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खुजनावर के टीले में दफन हैं इतिहास के महत्वपूर्ण राज

Sun, 30 Aug 2020 10:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2020 10:45 PM IST
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Important secrets of history are buried in the mound of Khujnavar
चाचा राव नदी से कटाव के बाद ऊपर आया कुआं और टीले पर बसी खुजनावर की आबादी। - फोटो : SAHARANPUR
छुटमलपुर (सहारनपुर)। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण महाभारतकालीन गांव खुजनावर का टीला अपने सीने में कई सभ्यताओं के राज समेटे हैं। यहां ग्रामीणों द्वारा की गई खोदाई में तांबे के कुषाणकालीन सिक्के भी मिल चुके हैं। हालांकि यहां अभी तक पुरातत्व विभाग द्वारा उत्खनन नहीं कराया। यदि उत्खनन होता है तो यहां की मिट्टी में दफन इतिहास के अन देखे पहलुओं से लोग रूबरू हो सकेंगे। छुटमलपुर फतेहपुर स्टेट हाईवे पर चाचा राव नदी के किनारे करीब तीस फुट ऊंचे टीले पर खुजनावर गांव बसा है। कभी यहां प्राचीन गुंजावर शहर होता था।
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महाभारत काल का धनराज सरोवर भी यहां है। कथा प्रसंगों के अनुसार यहीं भीम ने हिडंब को मारकर हिडंब से गंधर्व विवाह किया । कई सभ्यताओं से होकर गुजरे इस गांव के टीले के नीचे से झांकती चौड़ी ईंटें इसकी प्राचीन भव्यता की तरफ इशारा करती हैं। ग्रामीणों के अनुसार यहां खुदाई के दौरान पूर्व में सिक्के भी प्राप्त होते रहे हैं। जो सिक्के मिले हैं वे तांबे के कुषाणकालीन सिक्के हैं। सिक्के की एक ओर लंबा वस्त्र पहने हाथ में धनुष लिए योद्धा खड़ा नजर आ रहा है तो इसके किनारे पर मोटे बिंदु बनाए हैं। इनका वजन सात ग्राम है। इतिहासकारों के अनुसार तांबे के इस वजन और बनावट के सिक्के कुषाण काल में ही प्रयोग में लाए जाते थे। कुषाणों का समय ईसा से सौ सदी पूर्व का रहा है। ऐसे में सिक्कों और यहां मिलने वाली चौड़ी ईंटों का समयकाल करीब 21 सौ साल पुराना बैठता है।
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गांव के डॉ. इख्तियार राव बताते हैं कि कुछ साल पूर्व उन्हें भी पुल के पास से हुई खोदाई में तांबे के ऐसे सिक्के मिले थे जो उनसे कोई ले गया था। ऐतिहासिक स्थलों को बचाने के लिए काम कर रहे शोधार्थी एवं लेखक राजीव उपाध्याय ने भी अपनी किताब में यहां से मिले सिक्कों का जिक्र किया। खुजनावर गांव में एक पूरा कुआं चाचा राव नदी के बीच में खड़ा है। इससे पता चलता है कि नदी पहले छोटी रही होगी और कुआं गांव के बीच में होगा। नदी धीरे धीरे आबादी को अपनी जद में लेती रही और कुआं उसके बीच में आ गया। गांव में हालांकि अभी तक पुरातत्व विभाग की तरफ से कभी कोई उत्खनन कार्य नहीं किया। अब मेरठ में पुरातत्व विभाग का सर्किल कार्यालय खुलने से उम्मीद बंधी है कि यदि यहां उत्खनन होता है तो लोग गांव के गौरवशाली इतिहास से रूबरू होंगे।
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