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हाईकोर्ट पहुंचा जैन कॉलेज की जमीन का मामला
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हाईकोर्ट पहुंचा जैन कॉलेज की जमीन का मामला
सहारनपुर। जैन डिग्री कॉलेज की जमीन को लेकर चल रहा विवाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। अधिवक्ता फरहा फैज सहित 15 लोगों के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले में हुई विवेचना और चार्जशीट लगाने पर सवाल उठाया गया है। उसमें तीन मार्च तक पुलिस को जवाब दाखिल करना है।
जैन डिग्री कॉलेज की भूमि को धोखाधड़ी के आधार पर बिक्री करने के आरोप में अधिवक्ता फरहा फैज सहित 15 लोगों के खिलाफ 2010 में सदर बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी।
वहीं, अधिवक्ता फरहा फैज ने इस महीने हाईकोर्ट में याचिका डाली, जिसमें आरोप लगाया कि मुकदमे की विवेचना में पुलिस ने साक्ष्यों को शामिल नहीं किया, जो साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। उनका कहना है कि कॉलेज की 6000 वर्गगज से अधिक भूमि को कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से बेचा गया। उसके साक्ष्य भी उपलब्ध हैं और इसकी जांच के लिए मुख्य सचिव के आदेश पर तीन अधिकारियों की जांच समिति भी बनी थी। उसी जांच को प्रभावित करने के लिए 2010 में उनके सहित 15 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद उन्होंने तमाम पुलिस अधिकारियों से मिलकर विवेचना में उन सभी साक्ष्यों को शामिल कराने की मांग की, लेकिन साक्ष्य शामिल नहीं किए गए और चार्जशीट दाखिल कर दी।
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उन्होंने बताया कि एक साल में 21 बार अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दे चुकी हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी कारण हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने पुलिस को तीन मार्च तक इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
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सहारनपुर। जैन डिग्री कॉलेज की जमीन को लेकर चल रहा विवाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। अधिवक्ता फरहा फैज सहित 15 लोगों के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले में हुई विवेचना और चार्जशीट लगाने पर सवाल उठाया गया है। उसमें तीन मार्च तक पुलिस को जवाब दाखिल करना है।
जैन डिग्री कॉलेज की भूमि को धोखाधड़ी के आधार पर बिक्री करने के आरोप में अधिवक्ता फरहा फैज सहित 15 लोगों के खिलाफ 2010 में सदर बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी।
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वहीं, अधिवक्ता फरहा फैज ने इस महीने हाईकोर्ट में याचिका डाली, जिसमें आरोप लगाया कि मुकदमे की विवेचना में पुलिस ने साक्ष्यों को शामिल नहीं किया, जो साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। उनका कहना है कि कॉलेज की 6000 वर्गगज से अधिक भूमि को कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से बेचा गया। उसके साक्ष्य भी उपलब्ध हैं और इसकी जांच के लिए मुख्य सचिव के आदेश पर तीन अधिकारियों की जांच समिति भी बनी थी। उसी जांच को प्रभावित करने के लिए 2010 में उनके सहित 15 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद उन्होंने तमाम पुलिस अधिकारियों से मिलकर विवेचना में उन सभी साक्ष्यों को शामिल कराने की मांग की, लेकिन साक्ष्य शामिल नहीं किए गए और चार्जशीट दाखिल कर दी।
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उन्होंने बताया कि एक साल में 21 बार अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दे चुकी हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी कारण हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने पुलिस को तीन मार्च तक इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।