{"_id":"5fd10f218ebc3e3c4f42e511","slug":"human-rights-claims-very-different-ground-reality-saharanpur-news-mrt514732334","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानवाधिकार के दावे बहुत, जमीनी हकीकत अलग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानवाधिकार के दावे बहुत, जमीनी हकीकत अलग
विज्ञापन
मानवाधिकार दिवस
शिक्षा के अधिकार से भी वंचित हैं जनपद में 7167 बच्चे
स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़े, 60 प्रतिशत चिकित्सकों की कमी
सहारनपुर। आज हम मानवाधिकार दिवस मना रहे हैं, लेकिन जिले में लोग अब भी मूलभूत सुविधाओं और सेवाओं से वंचित हैं। जनपद में 7167 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें शिक्षा के अधिकार होने के बावजूद पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज होने पर भी उच्च स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा और जिला अस्पताल में 60 प्रतिशत चिकित्सकों की कमी है।
कोरोना काल के बीच चल रही ऑनलाइन कक्षाओं में 40 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनके पास एंड्रायड मोबाइल फोन नहीं और वह पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, जबकि 14 वर्ष तक के बच्चे को पूूर्ण शिक्षा दिलाए जाने का प्रावधान है। स्कूल प्रबंधनों की ओर से अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन कोरोना संक्रमण के डर की वजह से अभिभावक बच्चों को नहीं भेज रहे हैं। हिंदू कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य कुदसिया अंजुम कहना है कि मानवाधिकार को लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं हर व्यक्ति को मिलने का अधिकार हैं, लेकिन मानवाधिकार को लेकर होने वाले दावे जमीनी हकीकत से अलग हैं। लड़कों को पढ़ाने के लिए अभिभावक तैयार हैं, लेकिन लड़कियों को पढ़ाने में संकोच करते हैं। अल्पसंख्यक आयोग की सलाहकार सदस्य समरीन फात्मा का कहना है कि मानवाधिकार के तहत मूलभूत सुविधाएं बिना भेदभाव के सबको मिलनी चाहिए, लेकिन कई मामलों में देखा गया कि लोग अपने अधिकार से वंचित रह जाते हैं।
श्रम कानूनों का भी नहीं होता पालन
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह त्यागी व मंत्री दानिश सिद्दीकी का कहना है कि श्रम कानूनों का पालन नहीं होता है। श्रम कानून के प्रावधान के अनुसार काम के हिसाब से कर्मचारी को तनख्वाह मिलनी चाहिए और अत्यधिक काम लेने पर अतिरिक्त पैसा भी मिलनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। इनके अलावा राज्य कर्मचारी भी लंबे समय मूलभूत सुविधाओं को लेकर आंदोलन करते रहे हैं।
विज्ञापन
गायब हो गए मानवाधिकार संरक्षण के नियमों के बोर्ड
सहारनपुर। मानवाधिकार संरक्षण के नियमों को लेकर थानों पर बोर्ड लगे हैं। कोतवाली सदर बाजार में लगा बोर्ड कोविड के लिए लगाए गए जागरूकता के फ्लैक्स से ढका है। महिला थाने में बोर्ड ही नहीं लगा है, जबकि अन्य थानों में बोर्ड लगे हैं। घरेलू हिंसा की शिकायत लेकर पुलिस लाइन पहुंची नवीनगर निवासी संगीता का कहना है कि मानवाधिकार को लेकर जो प्रावधान है, उनका पूरी तरह पालन नहीं होता है। न्याय पाने के लिए तीन माह से भटक रही हैं।
नहीं मिल पाई उच्च स्वास्थ्य सेवाएं
सहारनपुर। पिलखनी में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुए आठ वर्ष से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन अत्याधुनिक मशीनें और चिकित्सकों की कमी की वजह उच्च स्वास्थ्य सेवाएं लोगों को नहीं मिल पाती है। इसी तरह जिला अस्पताल 60 प्रतिशत चिकित्सकों की कमी की वजह से नागरिकों बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है। जिला अस्पताल में एमआरआई के लिए भवन को बने हुए आठ माह से अधिक का समय हो गया, लेकिन आज तक मशीन नहीं आई है।
