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Saharanpur News: एक्सप्रेसवे पर 40 हजार पेड़ों से विकसित होगा ग्रीन कॉरिडोर
Fri, 20 Jun 2025 12:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 20 Jun 2025 12:03 AM IST
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दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे के गणेशपुर टोल पर की गई जंगल की चित्रकारी। संवाद
छुटमलपुर। प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे देश में हरित विकास का एक नया मानक स्थापित करेगा। 210 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे को हरा भरा रखने के लिए इसके दोनों तरफ मानसून सीजन में 40 हजार पौधे लगाए जाएंगे।
मंत्रालय शुरू से ही इस एक्सप्रेसवे को पर्यावरणीय अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। 13 हजार करोड़ रुपये की लागत से चार खंड में बनाए जा रहे इस एक्सप्रेसवे का अंतिम खंड शिवालिक जंगल और राजाजी राष्ट्रीय पार्क से गुजर रहा है। इसमें वन्य जीवों के संरक्षण और सुरक्षित विचरण के लिए 1200 करोड़ रुपये की लागत से एशिया का सबसे लंबा वन्य जीव गलियारा बनाया गया है।
इसमें 12 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाई गई है। इसमें ऊपर वाहन फर्राटा भरेंगे और नीचे वन्य जीव निर्भय होकर विचरण करेंगे। अब एक्सप्रेसवे के बाकी हिस्से पर ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने से हवा की गुणवत्ता और बायो डायवर्सिटी में सुधार होगा, साथ ही जीव-जंतुओं को रहने के लिए आवास मिलेगा।
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टोल पर बना दिया जंगल, हाथी, हिरण और बाघ की कलाकृतियां
गणेशपुर में बनाए जा रहे टोल पर भी जंगल क्षेत्र की चित्रकारी कर दी गई है। टोल की दीवारों को जंगली जानवरों हाथी, बाघ, हिरण, सांभर, पेड़-पौधे और नदियों की कलाकृतियों से सजाया गया है। यात्रियों को टोल से गुजरते वक्त ही अहसास हो जाएगा कि अब उनका सफर रोमांचक होने जा रहा है। टोल प्लाजा का कार्य अंतिम चरण में है। इसे 10 लेन का बनाया जा रहा है।
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निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ छायादार पौधों के रोपण का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस मानसून सीजन में इसे पूरा कर लिया जाएगा।
- प्रदीप गोसाईं, प्रोजेक्ट डायरेक्टर खंड तीन एनएचएआई
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मंत्रालय शुरू से ही इस एक्सप्रेसवे को पर्यावरणीय अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। 13 हजार करोड़ रुपये की लागत से चार खंड में बनाए जा रहे इस एक्सप्रेसवे का अंतिम खंड शिवालिक जंगल और राजाजी राष्ट्रीय पार्क से गुजर रहा है। इसमें वन्य जीवों के संरक्षण और सुरक्षित विचरण के लिए 1200 करोड़ रुपये की लागत से एशिया का सबसे लंबा वन्य जीव गलियारा बनाया गया है।
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इसमें 12 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाई गई है। इसमें ऊपर वाहन फर्राटा भरेंगे और नीचे वन्य जीव निर्भय होकर विचरण करेंगे। अब एक्सप्रेसवे के बाकी हिस्से पर ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने से हवा की गुणवत्ता और बायो डायवर्सिटी में सुधार होगा, साथ ही जीव-जंतुओं को रहने के लिए आवास मिलेगा।
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टोल पर बना दिया जंगल, हाथी, हिरण और बाघ की कलाकृतियां
गणेशपुर में बनाए जा रहे टोल पर भी जंगल क्षेत्र की चित्रकारी कर दी गई है। टोल की दीवारों को जंगली जानवरों हाथी, बाघ, हिरण, सांभर, पेड़-पौधे और नदियों की कलाकृतियों से सजाया गया है। यात्रियों को टोल से गुजरते वक्त ही अहसास हो जाएगा कि अब उनका सफर रोमांचक होने जा रहा है। टोल प्लाजा का कार्य अंतिम चरण में है। इसे 10 लेन का बनाया जा रहा है।
निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ छायादार पौधों के रोपण का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस मानसून सीजन में इसे पूरा कर लिया जाएगा।
- प्रदीप गोसाईं, प्रोजेक्ट डायरेक्टर खंड तीन एनएचएआई