभी रोहिणी माता ने कहा कि हम जानते हैं कि तुम कितनी पतिव्रत स्त्री हो। इतना सुनकर पद्मावती वहां से चली गई तब रोहिणी माता ने ब्रज की लीलाओं का वर्णन शुरू किया। राधा-रानी, सहित कई कथाओं का उन्होंने वर्णन किया।
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कथा के उपरांत जगन्नाथ भगवान के 56 प्रकार के पदार्थों का भोग लगाया गया। फिर जगन्नाथ भगवान की शोभायात्रा शुरू हुई। जिसका उद्घाटन कांता प्रसाद गुप्ता ने किया। अतिथि अनिल कुमार बेरी रहे।
रथयात्रा में वृंदावन दिल्ली, नोएडा आदि दूर-दूर से आए भक्तों के साथ नाचते गाते, हरि कीर्तन करते श्रद्धालु चल। रथयात्रा पंचवटी मंदिर से शुरू होकर अग्रसेन चौक, संजय मूर्ति, नेहरू मूर्ति, अतिथि भवन, गांधी रोड़, सारंग सिनेमा होते कथा स्थल पर समाप्त हुई। इसमें नवीन कृष्ण दास, प्रेम कृष्ण दास, बलराम दास, राकेश सिंघल, राहुल गर्ग, शिवम गर्ग, डॉ. ओमप्रकाश, राजन शर्मा, मिथलेश तिवारी, मुकेश मित्तल, प्रमोद महेश्वरी, सुंदर गोपालदास, राम सिंह, विनोद वर्मा, राज कुमार, रवि कुमार, सुनील वर्मा, सन्नी, अंकुर नितिन, सौरभ आदि का सहयोग रहा।
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कथा व्यास ने बताया रोहिणी माता को द्वारिका की सभी रानियों ने घेर लिया और प्रश्न किया कि हम सभी श्रीकृष्ण भगवान की अच्छी प्रकार से सेवा करते है फिर भी भगवान हमसे संतुष्ट नहीं होते। वे ब्रज की याद में ही खोये रहते हैं ऐसा क्या है। तभी वहां पर पद्मावती जो कंस की माता है वो भी वहीं पर थी और कहने लगी सुखी व्यक्ति जल्दी भूल जाता है। किंतु दुखी नहीं भूलता है।
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यशोदा ने कृष्ण के साथ सौतेला व्यवहार किया ना कुछ खाने को दिया और न ही कुछ पीने को दिया। इसलिए दूसरों के घर-घर जाकर वह माखन, दूध, दही चुराकर खाया करते थे। तभी रोहिणी माता ने कहा कि हम जानते हैं कि तुम कितनी पतिव्रत स्त्री हो। इतना सुनकर पद्मावती वहां से चली गई तब रोहिणी माता ने ब्रज की लीलाओं का वर्णन शुरू किया। राधा-रानी, सहित कई कथाओं का उन्होंने वर्णन किया।
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कथा के उपरांत जगन्नाथ भगवान के 56 प्रकार के पदार्थों का भोग लगाया गया। फिर जगन्नाथ भगवान की शोभायात्रा शुरू हुई। जिसका उद्घाटन कांता प्रसाद गुप्ता ने किया। अतिथि अनिल कुमार बेरी रहे।
रथयात्रा में वृंदावन दिल्ली, नोएडा आदि दूर-दूर से आए भक्तों के साथ नाचते गाते, हरि कीर्तन करते श्रद्धालु चल। रथयात्रा पंचवटी मंदिर से शुरू होकर अग्रसेन चौक, संजय मूर्ति, नेहरू मूर्ति, अतिथि भवन, गांधी रोड़, सारंग सिनेमा होते कथा स्थल पर समाप्त हुई। इसमें नवीन कृष्ण दास, प्रेम कृष्ण दास, बलराम दास, राकेश सिंघल, राहुल गर्ग, शिवम गर्ग, डॉ. ओमप्रकाश, राजन शर्मा, मिथलेश तिवारी, मुकेश मित्तल, प्रमोद महेश्वरी, सुंदर गोपालदास, राम सिंह, विनोद वर्मा, राज कुमार, रवि कुमार, सुनील वर्मा, सन्नी, अंकुर नितिन, सौरभ आदि का सहयोग रहा।