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आने वाले हैं विदेशी परिंदे, गुलजार होगा हथनीकुंड बैराज
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हथनीकुंड बैराज की इसी झील में अठखेलियां करते है विदेशी मेहमान
- फोटो : SAHARANPUR
बेहट (सहारनपुर)। यूपी-हरियाणा-हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित हथनीकुंड बैराज पर अक्तूबर माह के आखिरी सप्ताह में विदेशी पक्षी आने शुरू हो जाएंगे। इन मेहमान परिंदों को यहां की प्राकृतिक आबोहवा भाती है तो, ठंड से बचाव के लिए भी यहां का मौसम उनके लिए अनुकूल रहता है।
नवंबर माह तक बैराज और यमुना नदी तट पर विभिन्न प्रजातियों के विदेशी पक्षियों की चहचहाहट और अठखेलियों से खिल उठता है। बड़ी संख्या में पर्यटक इन पक्षियों को देखने के लिए आते हैं। बैराज झील में अठखेलियां करते नजर आने वाले इन मेहमान पक्षियों की सुरक्षा में वन विभाग भी सतर्क हो जाता है। इन पक्षियों के शिकार का खतरा रहता है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है वैसे-वैसे ही इन पक्षियों की संख्या भी बढ़ती जाती है। ठंड कम होने पर यह मेहमान परिंदे अपने वतन लौट जाते हैं।
फरवरी में लौटने लगते हैं अपने देश
हजारों मील दूर का सफर तय कर अपनी यात्रा करने वाले प्रवासी पक्षी प्रकृति के प्रतिनिधि एवं पर्यावरण के प्रहरी माने जाते हैं। बैराज और यमुना तट पर आने वाले इन विदेशी पक्षियों की संख्या हजारों में होती है। ऑस्ट्रेलिया, साइबेरिया आदि अधिक ठंडे देशों से आने वाले इन परिंदों की वापसी फरवरी माह के अंत में होनी शुरू हो जाती है।
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इन पक्षियों से गुलजार होता है यमुना तट
कॉमन कारमोरेंट, रूडी शेल डक, कॉमन पोचार्ड, कॉमन कूट, ग्रे लेग लिटिल इगरेड, किंगफिशर, वाइट ब्रिस्टेड, वाटर हेन, कॉमन मोरेहन, ग्रे हेरोन, पर्पल हेरोन, वूली नेक्ड स्टॉक, स्पॉट बिल्ड डक, साइबेरियन सारस आदि प्रवासी पक्षी सैलानियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
हथनीकुंड बैराज पर पक्षियों के आने का समय अक्टूबर से फरवरी तक होता है। इनके शिकार का खतरा रहता है, इसलिए इनकी सुरक्षा के लिए सतर्कता बरती जाती है।
-- आरपी ध्यानी, वन क्षेत्राधिकारी, बादशाहीबाग रेंज, शिवालिक वन प्रभाग
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नवंबर माह तक बैराज और यमुना नदी तट पर विभिन्न प्रजातियों के विदेशी पक्षियों की चहचहाहट और अठखेलियों से खिल उठता है। बड़ी संख्या में पर्यटक इन पक्षियों को देखने के लिए आते हैं। बैराज झील में अठखेलियां करते नजर आने वाले इन मेहमान पक्षियों की सुरक्षा में वन विभाग भी सतर्क हो जाता है। इन पक्षियों के शिकार का खतरा रहता है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है वैसे-वैसे ही इन पक्षियों की संख्या भी बढ़ती जाती है। ठंड कम होने पर यह मेहमान परिंदे अपने वतन लौट जाते हैं।
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फरवरी में लौटने लगते हैं अपने देश
हजारों मील दूर का सफर तय कर अपनी यात्रा करने वाले प्रवासी पक्षी प्रकृति के प्रतिनिधि एवं पर्यावरण के प्रहरी माने जाते हैं। बैराज और यमुना तट पर आने वाले इन विदेशी पक्षियों की संख्या हजारों में होती है। ऑस्ट्रेलिया, साइबेरिया आदि अधिक ठंडे देशों से आने वाले इन परिंदों की वापसी फरवरी माह के अंत में होनी शुरू हो जाती है।
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इन पक्षियों से गुलजार होता है यमुना तट
कॉमन कारमोरेंट, रूडी शेल डक, कॉमन पोचार्ड, कॉमन कूट, ग्रे लेग लिटिल इगरेड, किंगफिशर, वाइट ब्रिस्टेड, वाटर हेन, कॉमन मोरेहन, ग्रे हेरोन, पर्पल हेरोन, वूली नेक्ड स्टॉक, स्पॉट बिल्ड डक, साइबेरियन सारस आदि प्रवासी पक्षी सैलानियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
हथनीकुंड बैराज पर पक्षियों के आने का समय अक्टूबर से फरवरी तक होता है। इनके शिकार का खतरा रहता है, इसलिए इनकी सुरक्षा के लिए सतर्कता बरती जाती है।
-- आरपी ध्यानी, वन क्षेत्राधिकारी, बादशाहीबाग रेंज, शिवालिक वन प्रभाग

हथनीकुंड बैराज की इसी झील में अठखेलियां करते है विदेशी मेहमान- फोटो : SAHARANPUR