विज्ञापन
शिक्षा के अधिकार से भी वंचित हैं जनपद में 7167 बच्चे
स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़े, 60 प्रतिशत चिकित्सकों की कमी
सहारनपुर। आज हम मानवाधिकार दिवस मना रहे हैं, लेकिन जिले में लोग अब भी मूलभूत सुविधाओं और सेवाओं से वंचित हैं। जनपद में 7167 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें शिक्षा के अधिकार होने के बावजूद पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज होने पर भी उच्च स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा और जिला अस्पताल में 60 प्रतिशत चिकित्सकों की कमी है।
कोरोना काल के बीच चल रही ऑनलाइन कक्षाओं में 40 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनके पास एंड्रायड मोबाइल फोन नहीं और वह पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, जबकि 14 वर्ष तक के बच्चे को पूूर्ण शिक्षा दिलाए जाने का प्रावधान है। स्कूल प्रबंधनों की ओर से अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन कोरोना संक्रमण के डर की वजह से अभिभावक बच्चों को नहीं भेज रहे हैं। हिंदू कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य कुदसिया अंजुम कहना है कि मानवाधिकार को लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं हर व्यक्ति को मिलने का अधिकार हैं, लेकिन मानवाधिकार को लेकर होने वाले दावे जमीनी हकीकत से अलग हैं। लड़कों को पढ़ाने के लिए अभिभावक तैयार हैं, लेकिन लड़कियों को पढ़ाने में संकोच करते हैं। अल्पसंख्यक आयोग की सलाहकार सदस्य समरीन फात्मा का कहना है कि मानवाधिकार के तहत मूलभूत सुविधाएं बिना भेदभाव के सबको मिलनी चाहिए, लेकिन कई मामलों में देखा गया कि लोग अपने अधिकार से वंचित रह जाते हैं।
विज्ञापन
श्रम कानूनों का भी नहीं होता पालन
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह त्यागी व मंत्री दानिश सिद्दीकी का कहना है कि श्रम कानूनों का पालन नहीं होता है। श्रम कानून के प्रावधान के अनुसार काम के हिसाब से कर्मचारी को तनख्वाह मिलनी चाहिए और अत्यधिक काम लेने पर अतिरिक्त पैसा भी मिलनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। इनके अलावा राज्य कर्मचारी भी लंबे समय मूलभूत सुविधाओं को लेकर आंदोलन करते रहे हैं।
विज्ञापन
गायब हो गए मानवाधिकार संरक्षण के नियमों के बोर्ड
सहारनपुर। मानवाधिकार संरक्षण के नियमों को लेकर थानों पर बोर्ड लगे हैं। कोतवाली सदर बाजार में लगा बोर्ड कोविड के लिए लगाए गए जागरूकता के फ्लैक्स से ढका है। महिला थाने में बोर्ड ही नहीं लगा है, जबकि अन्य थानों में बोर्ड लगे हैं। घरेलू हिंसा की शिकायत लेकर पुलिस लाइन पहुंची नवीनगर निवासी संगीता का कहना है कि मानवाधिकार को लेकर जो प्रावधान है, उनका पूरी तरह पालन नहीं होता है। न्याय पाने के लिए तीन माह से भटक रही हैं।
नहीं मिल पाई उच्च स्वास्थ्य सेवाएं
सहारनपुर। पिलखनी में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुए आठ वर्ष से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन अत्याधुनिक मशीनें और चिकित्सकों की कमी की वजह उच्च स्वास्थ्य सेवाएं लोगों को नहीं मिल पाती है। इसी तरह जिला अस्पताल 60 प्रतिशत चिकित्सकों की कमी की वजह से नागरिकों बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है। जिला अस्पताल में एमआरआई के लिए भवन को बने हुए आठ माह से अधिक का समय हो गया, लेकिन आज तक मशीन नहीं आई है।