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कचरे से बनेगी बिजली, खाद
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 01 Nov 2015 12:28 AM IST
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नगर निगम के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बना कचरा जल्द ही निगम की ताकत बनने जा रहा है। नगर निगम ने कचरे से बिजली और खाद बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए नगरायुक्त और निगम के स्वास्थ्य अधिकारी मैसूर से प्लान तैयार कर लौटे हैं।
साथ ही एक निजी कंपनी से भी बात चल रही है, जो अंतिम दौर में है। दावा किया जा रहा है कि एक साल बाद लोगों को शहर के भीतर कहीं भी कचरे के ढेर नजर नहीं आएंगे।
स्मार्ट सिटी योजना के लिए चयनित होने के बाद शहर की खामियों को दूर करने का सिलसिला शुरू हो चुका है। एक ओर जहां निगम ने जगह-जगह शौचालय तैयार करा रहा है, वहीं शहर से कचरे से मुक्ति दिलाने की भी तैयारी चल रही है। वर्तमान में नगर निगम कचरे को शहर के अंबाला रोड पर डाल रहा है, जहां कचरा लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
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इसके अलावा शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। कचरा सैनीट्रेशन के लिए निगम ने छह जगह चिह्नित की हैं, जिनपर निर्णय होना अंतिम दौर में है। हालांकि नगर में पहले से ही एक निजी संस्था कचरे से खाद बनाकर लाभ कमा रही है, जिसने कई लोगों को रोजगार भी दिया हुआ है। मगर संस्था कुल कचरे के कुछ प्रतिशत हिस्से का ही इस्तेमाल कर पा रही है।
निगम की मंशा शहर भर के कचरे से बिजली और खाद बनाने की है, जिसके बाद न केवल कचरे से निजात मिलेेगी, बल्कि नगर निगम बिजली और खाद बेचकर कमाई भी कर सकेगा। कचरे से बिजली और खाद कैसे बनाई जाए। इसकी ट्रेनिंग नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला और निगम के स्वास्थ्य अधिकारी एके त्रिपाठी मैसूर से लेकर लौटे हैं। साथ ही वहां से इसका पूरा प्लान भी तैयार करके लाए हैं।
इसके अलावा नगर की एक बड़ी निजी कंपनी से इस संबंध में सहयोग लेने की तैयारी है। मिली जानकारी के अनुसार उक्त कंपनी कचरा सैनीट्रेशन पर प्रतिमाह एक करोड़ रुपये खर्च करेगी। निगम का यह प्रयास स्मार्ट सिटी की दिशा में भी अच्छा कदम होगा।
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साथ ही एक निजी कंपनी से भी बात चल रही है, जो अंतिम दौर में है। दावा किया जा रहा है कि एक साल बाद लोगों को शहर के भीतर कहीं भी कचरे के ढेर नजर नहीं आएंगे।
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स्मार्ट सिटी योजना के लिए चयनित होने के बाद शहर की खामियों को दूर करने का सिलसिला शुरू हो चुका है। एक ओर जहां निगम ने जगह-जगह शौचालय तैयार करा रहा है, वहीं शहर से कचरे से मुक्ति दिलाने की भी तैयारी चल रही है। वर्तमान में नगर निगम कचरे को शहर के अंबाला रोड पर डाल रहा है, जहां कचरा लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
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इसके अलावा शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। कचरा सैनीट्रेशन के लिए निगम ने छह जगह चिह्नित की हैं, जिनपर निर्णय होना अंतिम दौर में है। हालांकि नगर में पहले से ही एक निजी संस्था कचरे से खाद बनाकर लाभ कमा रही है, जिसने कई लोगों को रोजगार भी दिया हुआ है। मगर संस्था कुल कचरे के कुछ प्रतिशत हिस्से का ही इस्तेमाल कर पा रही है।
निगम की मंशा शहर भर के कचरे से बिजली और खाद बनाने की है, जिसके बाद न केवल कचरे से निजात मिलेेगी, बल्कि नगर निगम बिजली और खाद बेचकर कमाई भी कर सकेगा। कचरे से बिजली और खाद कैसे बनाई जाए। इसकी ट्रेनिंग नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला और निगम के स्वास्थ्य अधिकारी एके त्रिपाठी मैसूर से लेकर लौटे हैं। साथ ही वहां से इसका पूरा प्लान भी तैयार करके लाए हैं।
इसके अलावा नगर की एक बड़ी निजी कंपनी से इस संबंध में सहयोग लेने की तैयारी है। मिली जानकारी के अनुसार उक्त कंपनी कचरा सैनीट्रेशन पर प्रतिमाह एक करोड़ रुपये खर्च करेगी। निगम का यह प्रयास स्मार्ट सिटी की दिशा में भी अच्छा कदम होगा।