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किसानों को रास आ रही गन्ने के साथ सहफसली

Sun, 09 Feb 2020 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Feb 2020 12:18 AM IST
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Farmers feel comfortable with sugarcane
दौलतपुर में टमाटी की खेती दिखाता किसान - फोटो : SAHARANPUR
किसानों को रास आ रही गन्ने के साथ सहफसली
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सहारनपुर। परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे को देखते हुए जनपद के प्रगतिशील किसान गन्ने के साथ सहफसली खेती को तेजी से अपना रहे हैं। शरदकालीन गन्ना बुआई के साथ सरसों, मसूर, चना, आलू से लेकर मूली, शलगम आदि की सफलतापूर्वक सहफसली की जा रही हैं। कई प्रगतिशील किसान सहफसली के तौर पर टमाटर की खेती करके बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं।

गन्ने के साथ सहफसली खेती किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। इससे जहां फसल की लागत कम हो रही है वहीं मुनाफा में भी इजाफा हो रहा है। गांव दौलतपुर के प्रगतिशील किसान ओपिन कुमार ने बताया कि उन्होंने शरदकालीन गन्ने की बुआई सितंबर माह में ट्रेंच विधि से की थी। इसमें दो कूड़ों के बीच की दूरी साढे़ चार फीट रखी गई है। बीच की खाली जमीन पर सितंबर महीने में ही टमाटर रोप दिया गया था। सात बीघा में बोई गई इस फसल से करीब एक हजार कैरेट टमाटर का उत्पादन हो चुका है। जो लगभग 20 हजार किलो बैठता है। मंडी में एक कैरेट टमाटर 225 से 250 रुपये की बिक रहा है। यदि बाजार अनुकूल रहा तो मात्र टमाटर की फसल ही करीब ढाई लाख रुपये तक हो सकती है। इसके साथ ही गन्ने की फसल भी खड़ी है। गांव चंदेना कोली के किसान हरेंद्र ने बताया कि उन्होंने शरदकालीन गन्ने के साथ चना बोया था। जिसे साग के रूप में 45 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से मंडी में बेचा। जिससे उन्हें आठ हजार रुपये प्रति बीघा आय प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने नवंबर के आखिरी सप्ताह में उसी खेत में मूली की बुआई करा दी, जिससे भी बढ़िया आय प्राप्त होने की संभावना है। गांव कुरलकी के विकास ने बताया कि उन्हें बसंतकालीन गन्ने की बुआई करनी है। इसके लिए उन्होंने ट्रेंच विधि से कूड निकाल दिए और बीच में चना और मेथी की बुआई की। खाली कूड में बसंतकालीन गन्ने की बुआई की जाएगी। जिला गन्ना विकास अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि जनपद में गन्ने के साथ सहफसली खेती के प्रति किसानों का रूझान बढ रहा है। साथ ही गन्ने का भी बढिया उत्पादन होता है। इससे न सिर्फ फसल की लागत में कमी आती है बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है। शरदकालीन गन्ने के साथ किसान सरसों, गेहूूं, आलू, मसूर, मूली, शलजम आदि की खेती को सफलतापूर्वक कर रहे हैं।
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