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भौगोलिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते गंगोह को तहसील का दर्जा जरुरी

Sat, 25 Jun 2022 11:18 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jun 2022 11:18 PM IST
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Gangoh is not only the capital of politics, but also in revenue
गंगोह का नवीन मंडी स्थल - फोटो : SAHARANPUR
राजनीति की राजधानी ही नहीं, राजस्व में भी अव्वल है गंगोह
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गंगोह (सहारनपुर)। गंगोह की वृहद भौगोलिक स्थिति के साथ ही यहां की राजनीतिक और धार्मिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इसे काफी पहले तहसील का दर्जा मिल जाना चाहिए था, लेकिन राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के चलते ऐसा नहीं हो सका।
नकुड़ तहसील से लंबी दूरी होने के चलते परेशानी झेल रहे क्षेत्रीय लोग पिछले डेढ़ दशक से इसे तहसील का दर्जा देने की मांग करते आ रहे हैं, जिसे किसी न किसी वजह के चलते ठंडे बस्ते में डाला जाता रहा है। अब शासन-प्रशासन द्वारा उक्त प्रक्रिया आरंभ किए जाने से लोगों में गंगोह को तहसील बनाए जाने की आस जगी है। यहां की प्राचीन धार्मिक पृष्ठभूमि का जिक्र भी प्रशासन ने अपनी आख्या में किया है। जिले की राजनीतिक राजधानी गंगोह की अनाज मंडी राजस्व में जिले में पहले स्थान पर है।
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जिले की राजनीतिक राजधानी है गंगोह
गंगोह को जनपद की राजनीतिक राजधानी भी कहा जाता है। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में उल्लेखनीय स्थान रखने वाले काजी एवं चौधरी परिवारों की जन्मभूमि एवं कर्म स्थली रहा है। यहां से चौधरी यशपाल सिंह कैबिनेट मंत्री रहे। उनके पुत्र चौधरी रूद्रसेन समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष रहने के बाद अब प्रदेश सचिव का दायित्व संभाले हैं। काजी परिवार के रशीद मसूद केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री रहे। उन्होंने उपराष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा था। उनके भतीजे पूर्व विधायक इमरान मसूद भी कांग्रेस में सचिव और दिल्ली प्रभारी रह चुके हैं। राजनीतिक इतिहास इससे भी काफी पुराना है।
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गेहूं और धान खरीद में जनपद में नंबर वन है गंगोह मंडी
गंगोह। गेंहू और धान खरीद में गंगोह मंडी जनपद सहारनपुर की नंबर वन मंडी है। यहां हरियाणा, दिल्ली, पंजाब सहित देश के अनेक राज्यों से व्यापारी और मिल मालिक गेहूं एवं धान खरीद करने आते हैं। इस वर्ष आवक बढ़ने के चलते करीब 20 नये लाइसेंस भी जारी किए गए। व्यापारी मनोज गोयल ने बताया कि वर्ष 2012 और 14 में जब व्यापारियों के माध्यम से गेहूं खरीद की गई थी, उस वक्त गंगोह मंडी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान पर पहुंच गई थी। सरकार को यहां से रिकार्ड राजस्व की प्राप्ति हुई थी।
गंगोह विधानसभा की भौगोलिक स्थिति
परिसीमन से पहले तक नकुड़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा नकुड़, नकुड़ ब्लॉक, कस्बा गंगोह व गंगोह ब्लॉक तथा तीतरों नगर पंचायत आती थी। भौगोलिक स्थिति के लिहाज से गंगोह विधानसभा क्षेत्र कानूनगो सर्किल अंबेहटा और कानूनगो सर्किल नानौता को जोड़कर बनाया गया है। इसमें नगर पंचायत अंबेहटा, नगर पालिका गंगोह, नगर पंचायत तीतरों एवं नानौता कस्बा शामिल किए गए हैं। गंगोह विधानसभा में वर्तमान में करीब 3.75 लाख से अधिक मतदाता हैं और यहां की जनसंख्या लगभग 5.90 लाख है।
तहसील बनवाने के लिए हैं दृढ़ संकल्प
भाजपा विधायक कीरत सिंह का कहना है कि वह अपनी विधानसभा के नागरिकों की समस्याओं के समाधान का संकल्प लेकर चुनाव लड़े थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए लोकहित में गंगोह में तहसील की मांग पूरी की जानी अति आवश्यक है और वह इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

तहसील तो बने लेकिन सहारनपुर का हिस्सा रहे
पूर्व विधायक महिपाल सिंह माजरा ने बताया कि नागरिकों की मांग को देखते हुए 2007 में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती से गंगोह को तहसील बनाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने इसकी रूपरेखा बनानी आरंभ की, तभी चर्चा चलने लगी कि गंगोह को तहसील बनाया गया तो यह तहसील नवगठित जिला शामली में समाहित कर दी जाएगी। गंगोह को शामली में शामिल किए जाने की आशंका के चलते उस वक्त मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। उनका कहना है कि जनहित में गंगोह को तहसील बनाया जाना चाहिए, लेकिन यह सहारनपुर से ही संबद्ध रहे।

विधायक कीरत सिंह

विधायक कीरत सिंह- फोटो : SAHARANPUR

पूर्व विधायक महिपाल माजरा

पूर्व विधायक महिपाल माजरा- फोटो : SAHARANPUR

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