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सिर्फ निर्धारित दिनों में ही लगते हैं रेबीज के इंजेक्शन

Sun, 27 Sep 2020 10:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2020 10:48 PM IST
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सिर्फ निर्धारित दिनों में ही लगते हैं रेबीज के इंजेक्शन
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सहारनपुर। एंटी रेबीज इंजेक्शन की कमी नहीं है, मगर इंजेक्शन लगवाने के लिए पीड़ितों को भागदौड़ करनी पड़ती है। खास बात यह है कि सीएचसी और पीएचसी पर नियम से नहीं, बल्कि व्यवस्था के अनुरूप इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।
बड़गांव पीएचसी पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाने की व्यवस्था नहीं है। ऐसी स्थिति में यहां पहुंचने वाले कुत्ता काटे के घायलों को नानौता सीएचसी पर भेजा जाता है। इसी प्रकार अंबेहटा पीएचसी पर भी व्यवस्था नहीं होने की वजह से क्षेत्र के कुत्ता काटे के घायलों को इंजेक्शन लगवाने के लिए नकुड़ सीएचसी पर जाना पड़ता है। एंटी रेबीज इंजेक्शन के दिन निर्धारित होते हैं कि कुत्ता काटने के कौन से दिन इंजेक्शन लगाया जाना है। मगर सीएचसी और पीएचसी पर प्रतिदिन इंजेक्शन लगाने की व्यवस्था नहीं है। नागल सीएचसी पर मंगलवार और शुक्रवार का दिन तय है। गंगोह और नकुड़ सीएचसी पर सोमवार और बृहस्पतिवार को इंजेक्शन लगाए जाते हैं। नानौता सीएचसी पर मंगलवार और शुक्रवार को ही इंजेक्शन लगाए जाते हैं। ऐसी स्थिति में इंजेक्शन लगने वाले दिन के अलावा यदि किसी अन्य दिन कुत्ता काट ले तो घायल को या तो एसबीडी जिला अस्पताल पहुंचना पड़ता है या फिर निजी चिकित्सक के पास।
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इंजेक्शन लगने का नियम
कुत्ता काटने के तुरंत बाद घायल को टिटनेस का इंजेक्शन लगना जरूरी है। इसके बाद एंटी रेबीज का इंजेक्शन जीरो-डे यानी पहले दिन, तीसरे दिन, सातवें दिन, 14वें दिन और 28वें दिन लगना चाहिए।
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यहां लगते हैं इंजेक्शन
स्थान हर सप्ताह कितने लग रहे
जिला अस्पताल कक्ष-22 250 से 280
सीएचसी नागल् 35 से 40
सीएचसी गागलहेड़ी----------40 से 50
सीएचसी गंगोह--------------40 से 50
सीएचसी नकुड़---------------40 से 60
सीएचसी नानौता-------------50 से 55
सीएचसी रामपुर मनिहारान--40 से 50
वर्जन
फिलहाल एंटी रेबीज इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है। जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी पर भी पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन उपलब्ध हैं। रही बात सीएचसी पर सप्ताह में दो दिन इंजेक्शन लगने की, तो एक वायल दस लोगों को लगती है। ऐसे में मरीजों को एक दिन बुला लेते हैं, जिससे पूरी वायल लग जाए। कोशिश यही रहती है कि लोगों को इलाज भी मिलता रहे और दवा भी खराब ना जाए।
- डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ
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