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वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से वादों की होगी सुनवाई

Thu, 17 Jun 2021 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jun 2021 12:18 AM IST
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Hearing of cases will be done through video conferencing
सहारनपुर। जिला सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार त्रिपाठी ने उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायिक कार्य के लिए अधिकारियों को नामित किया है। न्यायिक कार्य की सुनवाई रोटेशन के आधार होगी।
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उन्होंने आज यहां इस आशय का आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि 17 जून को जमानतों की सुनवाई स्लॉट वन पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार त्रिपाठी सुबह 10.30 बजे से पूर्वान्ह 12.30 बजे तक करेंगे। स्लॉट दो पर अपराह्न 12.35 से 2.30 बजे तक अपर जिला न्यायाधीश सुभाष चन्द्रा एडीजे कोर्ट नंबर चार में सुनवाई करेंगे। फौजदारी के मामले एसीजेएम प्रथम राजीव शरन, सिविल जज (सीडी) अमित कुमार तथा जेएम प्रथम रजत शर्मा सुबह 10.30 बजे से सुनवाई करेंगे। दीवानी प्रकरणों को स्लॉट वन पर जेएससीसी भूपेन्द्र कुमार, स्लॉट दो पर सिविल जज (जूडि) हवाली रोहित पुरी सुनेंगे। इसी प्रकार देवबंद में एसीजे (जूडि)/ जेएम सुनवाई करेंगे। फैमिली कोर्ट में एसीजे (जूडि)/एफटीसी (क्राइम अगेंस्ड वूमेन) जीनत परवीन सुनवाई करेंगी।
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इसी प्रकार 18 जून को स्लॉट वन पर अपर जिला न्यायाधीश ललित नारायण झा एवं स्लॉट दो पर स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट वीके डूंगरकोटी सुनवाई करेंगे। मजिस्ट्रीयल कोर्ट में सीजेएम अनिल कुमार नवम, एसीजेएम द्वितीय रंजन कुमार गोंड और जेएम द्वितीय कुमार आशीष सुनवाई करेंगे। सिविल जज कोर्ट में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शीशपाल सिंह और सिविल जज (जूनियर डिवीजन)सिटी गीतिका गर्ग सुनवाई करेगी। फैमिली कोर्ट में एसीजे जूनियर डिवीजन) हुमा सुनवाई करेंगी। देवबंद स्थित न्यायालय में एसीजे(सीनियर डिवीजन)/ एसीजेएम लीलू सुनवाई करेंगे। शनिवार और रविवार को अवकाश रहेगा।
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न्यायालय में केवल लंबित और ताजा जमानत, रिहाई, धारा 164 सीआरपीसी के तहत बयान की रिकॉर्डिंग, रिमांड, विविध के निपटान जैसे जरूरी मामलों को ही सुना जाएगा। तत्काल आपराधिक आवेदन, छोटे अपराधों के मामलों का निपटान, समय-समय पर जारी उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के निर्देश और नागरिक प्रकृति के तत्काल मामले (जैसे निषेधाज्ञा मामले और नागरिक प्रकृति के अन्य आवेदन)। अन्य दीवानी मामलों (जैसे नए वादों आदि की संस्था) की तात्कालिकता स्थानीय स्तर पर तय की जा सकती है और उपयुक्त पाए जाने पर सुनवाई के लिए निर्देशित किया जा सकता है।
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