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कैसे लगेगा कोरोना पर अंकुश, चिकित्सक भी पर्याप्त नहीं
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सहारनपुर। कोरोना संक्रमण के साथ ही अधिकारियों की चिंता भी बढ़ रही है। चिंता बढ़ने की वजह संक्रमण नहीं, बल्कि संक्रमण पर काबू पाने के लिए पर्याप्त संख्या में चिकित्सक और चिकित्सकीय स्टाफ नहीं होना है। प्रशासन इस पर मंथन कर रहा है कि यदि बेड बढ़ाने पड़े तो इलाज के लिए चिकित्सक और स्टाफ कहां से आएगा।
एसबीडी जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 61 पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष मात्र 29 ही चिकित्सक तैनात हैं। एक-एक चिकित्सक कई जिम्मेदारियां उठा रहे हैं। वर्तमान में तमाम चिकित्सक कोविड की ड्यूटी में लगे हैं। जिला महिला अस्पताल में 70 फीसदी महिला चिकित्सक कार्यरत हैं, जिन पर काम का बोझ है। नर्स और अन्य चिकित्साकर्मी भी स्वीकृत पदों के सापेक्ष 80 ही फीसदी हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज और जिला महिला अस्पताल का भी यही हाल है। सीएचसी और पीएचसी पर भी हालत खराब है। पहले से ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे विभागीय अधिकारी कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण को लेकर टेंशन में हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पास ये हैं संसाधन
कोरोना मरीजों के इलाज के लिए फिलहाल राजकीय मेडिकल कॉलेज में 300 बेड, ग्लोकल मेडिकल कॉलेज में 200 बेड तथा सीएचसी फतेहपुर में 50 बेड की व्यवस्था है। यानी 550 बेड की व्यवस्था है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में 190 तथा सीएचसी फतेहपुर 30 मरीज भर्ती हैं। 220 मरीजों के इलाज में ही व्यवस्था संभल नहीं पा रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में 60 बेड का आईसीयू फुल चल रहा है, जहां गंभीर मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहा है। विभागीय अधिकारी आपातकाल के लिए 2850 बेड रिजर्व होने की बात कह रहे हैं, साथ ही उनका यह भी कहना है कि विभाग के पास चिकित्सकों और स्टाफ की भारी कमी है। ऐसे में यदि कहीं 2850 बेड की व्यवस्था कर भी दी जाए, तो चिकित्सक और चिकित्सकीय स्टाफ की व्यवस्था करना मुश्किल होगा। यही वजह है कि अब निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल बनाने की जरूरत महसूस होने लगी है। कल ही प्रशासन ने वी-ब्रॉस अस्पताल को कोरोना मरीजों के इलाज की अनुमति दी है।
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आधे भी नहीं चिकित्सक
पद नाम--------------स्वीकृत पद---------कार्यरत
सर्जन ------------------07------------------04
हड्डी रोग विशेषज्ञ----06------------------04
रेडियोलॉजिस्ट--------03-------------------01
फिजीशियन-----------03-------------------02
ईएमओ----------------19-------------------04
पैथोलॉजिस्ट-----------03-------------------02
आई सर्जन--------------03-------------------02
हृदय रोग विशेषज्ञ------01------------------00
नेफ्रोलॉजिस्ट------------01------------------00
मनोचिकित्सक----------01-----------------00
प्लास्टिक सर्जन---------01-----------------00
यूरोलॉजिस्ट--------------01-----------------00
24 की जगह चार ही फार्मासिस्ट
एसबीडी जिला अस्पताल में फार्मासिस्ट के 24 पद स्वीकृत हैं, मगर मात्र चार फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल चल रहा है। औषधि कक्ष आदि जगहों पर फार्मासिस्ट की कमी है। ऐसे में इंटर्नशिप के लिए आने वाले विद्यार्थियों से काम चलाया जा रहा है।
संक्रमण भी बढ़ा रहा चुनौती
एक तरफ चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी, वहीं दूसरी ओर चिकित्सक लगातार संक्रमित निकल रहे हैं। संक्रमण का मतलब है एक व्यक्ति का कम से कम दस दिन तक अवकाश पर चले जाना। 21 अप्रैल को चार तथा 22 अप्रैल को तीन सरकारी चिकित्सक संक्रमित आए। इनके अलावा पैथोलॉजिस्ट और अन्य कर्मचारी भी संक्रमित आ चुके हैं।
