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बुजुर्गों ने बताया नियमित साइकिलिंग है फिट रहने का राज

Fri, 03 Jun 2022 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2022 12:00 AM IST
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Elders told that regular cycling is the secret of staying fit
सीताराम सैनी - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। योग और एक्सरसाइज की तरह की साइकिलिंग करना भी एक फिजिकल एक्टिविटी है जिससे हार्ट और फेफड़े दोनों स्वस्थ रहते हैं। आज के समय में जहां युवा थोड़ी दूर स्थित खेत और बाजार में जाने के लिए कार, स्कूटी और बाइक का इस्तेमाल करते हैं वहीं गांव देहात में आज भी बहुत से बुजुर्ग ऐसे हैं जो मीलों की दूरी रोज साइकिल से तय करते हैं। रिश्तेदारी तक में यह साइकिल से ही जाना पसंद करते हैं। तभी वे 70-75 साल की उम्र में भी युवाओं की तरह जोश से लबरेज दिखाई देते हैं। विश्व साइकिल दिवस पर ऐसे ही कुछ बुजुर्गों से बात की गई। पेश है रिपोर्ट
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रिश्तेदारी में भी साइकिल से ही जाते हैं
चिलकाना सुलतानपुर निवासी सीताराम सैनी (78) पिछले 61 वर्ष से साइकिल की सवारी करते चले आ रहे हैं। घर से खेत जाना हो या कहीं रिश्तेदारी में हमेशा साइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं। सीताराम सैनी ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने 17 वर्ष की उम्र में साइकिल चलाना सीखा था। तब से लेकर आज तक उन्होंने साइकिल से किनारा नहीं किया। घर पुत्रों तथा पौत्रों के पास मोटर साइकिल हैं, लेकिन उन्हें साइकिल पर चलना अच्छा लगता है। वे बताते हैं कि उम्र के चौथे पड़ाव में भी स्वस्थ रहने का राज नियमित साइकिल चलाना ही है। वह आज भी खेत से घास काटकर साइकिल पर रखकर ही घर लेकर आते हैं।
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बचपन से चला रहे साइकिल
छुटमलपुर क्षेत्र के गांव चौंदाहेड़ी निवासी चौ. जगपाल सिंह (72) पेशे से किसान हैं। घर में कार और बाइक होने के बावजूद वे बाजार और खेतों पर आने जाने के लिए साइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं। आज के युवा जहां छोटी की दूरी तय करने के लिए स्कूटर या बाइक का सहारा लेते हैं वहीं जगपाल सिंह आठ किमी दूर छुटमलपुर में स्थित अपने घर पर साइकिल से ही आते जाते हैं। जगपाल सिंह बताते हैं कि वे बचपन से ही साइकिल चला रहे हैं। इसी वजह से ही वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।
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युवाओं को संदेश देने के लिए चलाते हैं साइकिल
नागल निवासी पूर्व प्रधान चौधरी रामपाल सिंह (75) की गिनती गांव के बड़े साधन संपन्न किसानों में होती है। चार योजना तक ग्राम प्रधान रहे चौ. रामपाल सिंह बाइक चलानी जानते हैं, लेकिन शायद ही उन्हें किसी ने बाइक चलाते देखा होगा। वे आठ से दस किमी की दूरी भी साइकिल से ही तय करते हैं। उनका कहना है कि वे युवाओं को भी संदेश देना चाहते हैं कि वे अपनी दिनचर्या में साइकिल को शामिल करें। इससे शरीर तो स्वस्थ होगा ही पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

बाइक पर बैठ जिम जाने से अच्छी है साइकिलिंग
बड़गांव के गांव रत्नहेड़ी निवासी किसान टोडरमल सिंह (67) अपने सभी कार्य साइकिल से ही करते हैं। उनका कहना है कि आज के युवक पैसे देकर जिम करने बाइक पर बैठ कर जाते हैं। वे नियमित आठ से दस किमी साइकिल चलाते हैं और बिना जिम जाए पूरी तरह स्वस्थ हैं। रात को नींद भी अच्छी आती है। टोडरमल कहते हैं कि घर में कार और बाइक दोनों हैं बच्चे जिद भी करते हैं कि इनसे चला करो, लेकिन उन्हें जो मजा कहीं जाने में अपनी साइकिल से है वह किसी भी सवारी में नहीं आता है।

चौ जगपाल सिंह

चौ जगपाल सिंह- फोटो : SAHARANPUR

रामपाल सिंह

रामपाल सिंह- फोटो : SAHARANPUR

टोडरमल

टोडरमल- फोटो : SAHARANPUR

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