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Saharanpur News: रेलवे स्टेशन पर लगी चार बोतल क्रशर मशीनें हुईं शुरू
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-मशीन में खाली बोतल के डालते ही हो जाएगी नष्ट
-प्लेटफार्म तीन, चार और पांच पर लगी हैं ये मशीनें
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। ए श्रेणी के रेलवे स्टेशन पर चार बोतल क्रशर मशीनें लगाई गई हैं। ये मशीनें चालू हो गईं। अब यात्री खाली बोतलों को इधर-उधर न फेंककर मशीनों में ही डालें, ताकि स्टेशन स्वच्छ रहें। ऐसा होने से खाली बोतलें यहां-वहां पड़ी नजर नहीं आएंगी।
सहारनपुर का रेलवे स्टेशन ए श्रेणी का है। यहां से अप और डाउन में करीब 150 ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें डेढ़ लाख यात्री सफर करते हैं। स्टेशन के प्लेटफार्म, पटरियों व ट्र्रेनों में पानी की खाली बोतलों में पानी भरकर कई लोग फिर से बेच देते हैं। बोतल का पानी साफ दिखाई तो देता है, लेकिन उसमें संक्रमण का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए रेलवे स्टेशन, ट्रेनों में खाली होने वाली पानी की बोतलों को नष्ट करने के लिए चार मशीनें लगाई गई हैं। ये मशीनें प्लेटफार्म नंबर तीन, चार और पांच पर लगी हैं, जो चालू स्थिति में हैं। मशीन में खाली बोतल को डाला जाएगा। एक मिनट में प्लास्टिक की बोतल छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाएगी।
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-- इधर-उधर नजर नहीं आएंगी पानी की बोतल
हर प्लेटफार्म पर कूड़ेदान का इंतजाम है। वहां चाय, कॉफी के डिस्पोजल सहित अन्य रैपर व कचरा को एकत्र किया जाता है। कूड़ेदान में पानी की बोतल अधिक जगह घेर लेती हैं। मशीन की उपयोगिता बढ़ने से कूड़ेदान में छोटे-छोटे कचरा व डिस्पोजल एकत्र किया जाएगा। स्टेशन पर पानी की बोतल इधर-उधर नजर नहीं आएंगी।
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-- वर्जन
रेलवे स्टेशन पर चार बोतल क्रशर मशीनें चालू हो गई हैं। यात्रियों को प्रयोग में लाई जा चुकी बोतल क्रशर मशीन में डालने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मशीन से बोतल नष्ट होने के बाद उसका दोबारा उपयोग नहीं हो सकेगा। इससे स्टेशन परिसर गंदगी मुक्त होगा।
- प्रदीप गिल्होत्रा, सीएमआई, रेलवे
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-प्लेटफार्म तीन, चार और पांच पर लगी हैं ये मशीनें
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। ए श्रेणी के रेलवे स्टेशन पर चार बोतल क्रशर मशीनें लगाई गई हैं। ये मशीनें चालू हो गईं। अब यात्री खाली बोतलों को इधर-उधर न फेंककर मशीनों में ही डालें, ताकि स्टेशन स्वच्छ रहें। ऐसा होने से खाली बोतलें यहां-वहां पड़ी नजर नहीं आएंगी।
सहारनपुर का रेलवे स्टेशन ए श्रेणी का है। यहां से अप और डाउन में करीब 150 ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें डेढ़ लाख यात्री सफर करते हैं। स्टेशन के प्लेटफार्म, पटरियों व ट्र्रेनों में पानी की खाली बोतलों में पानी भरकर कई लोग फिर से बेच देते हैं। बोतल का पानी साफ दिखाई तो देता है, लेकिन उसमें संक्रमण का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए रेलवे स्टेशन, ट्रेनों में खाली होने वाली पानी की बोतलों को नष्ट करने के लिए चार मशीनें लगाई गई हैं। ये मशीनें प्लेटफार्म नंबर तीन, चार और पांच पर लगी हैं, जो चालू स्थिति में हैं। मशीन में खाली बोतल को डाला जाएगा। एक मिनट में प्लास्टिक की बोतल छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाएगी।
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हर प्लेटफार्म पर कूड़ेदान का इंतजाम है। वहां चाय, कॉफी के डिस्पोजल सहित अन्य रैपर व कचरा को एकत्र किया जाता है। कूड़ेदान में पानी की बोतल अधिक जगह घेर लेती हैं। मशीन की उपयोगिता बढ़ने से कूड़ेदान में छोटे-छोटे कचरा व डिस्पोजल एकत्र किया जाएगा। स्टेशन पर पानी की बोतल इधर-उधर नजर नहीं आएंगी।
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रेलवे स्टेशन पर चार बोतल क्रशर मशीनें चालू हो गई हैं। यात्रियों को प्रयोग में लाई जा चुकी बोतल क्रशर मशीन में डालने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मशीन से बोतल नष्ट होने के बाद उसका दोबारा उपयोग नहीं हो सकेगा। इससे स्टेशन परिसर गंदगी मुक्त होगा।
- प्रदीप गिल्होत्रा, सीएमआई, रेलवे