विभाग के पास चिकित्सकों और कर्मचारियों की भारी कमी है। फिलहाल हमारे चिकित्सक और कर्मचारी दिनरात एक कर कोरोना मरीजों को इलाज दे रहे हैं। संक्रमण इसी रफ्तार से बढ़ता गया तो बेड बढ़ाने होंगे। हमारे पास 2850 बेड की व्यवस्था है, मगर चिकित्सक और स्टाफ की कमी परेशान कर रही है।
डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।
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एसबीडी जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 61 पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष मात्र 29 ही चिकित्सक तैनात हैं। एक-एक चिकित्सक कई जिम्मेदारियां उठा रहे हैं। वर्तमान में तमाम चिकित्सक कोविड की ड्यूटी में लगे हैं। जिला महिला अस्पताल में 70 फीसदी महिला चिकित्सक कार्यरत हैं, जिन पर काम का बोझ है। नर्स और अन्य चिकित्साकर्मी भी स्वीकृत पदों के सापेक्ष 80 ही फीसदी हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज और जिला महिला अस्पताल का भी यही हाल है। सीएचसी और पीएचसी पर भी हालत खराब है। पहले से ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे विभागीय अधिकारी कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण को लेकर टेंशन में हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के पास ये हैं संसाधन
कोरोना मरीजों के इलाज के लिए फिलहाल राजकीय मेडिकल कॉलेज में 300 बेड, ग्लोकल मेडिकल कॉलेज में 200 बेड तथा सीएचसी फतेहपुर में 50 बेड की व्यवस्था है। यानी 550 बेड की व्यवस्था है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में 190 तथा सीएचसी फतेहपुर 30 मरीज भर्ती हैं। 220 मरीजों के इलाज में ही व्यवस्था संभल नहीं पा रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में 60 बेड का आईसीयू फुल चल रहा है, जहां गंभीर मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहा है। विभागीय अधिकारी आपातकाल के लिए 2850 बेड रिजर्व होने की बात कह रहे हैं, साथ ही उनका यह भी कहना है कि विभाग के पास चिकित्सकों और स्टाफ की भारी कमी है। ऐसे में यदि कहीं 2850 बेड की व्यवस्था कर भी दी जाए, तो चिकित्सक और चिकित्सकीय स्टाफ की व्यवस्था करना मुश्किल होगा। यही वजह है कि अब निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल बनाने की जरूरत महसूस होने लगी है। कल ही प्रशासन ने वी-ब्रॉस अस्पताल को कोरोना मरीजों के इलाज की अनुमति दी है।
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आधे भी नहीं चिकित्सक
पद नाम--------------स्वीकृत पद---------कार्यरत
सर्जन ------------------07------------------04
हड्डी रोग विशेषज्ञ----06------------------04
रेडियोलॉजिस्ट--------03-------------------01
फिजीशियन-----------03-------------------02
ईएमओ----------------19-------------------04
पैथोलॉजिस्ट-----------03-------------------02
आई सर्जन--------------03-------------------02
हृदय रोग विशेषज्ञ------01------------------00
नेफ्रोलॉजिस्ट------------01------------------00
मनोचिकित्सक----------01-----------------00
प्लास्टिक सर्जन---------01-----------------00
यूरोलॉजिस्ट--------------01-----------------00
24 की जगह चार ही फार्मासिस्ट
एसबीडी जिला अस्पताल में फार्मासिस्ट के 24 पद स्वीकृत हैं, मगर मात्र चार फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल चल रहा है। औषधि कक्ष आदि जगहों पर फार्मासिस्ट की कमी है। ऐसे में इंटर्नशिप के लिए आने वाले विद्यार्थियों से काम चलाया जा रहा है।
संक्रमण भी बढ़ा रहा चुनौती
एक तरफ चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी, वहीं दूसरी ओर चिकित्सक लगातार संक्रमित निकल रहे हैं। संक्रमण का मतलब है एक व्यक्ति का कम से कम दस दिन तक अवकाश पर चले जाना। 21 अप्रैल को चार तथा 22 अप्रैल को तीन सरकारी चिकित्सक संक्रमित आए। इनके अलावा पैथोलॉजिस्ट और अन्य कर्मचारी भी संक्रमित आ चुके हैं।
विभाग के पास चिकित्सकों और कर्मचारियों की भारी कमी है। फिलहाल हमारे चिकित्सक और कर्मचारी दिनरात एक कर कोरोना मरीजों को इलाज दे रहे हैं। संक्रमण इसी रफ्तार से बढ़ता गया तो बेड बढ़ाने होंगे। हमारे पास 2850 बेड की व्यवस्था है, मगर चिकित्सक और स्टाफ की कमी परेशान कर रही है।
डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।