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सुरक्षा के दावे तोड़ रहे दम, महिला अपराध नहीं हुए कम, लगातार छेड़छाड़, दुष्कर्म जैसे अपराध की शिकार हो रही बेटियां

Thu, 22 Oct 2020 05:36 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Thu, 22 Oct 2020 05:36 PM IST
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exclusive news: Daughters falling victim to crime like constant molestation, rape in saharanpur District
महिलाओं के खिलाफ अपराध - फोटो : पिक्साबे
महिलाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति अभियान चल रहा है। मकसद यही है कि महिलाओं को जागरूक कर अधिक सशक्त बनाया जाए। इसकी जरूरत इसलिए भी पड़ी है कि तमाम दावों के बावजूद महिलाएं सुरक्षा को लेकर अब तक आश्वस्त नहीं हो सकी हैं।
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सहारनपुर जिले में ही इस साल महिला उत्पीड़न की एक हजार से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। बेटियां अब भी छेड़छाड़, दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म जैैसे अपराधों की शिकार हो रही हैं। कुछ मामलों में तो पीड़िताओं ने जान तक भी गवां दी।
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जिले के 22 थानों के अलावा महिला सहायता प्रकोष्ठ, डीआईजी, एसएसपी कार्यालयों, तहसील और थाना दिवसों के अलावा कोर्ट के माध्यम से महिला उत्पीड़न के मामले आ रहे हैं। इनमें कुछ केस तो विवेचना के दौरान ही पारिवारिक और सामाजिक दबाव या साक्ष्यों के अभाव में खारिज हो जाते हैं। करीब 55 फीसदी मामले ही चार्जशीट और आरोपियों को सजा दिलाने तक पहुंच पाए हैं।
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न किशोरियां सुरक्षित, न ही महिलाएं
केस एक : गंगोह क्षेत्र में पिछले माह ही सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता किशोरी ने जहर खाकर जान दे दी। आरोपियों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी थी।
केस दो : तीन माह पहले पेपर मिल रोड निवासी किशोरी को उसके ही चार सहपाठी उठाकर ले गए। सामूहिक दुष्कर्म कर वीडियो वायरल करने की धमकी दी। इनमें से तीन आरोपी पकड़े गए।
केस तीन : शहर की आली की चुंगी निवासी नुसरत काफी समय से पति आशु के उत्पीड़न से परेशान है। उसने महिला थाने में शिकायत की। आरोप है कि मंगलवार को पति और रिश्तेदार ने उसके साथ ही भाई पर तेजाब से हमला किया। नुसरत के मुताबिक इंसाफ मांगने पर भी जान खतरे में पड़ रही है।
केस चार : बेहट क्षेत्र की अनुसूचित जनाति की महिला के साथ तीन साल पहले सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस मामले में आरोपी तो गिरफ्तार हो गए। मगर अब तक एससी एसटी एक्ट में निर्धारित मुआवजा नहीं मिला। अब मजबूर होकर कोर्ट की शरण ली।

सितंबर तक महिलाओं के साथ बड़े अपराधों की स्थिति
दहेज हत्या - 22 मामले आए, 17 में चार्जशीट, पांच विवेचना में
दहेज उत्पीड़न - 246 मामले आए, 51 में चार्जशीट, 26 खारिज, शेष विवेचना में
दुष्कर्म - 41 मामले आए, 30 में चार्जशीट, आठ खारिज, शेष विवेचना में
सामूहिक दुष्कर्म - 35 मामले आए, 17 में चार्जशीट, चार खारिज, शेष विवेचना में
अपहरण - 72 मामले आए, 52 में चार्जशीट, 10 खारिज, शेष विवेचना में
छेड़छाड़, फब्तियां - 180 मामले आए, 127 में चार्जशीट, 25 खारिज, शेष विवेचना में
घरेलू हिंसा, विवाद - 40 मामले, चार खारिज, 22 में चार्जशीट, शेष विवेचना में
पॉक्सो एक्ट के केस - 31 मामले, चार खारिज, 20 में चार्जशीट, शेष विवेचना में
( जिले के 22 थानों, महिला सहायता प्रकोष्ठ, कोर्ट में शिकायतों के आधार पर)

सशक्त पैरवी से सजा दिलाने के प्रयास जारी
एसएसपी डॉ. एस चनप्पा कहते हैं कि महिला अपराधों के मामले में एफआईआर से विवेचना तक में लापरवाही न करने के निर्देश नियमित रूप से दिए जा रहे हैं। कोर्ट में भी ऐसे मामलों की सशक्त पैरवी कर आरोपियों को जल्द और अधिक सजा दिलाने के प्रयास जारी हैं।
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