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सहारनपुर: आलू के दाम गिरने से किसान निराश
Sat, 18 Feb 2023 11:27 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 18 Feb 2023 11:27 PM IST
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गंगोह क्षेत्र में आलू की खुदाई और भराई कराता किसान
सहारनपुर। अत्याधिक उत्पादन के चलते बाजार में लगातार आलू की कीमतों में भारी गिरावट है। इससे आलू उत्पादक किसानों की मायूसी भी बढ़ रही है। हालांकि आलू उत्पादकों को 22 फरवरी से खुलने जा रहे कोल्ड स्टोरेज के बाद भाव बढ़ने की आशा है।
जनपद में बेहट और गंगोह क्षेत्र में आलू की सबसे अधिक खेती होती है। इस समय किसान प्याज, शिमला मिर्च, टमाटर, लौकी, कद्दू आदि सब्जियों की बुवाई करने को आलू की खोदाई करा रहे हैं। आलू के भाव जनवरी में 400 रुपये प्रति बोरा (50 किग्रा) थे। जो अब 200 से 250 रुपये रह गए हैं। किसानों का बेहतर उत्पादन के बावजूद उन्हें लागत मूल्य तक नहीं मिल रहा है। गंगोह आलू व्यापारी प्रदीप विक्की, संदीप गोयल और आढ़ती ब्रिजेश सैनी, देवमित्र गर्ग, राजीव गर्ग व रजत सैनी का कहना है कि इस बार आलू की अच्छी फसल के चलते भाव नहीं बढ़ा है। हालांकि कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडारण होने के बाद दाम बढ़ने की उम्मीद है।
लागत निकालना मुश्किल हुआ
-गंगोह के मोहल्ला गुलाम औलिया निवासी आलू उत्पादक किसान राशिद ने बताया कि उन्होंने करीब 25 बीघा में आलू लगाए थे। प्रति बीघा पांच बोरा बीज की बुवाई की गई थी, जो लगभग एक हजार रुपये बोरा था। इसमें एक हजार रुपये प्रति बीघा बुवाई मजदूरी, दो हजार रुपये प्रति बीघा खाद व पेस्टिसाइड, तीन हजार रुपये आलू की खोदाई से लेकर बोरा भराई और मंडी तक लाने के खर्च को जोड़ कर प्रति बीघा 11 हजार रुपये लागत आई है। उनके खेत से 45 बोरे प्रति बीघा का औसत आया है। बाजार में आज थोक में कीमत 200 से 250 रुपये तक ही है। ऐसे में मुनाफा तो दूर, लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
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गांव महंगी निवासी आलू उत्पादक किसान रामधन सैनी का कहना है कि उसने करीब 22 बीघा आलू का बीज महंगे दाम पर खरीद कर फसल तैयार की थी। अब जब खोदाई की बारी आई तो दाम गिर गया है। बाहरी किसान व व्यापारी गांव दर गांव 150 से 200 रूपये प्रति 50 किलोग्राम की बिक्री कर रहे हैं ऐसे में उनकी लागत भी पूरी होती नहीं दिख रही है।
तीन हजार रुपये प्रति बीघा का नुकसान
बेहट के गांव मुर्तज़ापुर निवासी किसान अशोक सैनी का कहना है कि उन्होंने 65 बीघा में आलू लगाए थे। एक बीघा में करीब 60 बोरी आलू हुए हैं। लागत से खोदाई एवं मंडी तक भेजने में उनका खर्च 15 हजार रुपए प्रति बीघा आ रहा है। जबकि मंडी में यह सिर्फ 12 हजार रुपए में ही बिक रहा है। इससे उन्हें तीन हजार रुपए प्रति बीघा का नुकसान हो रहा है।
इस बार 50 हेक्टेयर रकबा बढ़ा
