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होम आइसोलेशन के मरीजों तक नहीं पहुंच रही दवा
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सहारनपुर। शेरपुर निवासी सचिन कोरोना संक्रमित हैं, जिन्हें होम आइसोलेट किया गया है। सचिन 27 अप्रैल को संक्रमित आए थे, मगर चिकित्सा विभाग की टीम अभी तक उन तक नहीं पहुंची है और न ही उनको दवा दी गई है। यह स्थिति तब है, जबकि सचिन हाल ही में कोरोना की वजह से अपनी मां को खो चुके हैं। ऐसा केवल सचिन के साथ नहीं हो रहा है। जनपद में कई ऐसे कोरोना मरीज हैं, जिनको घर पर दवा नहीं पहुंच रही है।
जिले में इस समय चार हजार से अधिक एक्टिव मरीज हैं, जिनमें से करीब साढ़े तीन हजार मरीज होम आइसोलेट किए गए हैं। नियम है कि जो मरीज होम आइसोलेशन में हैं। उनको घर पर ही दवा पहुंचाई जाए, साथ ही कलक्ट्रेट में बने कंट्रोल रूम के अलावा चिकित्सा विभाग के कंट्रोल रूम से मरीज को दिन में फोन कर हाल जानने के निर्देश दिए गए हैं। मगर कुछ मरीजों को घर बैठे दवा का लाभ नहीं मिल रहा है। शेरपुर निवासी सचिन ने बताया कि उनकी मां के कोरोना से निधन के बाद उन्होंने अपनी जांच कराई थी, जिसमें वह संक्रमित पाए गए, जब एक दिन बाद तक कोई टीम घर नहीं पहुंची और दवा नहीं दी। इसके बाद उन्होंने खुद विभाग को फोन करना शुरू किया। जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में फोन किया, मगर वहां से भी उनके हाथ निराशा ही लगी। सचिन का कहना है कि उनके परिवार में करीब 15 सदस्य हैं, जिनमें से चार लोगों को कई दिन से बुखार आ रहा है और कोरोना के तमाम लक्षण हैं। बार-बार मांग करने के बाद भी उनके परिजनों की जांच नहीं कराई जा रही है। सचिन ने बताया कि कंट्रोल रूम और विभाग से फोन पर केवल हाथ पूछा जा रहा है। उधर, तकिया निवासी एक व्यक्ति की रिपोर्ट भी तीन दिन पहले पॉजिटिव आई थी, मगर अभी तक दवा नहीं मिली है। चूंकि संक्रमित व्यक्ति को निजी चिकित्सक इलाज नहीं कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में दवाई नहीं मिलने से मरीज के साथ ही परिजन भी घबराए हुए हैं।
कम ही लोगों के साथ है ऐसी स्थिति
होम आइसोलेट मरीजों को घर पर इलाज मिल रहा है या नहीं। इसकी पड़ताल के लिए शुक्रवार को दस मरीजों से फोन पर बात की गई। जिनमें से आठ लोगों ने घर पर दवा मिलने की बात कही, जबकि दो मरीजों ने इससे इंकार किया। करीब 15 से 20 फीसदी मरीज ऐसे हो सकते हैं, जिनको दवा ना दी जा रही हो।
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होम आइसोलेट मरीजों में से सौ फीसदी मरीजों को घर पर जाकर पांच-पांच दिन की दवाई दी जा रही है। कुछ मरीज दस से 15 दिन की दवा की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग पूरी नहीं होने पर वह इस तरह के आरोप लगा रहे हैं, जो बेबुनियाद हैं। यदि किसी मरीज को वाकई दवा नहीं मिल रही है तो वह कंट्रोल रूम से आने वाले फोन पर शिकायत करे।
डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।
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जिले में इस समय चार हजार से अधिक एक्टिव मरीज हैं, जिनमें से करीब साढ़े तीन हजार मरीज होम आइसोलेट किए गए हैं। नियम है कि जो मरीज होम आइसोलेशन में हैं। उनको घर पर ही दवा पहुंचाई जाए, साथ ही कलक्ट्रेट में बने कंट्रोल रूम के अलावा चिकित्सा विभाग के कंट्रोल रूम से मरीज को दिन में फोन कर हाल जानने के निर्देश दिए गए हैं। मगर कुछ मरीजों को घर बैठे दवा का लाभ नहीं मिल रहा है। शेरपुर निवासी सचिन ने बताया कि उनकी मां के कोरोना से निधन के बाद उन्होंने अपनी जांच कराई थी, जिसमें वह संक्रमित पाए गए, जब एक दिन बाद तक कोई टीम घर नहीं पहुंची और दवा नहीं दी। इसके बाद उन्होंने खुद विभाग को फोन करना शुरू किया। जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में फोन किया, मगर वहां से भी उनके हाथ निराशा ही लगी। सचिन का कहना है कि उनके परिवार में करीब 15 सदस्य हैं, जिनमें से चार लोगों को कई दिन से बुखार आ रहा है और कोरोना के तमाम लक्षण हैं। बार-बार मांग करने के बाद भी उनके परिजनों की जांच नहीं कराई जा रही है। सचिन ने बताया कि कंट्रोल रूम और विभाग से फोन पर केवल हाथ पूछा जा रहा है। उधर, तकिया निवासी एक व्यक्ति की रिपोर्ट भी तीन दिन पहले पॉजिटिव आई थी, मगर अभी तक दवा नहीं मिली है। चूंकि संक्रमित व्यक्ति को निजी चिकित्सक इलाज नहीं कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में दवाई नहीं मिलने से मरीज के साथ ही परिजन भी घबराए हुए हैं।
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कम ही लोगों के साथ है ऐसी स्थिति
होम आइसोलेट मरीजों को घर पर इलाज मिल रहा है या नहीं। इसकी पड़ताल के लिए शुक्रवार को दस मरीजों से फोन पर बात की गई। जिनमें से आठ लोगों ने घर पर दवा मिलने की बात कही, जबकि दो मरीजों ने इससे इंकार किया। करीब 15 से 20 फीसदी मरीज ऐसे हो सकते हैं, जिनको दवा ना दी जा रही हो।
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होम आइसोलेट मरीजों में से सौ फीसदी मरीजों को घर पर जाकर पांच-पांच दिन की दवाई दी जा रही है। कुछ मरीज दस से 15 दिन की दवा की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग पूरी नहीं होने पर वह इस तरह के आरोप लगा रहे हैं, जो बेबुनियाद हैं। यदि किसी मरीज को वाकई दवा नहीं मिल रही है तो वह कंट्रोल रूम से आने वाले फोन पर शिकायत करे।
डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।