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Saharanpur News: वर्ष भर होगी किसानों की आय, केवीके ने तैयार किया मॉडल
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सहारनपुर। परंपरागत खेती में घटती आय को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस मॉडल) तैयार की है। इसमें परंपरागत फसलों के स्थान पर पशुपालन, मशरूम, मत्स्य, सब्जियाें आदि को अपनाने फोकस किया गया, जिससे किसानों को वर्ष भर आय प्राप्त हो सके।
दरअसल, कम होती जोत के कारण किसानों का खेती से गुजारा होना मुश्किल होता जा रहा है। इससे चिंतित केवीके के वैज्ञानिकों ने एक खेती का मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल में बागवानी, पशुपालन, पुष्प, मशरूम, मत्स्य, नर्सरी आदि को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि इसमें ऐसी फसलें रखी गई हैं, जो एक-दूसरे का सहयोग करें और मृदा की उर्वरता को भी बनाए रखें। इसके अलावा किसान के परिवार को भी रोजगार मिल सके।
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केवीके का आईएफएस मॉडल
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि एक एकड़ भूमि के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस मॉडल) तैयार किया है। इसमें किसान 600 वर्ग मीटर में दो मीटर गहरा तालाब बनाएं। उसके बाद पानी में सीमेंट के पिलर बनाकर दो मंजिल के एक शेड का निर्माण करें। इसमें सबसे ऊपर बकरी पालन, उसके नीचे मुर्गीपालन और तालाब में मत्स्य पालन कर अच्छी आय प्राप्त कर सकता है। बकरी का जो चारा नीचे गिरेगा, उसे मुर्गी खाएगी। इससे मुर्गियों को कम भोजन देना पड़ेगा। बकरियों और मुर्गियों का वेस्ट मछलियों का भोजन बनेगा। इससे मछलियों को कम भोजन देने की आवश्यकता होगी।
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पोषक तत्वों से भरपूर तालाब का पानी फसलों की सिंचाई के काम आएगा। इससे उर्वरकों पर होने वाले खर्च में कमी आएगी। इस मॉडल में 100 मीटर में मशरूम उत्पादन, 200 मीटर पशुपालन और वर्मी कंपोस्ट के लिए रखी गई है। 300 मीटर में सब्जी उत्पादन और दो हजार वर्गमीटर भूमि बागवानी, फल, पुष्प, औषधि, सहफसली, मधुमक्खी के लिए रखी गई है, साथ ही 800 वर्ग मीटर भूमि सुपर नैपियर, चारा फसलों के लिए रखी गई है।
वर्जन
यह एक ऐसा मॉडल है, जिससे किसानों को काफी लाभ मिलेगा। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित करने के साथ ही प्रोत्साहित भी किया जाएगा।
- डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी केवीके