सहारनपुर। जनपद में इस बार करीब 50 हेक्टेयर आलू का रकबा बढ़ा है। गत वर्ष किसानों ने करीब 470 हेक्टेयर में आलू की फसल का उत्पादन किया था। गत वर्ष आलू के दाम अच्छे होने के कारण इस बार किसानों ने आलू की बुवाई ज्यादा की। इस साल रकबा बढ़ कर 520 हेक्टेयर है।
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जनपद में बेहट और गंगोह क्षेत्र में आलू की सबसे अधिक खेती होती है। इस समय किसान प्याज, शिमला मिर्च, टमाटर, लौकी, कद्दू आदि सब्जियों की बुवाई करने को आलू की खोदाई करा रहे हैं। आलू के भाव जनवरी में 400 रुपये प्रति बोरा (50 किग्रा) थे। जो अब 200 से 250 रुपये रह गए हैं। किसानों का बेहतर उत्पादन के बावजूद उन्हें लागत मूल्य तक नहीं मिल रहा है। गंगोह आलू व्यापारी प्रदीप विक्की, संदीप गोयल और आढ़ती ब्रिजेश सैनी, देवमित्र गर्ग, राजीव गर्ग व रजत सैनी का कहना है कि इस बार आलू की अच्छी फसल के चलते भाव नहीं बढ़ा है। हालांकि कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडारण होने के बाद दाम बढ़ने की उम्मीद है।
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लागत निकालना मुश्किल हुआ
-गंगोह के मोहल्ला गुलाम औलिया निवासी आलू उत्पादक किसान राशिद ने बताया कि उन्होंने करीब 25 बीघा में आलू लगाए थे। प्रति बीघा पांच बोरा बीज की बुवाई की गई थी, जो लगभग एक हजार रुपये बोरा था। इसमें एक हजार रुपये प्रति बीघा बुवाई मजदूरी, दो हजार रुपये प्रति बीघा खाद व पेस्टिसाइड, तीन हजार रुपये आलू की खोदाई से लेकर बोरा भराई और मंडी तक लाने के खर्च को जोड़ कर प्रति बीघा 11 हजार रुपये लागत आई है। उनके खेत से 45 बोरे प्रति बीघा का औसत आया है। बाजार में आज थोक में कीमत 200 से 250 रुपये तक ही है। ऐसे में मुनाफा तो दूर, लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
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गांव महंगी निवासी आलू उत्पादक किसान रामधन सैनी का कहना है कि उसने करीब 22 बीघा आलू का बीज महंगे दाम पर खरीद कर फसल तैयार की थी। अब जब खोदाई की बारी आई तो दाम गिर गया है। बाहरी किसान व व्यापारी गांव दर गांव 150 से 200 रूपये प्रति 50 किलोग्राम की बिक्री कर रहे हैं ऐसे में उनकी लागत भी पूरी होती नहीं दिख रही है।
तीन हजार रुपये प्रति बीघा का नुकसान
बेहट के गांव मुर्तज़ापुर निवासी किसान अशोक सैनी का कहना है कि उन्होंने 65 बीघा में आलू लगाए थे। एक बीघा में करीब 60 बोरी आलू हुए हैं। लागत से खोदाई एवं मंडी तक भेजने में उनका खर्च 15 हजार रुपए प्रति बीघा आ रहा है। जबकि मंडी में यह सिर्फ 12 हजार रुपए में ही बिक रहा है। इससे उन्हें तीन हजार रुपए प्रति बीघा का नुकसान हो रहा है।
इस बार 50 हेक्टेयर रकबा बढ़ा
सहारनपुर। जनपद में इस बार करीब 50 हेक्टेयर आलू का रकबा बढ़ा है। गत वर्ष किसानों ने करीब 470 हेक्टेयर में आलू की फसल का उत्पादन किया था। गत वर्ष आलू के दाम अच्छे होने के कारण इस बार किसानों ने आलू की बुवाई ज्यादा की। इस साल रकबा बढ़ कर 520 हेक्टेयर है।