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यदि माता सीता नहीं होतीं तो प्रभु राम, राम नहीं होते : महामंडलेश्वर कैलाशानंद

Tue, 28 Oct 2025 12:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Tue, 28 Oct 2025 12:36 AM IST
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If Mother Sita had not been there then Lord Ram would not have been Ram: Mahamandaleshwar Kailashanand
सहारनपुर के ​शिवधाम में श्रीराम कथा करते महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज
सहारनपुर। शिवधाम कॉलोनी में जारी श्रीराम कथा के दूसरे दिन महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने भक्तों को कथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि प्रभु राम की कथा माता सीता का चरित्र है। यदि सीता नहीं होतीं, राम राम नहीं होते, सीता और राम का जो संबंध है। वह अभेद है। प्रभु राम का जब राज्याभिषेक हो रहा था तब उन्हें वनगमन का आदेश प्राप्त हुआ। वह माता-पिता की आज्ञा पर वन को चले गए। तभी वह राम कहलाए।
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उन्होंने कहा कि प्रभु राम उस कुल में जन्मे, जहां पर बड़े-बड़े प्रतापी राजा जब अपने स्वर्ण रथ से चलते थे तो देवराज इंद्र भी उन्हें अपना आधा आसन बैठने के लिए प्रदान करते थे, लेकिन जो नाम प्रभु राम का हुआ, वैसा किसी अन्य का नहीं। अयोध्या वहां होती है, जहां पर प्रभु राम वास करते हैं। बिना राम के अयोध्या कैसी। प्रभु राम के विविध गुण है। विविध वर्णन है। उनका जितना वर्णन करें, उतना कम है। अवध का मतलब है जो वध से परे हो और अयोध्या का मतलब है जहां युद्ध न हो।
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प्रभु राम ने राज्य पाने के लिए अपने भाई से युद्ध नहीं किया। बल्कि माता-पिता की आज्ञा को सर्वोपरि माना। उन्होंने शिव-पार्वती विवाह, दक्ष यज्ञ विध्वंस, माता सती का देह त्याग एवं अंत में ऋषि अगस्त से शिव का मिलन कथा का प्रसंग सुनाए। इससे पहले श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर में महामंडलेश्वर डॉ. कैलाशानंद गिरि महाराज ने मुख्य यजमान अंगूरी देवी से रुद्राभिषेक कराया। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, विधायक लखनऊ राजेश्वर सिंह, विधायक राजीव गुंबर, दिनेश सेठी, संजय कूपर, उदयवीर शर्मा आदि मौजूद रहे। मुख्य यजमान परिवार से अजय गुप्ता, अतुल गुप्ता, राजेश गुप्ता, अनिल गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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- लड़का-लड़की नहीं पुत्र-पुत्री बोलें

शंकराचार्य राजराजेश्वर ने कहा कि आजकल किसी की संतान होने पर माता-पिता पुत्र या पुत्री न कहकर लड़का-लड़की बोलते हैं। उन्होंने सभी से पुत्र और पुत्री कहकर संबोधित करने का आह्वान किया। कहा कि पूजा पाठ का कोई स्थान और कोई समय नहीं होता। युवा अवस्था से ही भजन शुरू करना चाहिए, जिससे वृद्धावस्था तक उसका फल मिलने लग। ज्ञान मिलने पर शांत हो जाना चाहिए। जहां पर जटिलताएं और संशय हो, वहां अपने ज्ञान से संशय को दूर करना चाहिए।

सहारनपुर के शिवधाम में श्रीराम कथा करते महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज

सहारनपुर के शिवधाम में श्रीराम कथा करते महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज

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