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Saharanpur News: 47 साल की उम्र में भी घर में गूंज रहीं किलकारियां
Sun, 22 Feb 2026 12:20 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 22 Feb 2026 12:20 AM IST
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सहारनपुर। सविता (बदला हुआ नाम), उम्र 47 साल। कुछ साल पहले 17 साल के बेटे की मौत के बाद पति-पत्नी सदमे में आ गए। समय बीतने के साथ उन्हें एहसास हुआ कि बढ़ती उम्र के कारण अब प्राकृतिक रूप से संतान संभव नहीं है।
चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने आईवीएफ का सहारा लिया। कई चरणों की प्रक्रिया के बाद महिला ने 47 वर्ष की उम्र में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह महज एक उदाहरण है। पिछले कुछ वर्षों में आईवीएफ को लेकर ट्रेंड बढ़ा है, जिनकी गोद कभी सूनी होती थी अब उनके घरों में किलकारी गूंज रही हैं।
दरअसल, महानगर में चार से पांच आईवीएफ सेंटर है। हालांकि अभी तक जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में आईवीएफ की सुविधा नहीं है। कुछ अरसे पहले तक लोगों में आईवीएफ को लेकर एक संकोच रहता है, लेकिन बदलते दौर में लोगों की सोच भी बदलने लगी है। निजी आईवीएफ सेंटरों पर पिछले करीब एक-डेढ़ साल से लगातार केस बढ़ रहे हैं। एक निजी आईवीएफ सेंटर संचालिका डॉ. रीतू जैन के अनुसार, अब 45 से 47 वर्ष की उम्र की महिलाएं भी मां बन रही हैं।
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हालांकि इस उम्र में प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन सही जांच और देखरेख से सफलता मिल रही है। आईवीएफ के मामले देर से शादी के कारण बढ़ रहे हैं। इसके अलावा बढ़ती उम्र में संतान की योजना, बदलती जीवनशैली और हादसे या बीमारी में संतान खो देने की वजह से भी आईवीएफ के केस आ रहे हैं।
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चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने आईवीएफ का सहारा लिया। कई चरणों की प्रक्रिया के बाद महिला ने 47 वर्ष की उम्र में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह महज एक उदाहरण है। पिछले कुछ वर्षों में आईवीएफ को लेकर ट्रेंड बढ़ा है, जिनकी गोद कभी सूनी होती थी अब उनके घरों में किलकारी गूंज रही हैं।
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दरअसल, महानगर में चार से पांच आईवीएफ सेंटर है। हालांकि अभी तक जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में आईवीएफ की सुविधा नहीं है। कुछ अरसे पहले तक लोगों में आईवीएफ को लेकर एक संकोच रहता है, लेकिन बदलते दौर में लोगों की सोच भी बदलने लगी है। निजी आईवीएफ सेंटरों पर पिछले करीब एक-डेढ़ साल से लगातार केस बढ़ रहे हैं। एक निजी आईवीएफ सेंटर संचालिका डॉ. रीतू जैन के अनुसार, अब 45 से 47 वर्ष की उम्र की महिलाएं भी मां बन रही हैं।
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हालांकि इस उम्र में प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन सही जांच और देखरेख से सफलता मिल रही है। आईवीएफ के मामले देर से शादी के कारण बढ़ रहे हैं। इसके अलावा बढ़ती उम्र में संतान की योजना, बदलती जीवनशैली और हादसे या बीमारी में संतान खो देने की वजह से भी आईवीएफ के केस आ रहे हैं।