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पितृ पक्ष की अमावस्या श्रद्घाभाव से दी पितरों को विदाई
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सहारनपुर। कोरोना काल में इस बार पितृ पक्ष की अमावस्या संक्रमण के खतरे को देखते हुए कुछ लोगों ने सूखा भोजन तो कुछ लोगों ने तैयार भोजन ब्राह्मणों घरों पर ही पहुंचाया। संक्रमण की वजह से ब्राह्मणों ने भी लोगों के घर जाने से परहेज किया।
बृहस्पतिवार को सुबह के समय लोगों ने पितृ पक्ष की अमावस्या पर श्रद्धाभाव से श्राद्ध कर पितरों को विदाई दी। ज्यादातर लोगों ने भोजन ब्राह्मणों के घर पहुंचाया। इस बार आटा, घी, चीनी, तेल, दालों के सूखे पदार्थों के पैकेट ज्यादा दान किए गए। कोरोना संक्रमण की वजह से बहुत कम संख्या में ब्राह्मण इस बार लोगों के घर गए। जो लोग कोरोना संक्रमण की चपेट हैं, उन्होंने सिर्फ गऊग्रास ही निकाला। इसके अलावा लोगों ने श्वान, कौए और चीटियों को भी भोजन अर्पित किया।
पुरुषोत्तम मास में प्रभु विष्णु की पूजा और गीता पाठ अति फलदायी
सहारनपुर। इस बार पितृ पक्ष की अमावस्या के तुरंत बाद नवरात्र नहीं शुरू हुए। अधिकमास होने की वजह पूरे एक माह बाद 17 अक्तूबर को पहला नवरात्र होगा। इस माह में भगवान विष्णु और गीता का पाठ करना अति फलदायी है।
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ब्रह्मपुरी कॉलोनी के आचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि हर तीन साल बाद मलमास यानी अधिक मास आता है। इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। आध्यात्मिक रूप से अधिक मास के विषय में भक्त प्रहलाद से संबंधित कथा का भी संबंध है। श्री बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज, तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय और पंडित जितेंद्र शांडिल्य ने बताया कि भगवान विष्णु और श्री कृष्ण ने इस मास को पुरुषोत्तम मास का दर्जा दिया। पुरुषोत्तम मास का संबंध भगवान विष्णु से है। इस माह भगवान श्री हरि विष्णु और गीता का पाठ करना मनुष्य के लिए अति फलदायी है। इस माह की पूजा भगवान श्री विष्णु, श्री कृष्ण और श्रीराम के प्रति प्रीति को बढ़ाने वाली है।
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बृहस्पतिवार को सुबह के समय लोगों ने पितृ पक्ष की अमावस्या पर श्रद्धाभाव से श्राद्ध कर पितरों को विदाई दी। ज्यादातर लोगों ने भोजन ब्राह्मणों के घर पहुंचाया। इस बार आटा, घी, चीनी, तेल, दालों के सूखे पदार्थों के पैकेट ज्यादा दान किए गए। कोरोना संक्रमण की वजह से बहुत कम संख्या में ब्राह्मण इस बार लोगों के घर गए। जो लोग कोरोना संक्रमण की चपेट हैं, उन्होंने सिर्फ गऊग्रास ही निकाला। इसके अलावा लोगों ने श्वान, कौए और चीटियों को भी भोजन अर्पित किया।
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पुरुषोत्तम मास में प्रभु विष्णु की पूजा और गीता पाठ अति फलदायी
सहारनपुर। इस बार पितृ पक्ष की अमावस्या के तुरंत बाद नवरात्र नहीं शुरू हुए। अधिकमास होने की वजह पूरे एक माह बाद 17 अक्तूबर को पहला नवरात्र होगा। इस माह में भगवान विष्णु और गीता का पाठ करना अति फलदायी है।
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ब्रह्मपुरी कॉलोनी के आचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि हर तीन साल बाद मलमास यानी अधिक मास आता है। इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। आध्यात्मिक रूप से अधिक मास के विषय में भक्त प्रहलाद से संबंधित कथा का भी संबंध है। श्री बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज, तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय और पंडित जितेंद्र शांडिल्य ने बताया कि भगवान विष्णु और श्री कृष्ण ने इस मास को पुरुषोत्तम मास का दर्जा दिया। पुरुषोत्तम मास का संबंध भगवान विष्णु से है। इस माह भगवान श्री हरि विष्णु और गीता का पाठ करना मनुष्य के लिए अति फलदायी है। इस माह की पूजा भगवान श्री विष्णु, श्री कृष्ण और श्रीराम के प्रति प्रीति को बढ़ाने वाली है।