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Saharanpur News: हाड़ कंपा देने वाली ठंड में रात दिन धरना दे रहे किसान
Sat, 13 Jan 2024 01:52 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 13 Jan 2024 01:52 AM IST
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तीतरों के बाल्लू में मुआवजे की मांग को लेकर तीसरे दिन भी हंगामा करते किसान। संवाद
तीतरों। हाईवे अथाॅरिटी द्वारा पट्टे की भूमि का अधिग्रहण करने को लेकर चार गांवों कलसी, रामरायखेड़ी, फतेहपुरचंदपुर और बाल्लू के किसान हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी टेंट लगा कर दिन-रात धरना दे रहे हैं। इन किसान परिवारों की महिलाएं भी अपने बच्चों सहित मौके पर डटी हैं। इनका कहना है कि मुआवजा मिले बिना वह यहां से हटने वाले नहीं हैं।
बता दें, कि निर्माणाधीन शामली-अंबाला हाईवे के लिए अधिग्रहीत की गई पट्टे की जमीन का मुआवजा किसानों को नहीं मिला है। प्रशासन जमीन देने की पेशकश कर रहा है, लेकिन किसान जमीनों के विवादित होने की बात कह कर मुआवजे के भुगतान की मांग कर रहे हैं। तीसरे दिन भी फूलकली, राजेश देवी, लाल बहादूर, रकमसिंह, मदन सिंह, मेमपाल, सेठपाल, जसबीर सिंह, राजबीर सिंह, कंवरपाल, महेंद्र प्रजापति, मेहरसिंह, रामसिंह कश्यप, राजू कश्यप, जगबीर सिंह, राकेश कश्पय, चौधरी राजकुमार, नरेश सैनी आदि धरने पर बैठे। उन्होंने बताया कि हाईवे अथाॅरिटी के कर्मचारियों ने अधिग्रहण किए जाने वाली भूमि की जो सूची बनाई है, उसमें से कई किसानों के नाम गायब है, जबकि उनकी भूमि हाईवे में जा चुकी है। कई किसानों की भूमि ज्यादा अधिग्रहीत की गई और उन्हें मुआवजा कम दिया गया है।
राजस्व निरीक्षक बाबूराम व चकबंदी लेखपाल मनोज कुमार ने बताया कि राजस्व ग्राम बाल्लू से करीब 3.76.46 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना शेष है। इससे करीब 156 किसान प्रभावित हैं।
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जमीन चली गई मुआवजा भी नहीं मिला, 18 को है बेटी की शादी
बाल्लू निवासी ऋषिपाल कश्यप का कहना है कि उनके पिता को सरकार से आवंटित पट्टे की भूमि मिली थी, जिसका बंटवारा होने के बाद वह अपने परिवार के साथ खेती करके भरण पोषण कर रहे थे परंतु हाईवे अथाॅरिटी के द्वारा तैयार की गई थ्री डी सूची में उनका नाम शामिल नहीं है, जबकि उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। 18 जनवरी को उनकी बेटी की शादी है। ऐसे में उनके सामने रोजी रोटी के साथ बेटी के विवाह का भी संकट खड़ा हो गया है।
जमीन चली गई तो कैसे भरेंगे पेट
महिला चंदो देवी पत्नी मांगेराम का कहना है कि वह अपने पति के साथ पट्टे की भूमि से अनाज पैदा करके अपना गुजारा कर रही है, लेकिन प्रशासन की गलत नीति के चलते उन्हें भूमि जाने का भय सता रहा है।
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बता दें, कि निर्माणाधीन शामली-अंबाला हाईवे के लिए अधिग्रहीत की गई पट्टे की जमीन का मुआवजा किसानों को नहीं मिला है। प्रशासन जमीन देने की पेशकश कर रहा है, लेकिन किसान जमीनों के विवादित होने की बात कह कर मुआवजे के भुगतान की मांग कर रहे हैं। तीसरे दिन भी फूलकली, राजेश देवी, लाल बहादूर, रकमसिंह, मदन सिंह, मेमपाल, सेठपाल, जसबीर सिंह, राजबीर सिंह, कंवरपाल, महेंद्र प्रजापति, मेहरसिंह, रामसिंह कश्यप, राजू कश्यप, जगबीर सिंह, राकेश कश्पय, चौधरी राजकुमार, नरेश सैनी आदि धरने पर बैठे। उन्होंने बताया कि हाईवे अथाॅरिटी के कर्मचारियों ने अधिग्रहण किए जाने वाली भूमि की जो सूची बनाई है, उसमें से कई किसानों के नाम गायब है, जबकि उनकी भूमि हाईवे में जा चुकी है। कई किसानों की भूमि ज्यादा अधिग्रहीत की गई और उन्हें मुआवजा कम दिया गया है।
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राजस्व निरीक्षक बाबूराम व चकबंदी लेखपाल मनोज कुमार ने बताया कि राजस्व ग्राम बाल्लू से करीब 3.76.46 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना शेष है। इससे करीब 156 किसान प्रभावित हैं।
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जमीन चली गई मुआवजा भी नहीं मिला, 18 को है बेटी की शादी
बाल्लू निवासी ऋषिपाल कश्यप का कहना है कि उनके पिता को सरकार से आवंटित पट्टे की भूमि मिली थी, जिसका बंटवारा होने के बाद वह अपने परिवार के साथ खेती करके भरण पोषण कर रहे थे परंतु हाईवे अथाॅरिटी के द्वारा तैयार की गई थ्री डी सूची में उनका नाम शामिल नहीं है, जबकि उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। 18 जनवरी को उनकी बेटी की शादी है। ऐसे में उनके सामने रोजी रोटी के साथ बेटी के विवाह का भी संकट खड़ा हो गया है।
जमीन चली गई तो कैसे भरेंगे पेट
महिला चंदो देवी पत्नी मांगेराम का कहना है कि वह अपने पति के साथ पट्टे की भूमि से अनाज पैदा करके अपना गुजारा कर रही है, लेकिन प्रशासन की गलत नीति के चलते उन्हें भूमि जाने का भय सता रहा है।