{"_id":"5e3473a68ebc3e7081424e85","slug":"fasting-on-saptami-gives-freedom-from-sins-saharanpur-news-mrt4664735172","type":"story","status":"publish","title_hn":"सप्तमी का व्रत रखने से मिलती है पापों से मुक्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सप्तमी का व्रत रखने से मिलती है पापों से मुक्ति
विज्ञापन
सहारनपुर। माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि (एक फरवरी) को ऐसा व्रत है, जिसके करने से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन भगवान सूर्य की उपासना करने से सभी प्रकार के मनोरथ की सिद्धि होती है।
श्रीराम पंचायत सिद्धपीठ मानस निकेतन सहारनपुर के महंत राघवेन्द्र स्वामी ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार पृथ्वीलोक के प्राणियों की जीवन शक्ति को जागृत रखने वाले साक्षात भगवान सूर्यनारायण ने मन्वंतर के आदि में इसी दिन अपना प्रकाश प्रकाशित किया था। इसलिए इस दिन भगवान सूर्य की उपासना करने से सभी प्रकार के मनोरथों की सिद्धि होती है। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन पूर्ण नियम एवं संयम धारण कर बिना तेल व नमक का भोजन अर्थात सिर्फ मीठे पदार्थों का सेवन एक समय करने से व्यक्ति की काया निरोगी रहती है और उत्तम संतति की प्राप्ति होती है। महंत राघवेन्द्र स्वामी ने बताया कि इस दिन व्रत करने वालों को प्रात: काल सूर्योदय के बाद स्नान करना चाहिए तदुपरांत दीपक को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। अन्य विधि के अनुसार दीपक के बदले आक के सात पत्ते सिर पर रखकर ईख से जल को हिलाए और नमस्ते रुद्ररूपाय रसानां पतये नम:। वरुणाय नमस्तेस्तु पढ़कर पत्तों को नदी में प्रवाहित कर दें। इसके बाद घड़े में जल, गंध, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, सात अर्क पत्र और सात बद्री पत्र रखकर सूर्य को और जननी सर्वलोकानां सप्तमी सप्तसप्तिके। सप्तव्याहृतिके देवि नमस्ते सूर्य मंडले से सप्तमी को अर्घ्य देने से सभी पाप दूर हो जाते हैं।
विज्ञापन
श्रीराम पंचायत सिद्धपीठ मानस निकेतन सहारनपुर के महंत राघवेन्द्र स्वामी ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार पृथ्वीलोक के प्राणियों की जीवन शक्ति को जागृत रखने वाले साक्षात भगवान सूर्यनारायण ने मन्वंतर के आदि में इसी दिन अपना प्रकाश प्रकाशित किया था। इसलिए इस दिन भगवान सूर्य की उपासना करने से सभी प्रकार के मनोरथों की सिद्धि होती है। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन पूर्ण नियम एवं संयम धारण कर बिना तेल व नमक का भोजन अर्थात सिर्फ मीठे पदार्थों का सेवन एक समय करने से व्यक्ति की काया निरोगी रहती है और उत्तम संतति की प्राप्ति होती है। महंत राघवेन्द्र स्वामी ने बताया कि इस दिन व्रत करने वालों को प्रात: काल सूर्योदय के बाद स्नान करना चाहिए तदुपरांत दीपक को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। अन्य विधि के अनुसार दीपक के बदले आक के सात पत्ते सिर पर रखकर ईख से जल को हिलाए और नमस्ते रुद्ररूपाय रसानां पतये नम:। वरुणाय नमस्तेस्तु पढ़कर पत्तों को नदी में प्रवाहित कर दें। इसके बाद घड़े में जल, गंध, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, सात अर्क पत्र और सात बद्री पत्र रखकर सूर्य को और जननी सर्वलोकानां सप्तमी सप्तसप्तिके। सप्तव्याहृतिके देवि नमस्ते सूर्य मंडले से सप्तमी को अर्घ्य देने से सभी पाप दूर हो जाते हैं।
विज्ञापन