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सम्राट मिहिर भोज का नाम... कर गए गुर्जरों की वकालत
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सहारनपुर। सम्राट मिहिर भोज के नाम को लेकर काफी दिन से विवाद गरमाया हुआ है। एक तरफ इन्हें गुर्जर प्रतिहार कहा जा रहा है तो राजपूत समाज के लोग उन्हें अपना बताते हैं। तीतरो में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मंच से गुर्जरों की वकालत करते हुए कहा कि बगल के जिले में नाम बदला, इतिहास मिटाने की कोशिश की, लेकिन यह धरती वीरों की है, जो इतिहास बदलेगा, जनता उसकी सरकार बदल देती है।
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के इस भाषण से इतना तो स्पष्ट हो गया कि उन्होंने खुले तौर पर सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर माना और गुर्जर समाज को अपने पक्ष में करने के लिए आगामी चुनाव का सियासी समीकरण साध गए। उन्होंने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कोतवाल धन सिंह गुर्जर ने अंग्रेजों की सरकार हिलाने का काम किया था। ऐसे अनेक क्रांतिकारी इस धरती से ही आते हैं। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर पूर्व में सपा सुप्रीमो ने ट्विट कर लिखा था कि हमने यही पढ़ा है कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर थे।
अब इसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। क्योंकि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और बिजनौर सहित वेस्ट यूपी के कई जिलों में गुर्जर समाज के मतदाताओं की संख्या काफी है। इससे गुर्जर समाज को सपा अपने पक्ष में करने का प्रयास कर सकती है तो, इसका दूसरा प्रभाव राजपूत समाज की नाराजगी के रूप में भी सपा को देखने को मिल सकता है। क्योंकि राजपूत समाज के लोग सम्राट मिहिर भोज को अपना बताते हुए आंदोलन तक कर चुके हैं और वेस्ट यूपी में राजपूत समाज की संख्या भी काफी है।
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किसान आंदोलन पर ये कहा
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि किसान हमारा पेट भरते हैं, मगर आज उसे अपमानित होना पड़ रहा है, कभी किसान को मवाली कहा जा रहा है। इनका बस चले तो आतंकवादी कह दें। बावजूद किसान अपने संघर्ष से पीछे नहीं हटे हैं और ठान लिया है, तीन कानून वापस होने तक बैठे रहेंगे। वह लड़ना जानते हैं, गद्दी पर बैठाना जानते हैं और मौका मिलने पर गद्दी से हटाना भी जानते हैं।
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सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के इस भाषण से इतना तो स्पष्ट हो गया कि उन्होंने खुले तौर पर सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर माना और गुर्जर समाज को अपने पक्ष में करने के लिए आगामी चुनाव का सियासी समीकरण साध गए। उन्होंने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कोतवाल धन सिंह गुर्जर ने अंग्रेजों की सरकार हिलाने का काम किया था। ऐसे अनेक क्रांतिकारी इस धरती से ही आते हैं। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर पूर्व में सपा सुप्रीमो ने ट्विट कर लिखा था कि हमने यही पढ़ा है कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर थे।
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अब इसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। क्योंकि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और बिजनौर सहित वेस्ट यूपी के कई जिलों में गुर्जर समाज के मतदाताओं की संख्या काफी है। इससे गुर्जर समाज को सपा अपने पक्ष में करने का प्रयास कर सकती है तो, इसका दूसरा प्रभाव राजपूत समाज की नाराजगी के रूप में भी सपा को देखने को मिल सकता है। क्योंकि राजपूत समाज के लोग सम्राट मिहिर भोज को अपना बताते हुए आंदोलन तक कर चुके हैं और वेस्ट यूपी में राजपूत समाज की संख्या भी काफी है।
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किसान आंदोलन पर ये कहा
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि किसान हमारा पेट भरते हैं, मगर आज उसे अपमानित होना पड़ रहा है, कभी किसान को मवाली कहा जा रहा है। इनका बस चले तो आतंकवादी कह दें। बावजूद किसान अपने संघर्ष से पीछे नहीं हटे हैं और ठान लिया है, तीन कानून वापस होने तक बैठे रहेंगे। वह लड़ना जानते हैं, गद्दी पर बैठाना जानते हैं और मौका मिलने पर गद्दी से हटाना भी जानते हैं।