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Saharanpur News: फाइलों में कैद हुई जांच, भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों पर पड़ा पर्दा
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- नगर निगम सहित अनेक विभागों में सामने आ चुके भ्रष्टाचार के अनेक मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। भ्रष्टाचार या अन्य विवादित मामले आने के बाद विभिन्न विभागों में जांच तो बैठ जाती है, लेकिन वह पूरी ही नहीं होती। हालात यह है कि मौजूदा समय में भी नगर निगम समेत कई अन्य विभागों में कई-कई माह से जांच अटकी पड़ी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब जांच पर पर्दा ही गिराना है तो जांच के नाम पर दिखावा क्यों?
-- यह मामला सबसे अधिक चर्चा में
नगर निगम में पिछले दिनों 17 करोड़ रुपये से अधिक की टेंडर प्रक्रिया में एक अधिकारी द्वारा मनमाने तरीके से शर्तें बदल दी गई। नगर निगम में जोरों पर चर्चा है कि महाराष्ट्र की फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया, जिससे कुछ लाभ एडवांस में ले भी लिया गया। मामला नगर आयुक्त के संज्ञान में आया तो उन्होंने गड़बड़ी की आशंका जताते हुए तीन सदस्यों की जांच बिठाई, जिसमें अपर नगर आयुक्त प्रदीप यादव, जलकल महाप्रबंधक पुरुषोत्तम कुमार और लेखा अधिकारी मनोज त्रिपाठी को रखा गया। 29 मई तक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश नगर आयुक्त द्वारा दिए गए थे, लेकिन आज तक जांच पूरी नहीं हुई है। इस संबंध में शुक्रवार को अपर नगर आयुक्त प्रदीप यादव से पूछा गया तो वह जवाब देने की बजाय दफ्तर से उठकर चले गए।
-- यहां पर बैठी हुई है जांच
- चिलकाना रोड पर नाला निर्माण के भ्रष्टाचार में दोषियों से नगर निगम ने रिकवरी तो की गई, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई।
- नगर निगम में लिपिक और अधिकारी के बीच मारपीट मामले की जांच बैठी, लेकिन अभी तक रिपोर्ट सामने नहीं आई।
- नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 6बी के 171 कार्यों की जांच के लिए समिति बनी, लेकिन परिणाम नहीं आया।
- स्वकर प्रपत्र भरकर टैक्स जमा कराने वाले सात हजार भवनों की के 27 अप्रैल को दिए गए थे निर्देश।
- पीएम आवास योजना में फर्जीवाड़े की बैठी जांच, कार्रवाई अभी तक किसी पर नहीं।
- वर्ष 2011 से लेकर 2014-15 तक हुए करीब 80 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच अभी तक लटकी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। भ्रष्टाचार या अन्य विवादित मामले आने के बाद विभिन्न विभागों में जांच तो बैठ जाती है, लेकिन वह पूरी ही नहीं होती। हालात यह है कि मौजूदा समय में भी नगर निगम समेत कई अन्य विभागों में कई-कई माह से जांच अटकी पड़ी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब जांच पर पर्दा ही गिराना है तो जांच के नाम पर दिखावा क्यों?
नगर निगम में पिछले दिनों 17 करोड़ रुपये से अधिक की टेंडर प्रक्रिया में एक अधिकारी द्वारा मनमाने तरीके से शर्तें बदल दी गई। नगर निगम में जोरों पर चर्चा है कि महाराष्ट्र की फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया, जिससे कुछ लाभ एडवांस में ले भी लिया गया। मामला नगर आयुक्त के संज्ञान में आया तो उन्होंने गड़बड़ी की आशंका जताते हुए तीन सदस्यों की जांच बिठाई, जिसमें अपर नगर आयुक्त प्रदीप यादव, जलकल महाप्रबंधक पुरुषोत्तम कुमार और लेखा अधिकारी मनोज त्रिपाठी को रखा गया। 29 मई तक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश नगर आयुक्त द्वारा दिए गए थे, लेकिन आज तक जांच पूरी नहीं हुई है। इस संबंध में शुक्रवार को अपर नगर आयुक्त प्रदीप यादव से पूछा गया तो वह जवाब देने की बजाय दफ्तर से उठकर चले गए।
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- चिलकाना रोड पर नाला निर्माण के भ्रष्टाचार में दोषियों से नगर निगम ने रिकवरी तो की गई, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई।
- नगर निगम में लिपिक और अधिकारी के बीच मारपीट मामले की जांच बैठी, लेकिन अभी तक रिपोर्ट सामने नहीं आई।
- नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 6बी के 171 कार्यों की जांच के लिए समिति बनी, लेकिन परिणाम नहीं आया।
- स्वकर प्रपत्र भरकर टैक्स जमा कराने वाले सात हजार भवनों की के 27 अप्रैल को दिए गए थे निर्देश।
- पीएम आवास योजना में फर्जीवाड़े की बैठी जांच, कार्रवाई अभी तक किसी पर नहीं।
- वर्ष 2011 से लेकर 2014-15 तक हुए करीब 80 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच अभी तक लटकी है।