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Saharanpur News: कैसे सुधरे परीक्षा परिणाम, राजकीय विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं
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राजकीय कन्या इंटर कॉलेज सहारनपुर
- जनपद में कुल 58 राजकीय माध्यमिक विद्यालय, शिक्षकों के 50 से 60 फीसदी पद खाली
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में राजकीय माध्यमिक विद्यालय लगातार पिछड़ रहे हैंं। बीते करीब एक दशक से इन विद्यालयों से टॉपर निकलना लगभग बंद हो गए हैं। मंगलवार को जारी हुए परीक्षा परिणाम में भी 10वीं और 12वीं के टॉप 10 विद्यार्थियों में केवल एक छात्र राजकीय माध्यमिक विद्यालय का है, जिसने 12वीं में जनपद में छठवां स्थान हासिल किया। राजकीय विद्यालयों का प्रदर्शन लगातार खराब होने की प्रमुख वजह शिक्षकों की भारी कमी होना है।
नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज जनपद का प्रमुख राजकीय विद्यालय है, जहां से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के अनेक महत्वपूर्ण कार्य संचालित होते हैं। इसके बावजूद यहां शिक्षकों के 60 फीसदी से अधिक पद खाली हैं। यहां एलटी ग्रेड शिक्षकों के 22 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से सात ही शिक्षक कार्यरत हैं। प्रवक्ता के आठ पद स्वीकृत हैं, जिनमें से दो ही शिक्षक कार्यरत हैं। रसायन विज्ञान विषय के प्रवक्ता के दो पद स्वीकृत हैं और दोनों ही खाली हैं। गणित के प्रवक्ता के दो पद स्वीकृत है और वह भी खाली हैं। जीव विज्ञान और हिन्दी में भी एक-एक पद खाली है। यदि जनपद के प्रमुख विद्यालय की यह स्थिति है तो बाकी राजकीय विद्यालयों का क्या हाल होगा। पठन पाठन जारी रखने के लिए यहां छह अस्थाई शिक्षक रखे गए हैं, जिनमें बायोलॉजी, हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, गणित और केमिस्ट्री के शिक्षक शामिल हैं। अन्य 57 राजकीय विद्यालयों की भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। ऐसे में राजकीय विद्यालयों से बेहतर परिणाम की उम्मीद करना बेमानी है।
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18 में से 17 इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य नहीं
जनपद में कुल 58 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 18 इंटर कॉलेज और 40 हाई स्कूल हैं। 18 इंटर कॉलेजों में से मात्र एक कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं, जबकि 17 इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य नहीं हैं। ऐसे में कार्यवाहक प्रधानाचार्यों से काम लिया जा रहा है। ज्यादातर हाई स्कूलों को प्रधानाचार्य मिल चुके हैं, लेकिन सभी विद्यालयों में शिक्षकों के 50 से 60 फीसदी पद खाली हैं।
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शिक्षक नहीं होने से घटी छात्रों की संख्या
महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने की वजह से विद्यार्थी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में दाखिला लेने से मुंह मोड़ रहे हैं। नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज ही की बात करें तो करीब पांच वर्ष पहले यहां करीब 545 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। जबकि यहां दो दशक पहले तक दो से ढाई हजार छात्र संख्या रहती थी। वाणिज्य विषय का कोई शिक्षक नहीं होने की वजह से पूरी स्ट्रीम ही खत्म हो गई।
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शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शासनादेश के अनुपालन में राजकीय विद्यालयों से सेवानिवृत्त शिक्षकों से आवेदन मांगे गए हैं। उनको एक निर्धारित मानदेय पर रखा जाएगा। इसके अलावा बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में कार्यरत योग्य शिक्षकों से भी आवेदन मांगे जा रहे हैं। उनको प्रतिनियुक्ति पर रखा जाएगा।
-योगराज सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में राजकीय माध्यमिक विद्यालय लगातार पिछड़ रहे हैंं। बीते करीब एक दशक से इन विद्यालयों से टॉपर निकलना लगभग बंद हो गए हैं। मंगलवार को जारी हुए परीक्षा परिणाम में भी 10वीं और 12वीं के टॉप 10 विद्यार्थियों में केवल एक छात्र राजकीय माध्यमिक विद्यालय का है, जिसने 12वीं में जनपद में छठवां स्थान हासिल किया। राजकीय विद्यालयों का प्रदर्शन लगातार खराब होने की प्रमुख वजह शिक्षकों की भारी कमी होना है।
नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज जनपद का प्रमुख राजकीय विद्यालय है, जहां से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के अनेक महत्वपूर्ण कार्य संचालित होते हैं। इसके बावजूद यहां शिक्षकों के 60 फीसदी से अधिक पद खाली हैं। यहां एलटी ग्रेड शिक्षकों के 22 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से सात ही शिक्षक कार्यरत हैं। प्रवक्ता के आठ पद स्वीकृत हैं, जिनमें से दो ही शिक्षक कार्यरत हैं। रसायन विज्ञान विषय के प्रवक्ता के दो पद स्वीकृत हैं और दोनों ही खाली हैं। गणित के प्रवक्ता के दो पद स्वीकृत है और वह भी खाली हैं। जीव विज्ञान और हिन्दी में भी एक-एक पद खाली है। यदि जनपद के प्रमुख विद्यालय की यह स्थिति है तो बाकी राजकीय विद्यालयों का क्या हाल होगा। पठन पाठन जारी रखने के लिए यहां छह अस्थाई शिक्षक रखे गए हैं, जिनमें बायोलॉजी, हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, गणित और केमिस्ट्री के शिक्षक शामिल हैं। अन्य 57 राजकीय विद्यालयों की भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। ऐसे में राजकीय विद्यालयों से बेहतर परिणाम की उम्मीद करना बेमानी है।
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18 में से 17 इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य नहीं
जनपद में कुल 58 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 18 इंटर कॉलेज और 40 हाई स्कूल हैं। 18 इंटर कॉलेजों में से मात्र एक कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं, जबकि 17 इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य नहीं हैं। ऐसे में कार्यवाहक प्रधानाचार्यों से काम लिया जा रहा है। ज्यादातर हाई स्कूलों को प्रधानाचार्य मिल चुके हैं, लेकिन सभी विद्यालयों में शिक्षकों के 50 से 60 फीसदी पद खाली हैं।
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शिक्षक नहीं होने से घटी छात्रों की संख्या
महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने की वजह से विद्यार्थी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में दाखिला लेने से मुंह मोड़ रहे हैं। नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज ही की बात करें तो करीब पांच वर्ष पहले यहां करीब 545 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। जबकि यहां दो दशक पहले तक दो से ढाई हजार छात्र संख्या रहती थी। वाणिज्य विषय का कोई शिक्षक नहीं होने की वजह से पूरी स्ट्रीम ही खत्म हो गई।
शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शासनादेश के अनुपालन में राजकीय विद्यालयों से सेवानिवृत्त शिक्षकों से आवेदन मांगे गए हैं। उनको एक निर्धारित मानदेय पर रखा जाएगा। इसके अलावा बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में कार्यरत योग्य शिक्षकों से भी आवेदन मांगे जा रहे हैं। उनको प्रतिनियुक्ति पर रखा जाएगा।
-योगराज सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक