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उत्खनन में मिली वस्तुओं से रूबरू कराया

Wed, 19 Apr 2017 01:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर मनिहारान
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर मनिहारान Updated Wed, 19 Apr 2017 01:33 AM IST
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Exhibition of Extracted items
छाया चित्रों के माध्यम से जानकारी देते पुरातत्व विभाग के अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
पुरानी सभ्यता को जानने के लिए रामपुर मनिहारान तहसील के गांव सकतपुर में आगरा उप मंडल पुरातत्व विभाग की ओर से मंगलवार को विश्व धरोहर दिवस पर प्रदर्शनी लगाई गई।
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इसमें गांव में विभाग द्वारा किए गए उत्खनन के दौरान मिले चार हजार वर्ष पूर्व मृदभांड, धातु की प्लेटें, तांबे की कुल्हाड़ी व मिट्टी के बर्तनों के छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया। 
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बता दें कि आगरा उप मंडल पुरातत्व विभाग के अधीक्षक डा. भुवन विक्रम के नेतृत्व में 24 फरवरी से गांव सकतपुर में उत्खनन किया जा रहा है।

पुरातत्व विभाग द्वारा 18 अप्रैल को मनाए जाने वाला विश्व धरोहर दिवस इस बार गांव सकतपुर में मनाया गया। इस मौके पर आजादी के बाद से अब तक प्रदेश भर में पुरातत्व विभाग द्वारा अलग-अलग स्थानों पर किए गए उत्खनन के दौरान प्राचीन सभ्यता को प्रदर्शित करने वाली वस्तुओं के छाया चित्रों की अतीत के झरोकों नाम से प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान पहुंचे स्कूली छात्रों को उनके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
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डा. भुवन विक्रम ने बताया कि जनपद सहारनपुर के कस्बा नानौता के गांव हुलाश में वर्ष 1965-66 में उत्खनन किया गया। इसमें हड़प्पा संस्कृति, उत्तरी काली चमकीली पात्र परंपरा संस्कृति, शंगु कुषाण संस्कृति, गुप्त काल एवं आरंभिक मध्यकाल प्रकाश में आए।

इसके बाद वर्ष 1969 में बड़गांव में उत्खनन के दौरान मिट्टी के बर्तन, तलवार, मृदभांड आदि मिले और अब वर्ष 2017 में गांव सकतपुर में पत्थर का घोड़ा, मिट्टी के बर्तन, धातु की प्लेटें, सिल बट्टा व मृदभांड आदि मिले। ये सभी जांच में चार हजार वर्ष पूर्व की आंकी गई हैं।

पुरातत्व विद डा. अर्खित प्रधान ने प्रदर्शनी में पौराणिक वस्तुओं के छाया चित्रों के बारे में स्कूली छात्रों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को बताया कि पौराणिक काल में भी मानव के पास कला थी। वह बर्तन आदि की सजावट के लिए उन पर आकृति व अन्य सजावट के लिए निशान अंकित करते थे।

अब तक सहारनपुर के हुलाश, बड़गांव, सकतपुर, मुजफ्फरनगर के मांडी गांव, मुरादाबाद के मदारपुर, बागपत के सनौली, मेरठ के आलमगीरपुर व हस्तिनापुर, बुलंदशहर लाल किला, गौतमबुद्धनगर गुलिस्तापुर, मथुरा व मथुरा के सांख, आगरा के फतेहपुर सीकरी, वीर छबीला टीला, सढवारा खेड़ा, खुलआ, बटेश्वर, एटा के कटिंगरा, पीलीभीत अभयपुर, बरेली अहिच्छत्र, कांसगंज जखैड़ा, फरूखाबाद कंपिल, इटावा सैफई, कन्नौज में उत्खनन किया गया है।

इटावा के सैफई में वर्ष 1969 में पुरातत्व विभाग द्वारा किए गए उत्खनन में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव छात्र के रूप में पुरातत्व विभाग की मैट टीम में शामिल थे। उनकी देखरेख में उत्खनन किया गया था।


इसका प्रमाण पुरातत्व विभाग के लेखों में अंकित है। सैफई में उत्खनन के दौरान कुल्हाड़ियां, बर्छियां, भलाग्र, मानवाकृति, ताम्र निधियां, मृदभांड प्राप्त हुए थे। इस मौके पर पुरातत्व विभाग के सहायक पुरातत्वविद डा. अर्खित प्रधान, डा. महेंद्र पाल, वाईपी अग्रवाल, मोहन चित्रकार, अंकित नामदेव व शोध छात्र हिमांशु के अलाव गुरुकुल विद्या पीठ के छात्र मौजूद रहे।
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