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अत्यंत कुपोषित बच्चे 738 और गाय केवल छह
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सहारनपुर। अत्यंत कुपोषण का शिकार बच्चों के परिवार को गो-आश्रय स्थल से एक-एक गाय दी जानी है, लेकिन यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। जिले में अत्यंत कुपोषित बच्चे 738 और दुधारू गाय मात्र छह हैं, जो छह बच्चों के परिवारों को दी जा चुकी हैं। बाकी बच्चों के परिवार को एक वर्ष बाद भी गाय नहीं दी जा सकी है।
इन दिनों राष्ट्रीय सुपोषण माह चल रहा है। जिले में प्रत्येक ब्लॉक और नगर निगम को मिलाकर 11 गो-आश्रय स्थल हैं। शासन ने दो वर्ष पूर्व निर्देश दिए थे कि इन गो-आश्रय स्थल से एक-एक गाय अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवार को मिले। इसके साथ ही उनको चारे के पैसे भी दिए जाएं। एक वर्ष में मात्र छह ही परिवारों को गाय दी जा सकी है। गो-आश्रय स्थल में इन छह गाय के अलावा कोई दुधारू गाय नहीं है। ऐसे अत्यंत कुपोषित बच्चों को गाय का दूध पिलाकर कुपोषण से बाहर लाने की योजना दम तोड़ चुकी है। गो-आश्रय स्थलों के अलावा अन्य किसी साधन से भी शासन-प्रशासन की ओर अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवारों के लिए गाय की व्यवस्था नहीं की गई है, जिन छह परिवारों को अभी तक गाय दी गई है, उनको चारे की किस्त समय से मिल रही है, लेकिन बाकी परिवार गाय मिलने की आस में ही बैठे हैं।
गो-आश्रय स्थलों में हैं 3410 गोवंशीय पशु
पशु पालन विभाग के मुताबिक, 12 गो आश्रय स्थलों में 3410 गोवंशीय पशु हैं, लेकिन छह ही दुधारू गाय थीं, जिनको अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवारों दिया जा चुका है। 900 रुपये प्रतिमाह चारे की किस्त भी दी जा रही है।
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विभाग को दी जा चुकी है सूची
अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवारों की सूची पशु पालन विभाग को दी जा चुकी है। पशु पालन विभाग की ओर से इन परिवारों गाय दी जानी है।
-आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
विभाग के पास छह दुधारू गाय थीं, जिनको अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवारों को दिया जा चुका है। फिलहाल लंपी रोग भी फैल रहा है। इस रोग के खत्म होने के बाद दोबारा सर्वे कराया जाएगा। अगर कोई दुधारू गाय होगी तो कुपोषित बच्चे के परिवार को उपलब्ध करा दी जाएगी।
-राजीव सक्सेना, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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इन दिनों राष्ट्रीय सुपोषण माह चल रहा है। जिले में प्रत्येक ब्लॉक और नगर निगम को मिलाकर 11 गो-आश्रय स्थल हैं। शासन ने दो वर्ष पूर्व निर्देश दिए थे कि इन गो-आश्रय स्थल से एक-एक गाय अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवार को मिले। इसके साथ ही उनको चारे के पैसे भी दिए जाएं। एक वर्ष में मात्र छह ही परिवारों को गाय दी जा सकी है। गो-आश्रय स्थल में इन छह गाय के अलावा कोई दुधारू गाय नहीं है। ऐसे अत्यंत कुपोषित बच्चों को गाय का दूध पिलाकर कुपोषण से बाहर लाने की योजना दम तोड़ चुकी है। गो-आश्रय स्थलों के अलावा अन्य किसी साधन से भी शासन-प्रशासन की ओर अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवारों के लिए गाय की व्यवस्था नहीं की गई है, जिन छह परिवारों को अभी तक गाय दी गई है, उनको चारे की किस्त समय से मिल रही है, लेकिन बाकी परिवार गाय मिलने की आस में ही बैठे हैं।
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गो-आश्रय स्थलों में हैं 3410 गोवंशीय पशु
पशु पालन विभाग के मुताबिक, 12 गो आश्रय स्थलों में 3410 गोवंशीय पशु हैं, लेकिन छह ही दुधारू गाय थीं, जिनको अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवारों दिया जा चुका है। 900 रुपये प्रतिमाह चारे की किस्त भी दी जा रही है।
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विभाग को दी जा चुकी है सूची
अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवारों की सूची पशु पालन विभाग को दी जा चुकी है। पशु पालन विभाग की ओर से इन परिवारों गाय दी जानी है।
-आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
विभाग के पास छह दुधारू गाय थीं, जिनको अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवारों को दिया जा चुका है। फिलहाल लंपी रोग भी फैल रहा है। इस रोग के खत्म होने के बाद दोबारा सर्वे कराया जाएगा। अगर कोई दुधारू गाय होगी तो कुपोषित बच्चे के परिवार को उपलब्ध करा दी जाएगी।
-राजीव सक्सेना, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी