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सड़क हादसों ने छीना सैकड़ों परिवारों का सहारा

Fri, 09 Oct 2020 11:46 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2020 11:46 PM IST
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Hundreds of families resorted to road accidents
अधिवक्ता सूर्य प्रकाश - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। सड़क पर सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद जिले में हर साल सड़क हादसों में 300 से 350 लोगों की मौत हो जाती है। इन हादसों में पीड़ित परिवारों से आजीविका का सहारा भी छिन जाता है। हादसों में अपनों को खोने के बाद सैकड़ों लोग आजीविका और मुआवजा पाने के लिए अब तक संघर्ष कर रहे हैं। पुलिस, कोर्ट, बीमा एजेंट से लेकर अन्य सरकारी कार्यालयों में लंबी जद्दोजहद के बाद कुछ पीड़ितों को ही मुआवजा या बीमा कवर मिल पाता है। इसके पीछे कई तकनीकी कारण भी हैं। सड़क हादसों के बाद पीड़ितों को सरकारी तंत्र से क्या मदद या मुआवजा राशि मिली। इसी की पड़ताल के प्रयास किए गए। पेश है रिपोर्ट....।
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मुआवजा तो छोड़िए, पहले रोटी का इंतजाम हो जाए
- चार माह पूर्व भाटखेड़ी रोड पर साधारणसिर निवासी सुरेद्र की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। एक अज्ञात वाहन और उसकी बाइक में टक्कर हुई थी। उसकी पत्नी सविता बताती हैं कि तीन बच्चों का पेट भरने की जिम्मेदारी अब उस पर है। उसे भट्ठे पर जाकर मजदूरी करनी पड़ती है। इसलिए मुआवजा तो छोड़िए, पहले रोटी का इंतजाम जरूरी है।
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- छह माह पूर्व गांव रामखेड़ी निवासी मंजीत की सड़क हादसे में मौत के बाद उसकी पत्नी और एक साल की बच्ची परिवार में बची है। उसके चाचा कर्मवीर बताते हैं कि रिपोर्ट तो दर्ज हो गई थी, लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। मुआवजा या सहायता राशि मिलेगी। पता नहीं।
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- सात माह पहले गांव बाल्लू में युवक रवींद्र की सड़क हादसे में मौत के बाद रिपोर्ट तो दर्ज हो गई, लेकिन अब तक मुुआवजे के लिए चक्कर काट रहे हैं। महज चार बीघा जमीन है। इसी से गुजारा कर रहे हैं।
हर साल 300 से ज्यादा वाद होते हैं दायर
- सड़क हादसों से जुड़े मामलों में पैरवी करने वाले अधिवक्ता सूर्य प्रकाश कहते हैं कि हर साल 300 से अधिक वाद कोर्ट में दायर होते हैं। पीड़ित पक्ष, पुलिस और अधिवक्ताओं के तमाम प्रयासों के बावजूद इनमें से आधे मामलों का ही निस्तारण हो पाता है। इसके प्रमुख कारणों में तो सबसे पहला वाद दायर करने में ही देरी होना है। अधिकतर पीड़ित पक्ष जब तक परिवार और समाज के अन्य लोगों से राय लेता है। तब तक बहुत देर हो जाती है।

- अधिवक्ता सतीश बंसल कहते हैं कि जो मामले लंबे समय तक निस्तारित नहीं हो पाते हैं। उन्हें लोक अदालतों में आपसी सुलह और आसान प्रक्रिया से निपटाने के प्रयास किए जाते हैं। इससे काफी मदद भी मिली है। लेकिन मुआवजा प्रक्रिया में वाहन की पहचान, गवाहों का उपलब्ध न होना, गवाहों को तैयार करने में देरी, पुलिस की विवेचना में तथ्यों की कमी, बीमा कवर के लिए मानकों के अनुरूप दस्तावेज न होने की बाधाएं हैं।

अधिवक्ता सतीस बंसल

अधिवक्ता सतीस बंसल- फोटो : SAHARANPUR

सड़क हादस्स का पीडित परिवार

सड़क हादस्स का पीडित परिवार- फोटो : SAHARANPUR

सड़क हादस्स का पीडित परिवार

सड़क हादस्स का पीडित परिवार- फोटो : SAHARANPUR

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