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निराश होकर लौटे गुरदीप के परिजन
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 16 Dec 2016 12:08 AM IST
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गुरदीप का फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के गंगोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडा से मिलने की आस लेकर दिल्ली में विदेश मंत्रालय पहुंचे गुरदीप के परिजन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक से नही मिल सके। वह दिल्ली से लौट आए है।
इंडोनेशिया में 29 अगस्त 2004 को सुकर्णो हत्ता हवाई अड्डे पर इंडोनेशिया, नाईजीरिया, जिम्बाब्वे और पाकिस्तान के 13 लोगों के अलावा क्षेत्र के गांव शीतलपुर निवासी गुरदीप को भी मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में पकड़ा था। तब से वह जेल में है।
फरवरी 2005 में सभी आरोपियों को सजा-ए-मौत सुनाई । 28 जुलाई 2016 की रात में आरोपियों में से चार को गोली मारकर मौत की नींद सुलाया। अब अगला नंबर गुरदीप का था।
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हालांकि भारत सरकार में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के चलते उसकी और बाकी आरोपियों की सजा को स्थगित कर दिया। इसके बाद गुरदीप के पिता ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से उसके कानूनी प्रतिनिधि अफजाल मोहम्मद के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अर्जी दाखिल की।
भारतीय दूतावास ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय को एक नोट वर्बेल भेजा। इसमें मौत की सजा से पूर्व सभी कानूनी उपाय अपनाने का आग्रह किया। इसके बाद गुरदीप को कुछ दिनों की राहत मिल गई।
अब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के मादक तस्करों को माफ न करने संबंधी बयान ने गुरदीप के परिजनों की नींद उड़ा दी । गत दिवस इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सपत्नीक दो दिन की भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे।
उससे मिलने के लिए गुरदीप की पत्नी कुलविंद्र , पुत्र सुखचैन, पुत्री मनजौत और भाई दलविंद्र दिल्ली पहुंचे। दो दिन के प्रयास के बाद वे ना तो वहां के राष्ट्रपति से मिले और ना ही सुषमा स्वराज से। अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्वयं मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
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इंडोनेशिया में 29 अगस्त 2004 को सुकर्णो हत्ता हवाई अड्डे पर इंडोनेशिया, नाईजीरिया, जिम्बाब्वे और पाकिस्तान के 13 लोगों के अलावा क्षेत्र के गांव शीतलपुर निवासी गुरदीप को भी मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में पकड़ा था। तब से वह जेल में है।
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फरवरी 2005 में सभी आरोपियों को सजा-ए-मौत सुनाई । 28 जुलाई 2016 की रात में आरोपियों में से चार को गोली मारकर मौत की नींद सुलाया। अब अगला नंबर गुरदीप का था।
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हालांकि भारत सरकार में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के चलते उसकी और बाकी आरोपियों की सजा को स्थगित कर दिया। इसके बाद गुरदीप के पिता ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से उसके कानूनी प्रतिनिधि अफजाल मोहम्मद के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अर्जी दाखिल की।
भारतीय दूतावास ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय को एक नोट वर्बेल भेजा। इसमें मौत की सजा से पूर्व सभी कानूनी उपाय अपनाने का आग्रह किया। इसके बाद गुरदीप को कुछ दिनों की राहत मिल गई।
अब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के मादक तस्करों को माफ न करने संबंधी बयान ने गुरदीप के परिजनों की नींद उड़ा दी । गत दिवस इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सपत्नीक दो दिन की भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे।
उससे मिलने के लिए गुरदीप की पत्नी कुलविंद्र , पुत्र सुखचैन, पुत्री मनजौत और भाई दलविंद्र दिल्ली पहुंचे। दो दिन के प्रयास के बाद वे ना तो वहां के राष्ट्रपति से मिले और ना ही सुषमा स्वराज से। अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्वयं मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।