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Saharanpur News: बसों की छत टपकी तो जिम्मेदार होंगे फोरमैन, चालक और परिचालक
Thu, 11 Jul 2024 02:52 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 11 Jul 2024 02:52 AM IST
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सहारनपुर। बरसात के मौसम को देखते हुए परिवहन निगम ने रोडवेज बसों को दुरुस्त कराना शुरू कर दिया है। बसों के टायर, वाइपर, बसों की छत, सीट की जांच के बाद ही बसों को डिपो से बाहर निकाला जा रहा है। बस की छत टपकी तो फोरमैन, चालक और परिचालक जिम्मेदार होंगे।
सहारनपुर परिवहन निगम परिक्षेत्र के छह डिपो में 714 बसों का बेड़ा है। इनमें निगम की 566 और 148 अनुबंधित बसें शामिल हैं। सबसे ज्यादा 223 बसें सहारनपुर डिपो में है। मुजफ्फरनगर में सर्वाधिक 44 बसें अनुबंधित की संचालित हो रही हैं। मानसून दस्तक दे चुका है। कुछ दिन पहले बरसात हुई तो परिवहन निगम ने भी कमर कस ली थी। इसलिए बसों को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है। परिवहन निगम अधिकारियों ने भी फोरमैन, चालक और परिचालकों से कहा गया है कि बसों की जांच के बाद ही सड़क पर लेकर निकलें। क्योंकि 50 से अधिक बसें ऐसी हैं, जो 10 साल और 11 लाख किलोमीटर चल चुकी। यह बसें नीलाम की श्रेणी में शामिल है। पुरानी बसों की बॉडी कमजोर होती है। इसलिए इन बसों में छत से पानी टपकने की अधिक संभावना रहती है।
उधर, सेवा प्रबंधक अक्षय कुमार ने बताया कि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में सभी बसों को कार्यशाला में दुरुस्त किया जा रहा है। सामान भी पर्याप्त मात्रा में है, ताकि मरम्मत के दौरान कोई समस्या उत्पन्न न हो। बस में कोई कमी मिलती है तो फोरमैन, चालक व परिचालक जिम्मेदार होंगे।
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सहारनपुर परिवहन निगम परिक्षेत्र के छह डिपो में 714 बसों का बेड़ा है। इनमें निगम की 566 और 148 अनुबंधित बसें शामिल हैं। सबसे ज्यादा 223 बसें सहारनपुर डिपो में है। मुजफ्फरनगर में सर्वाधिक 44 बसें अनुबंधित की संचालित हो रही हैं। मानसून दस्तक दे चुका है। कुछ दिन पहले बरसात हुई तो परिवहन निगम ने भी कमर कस ली थी। इसलिए बसों को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है। परिवहन निगम अधिकारियों ने भी फोरमैन, चालक और परिचालकों से कहा गया है कि बसों की जांच के बाद ही सड़क पर लेकर निकलें। क्योंकि 50 से अधिक बसें ऐसी हैं, जो 10 साल और 11 लाख किलोमीटर चल चुकी। यह बसें नीलाम की श्रेणी में शामिल है। पुरानी बसों की बॉडी कमजोर होती है। इसलिए इन बसों में छत से पानी टपकने की अधिक संभावना रहती है।
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उधर, सेवा प्रबंधक अक्षय कुमार ने बताया कि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में सभी बसों को कार्यशाला में दुरुस्त किया जा रहा है। सामान भी पर्याप्त मात्रा में है, ताकि मरम्मत के दौरान कोई समस्या उत्पन्न न हो। बस में कोई कमी मिलती है तो फोरमैन, चालक व परिचालक जिम्मेदार होंगे।
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