{"_id":"612e72f68ebc3eb6f10566ec","slug":"efforts-were-made-but-malnutrition-did-not-end-saharanpur-news-mrt55408260","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोशिशें तो हुईं, पर खत्म नहीं हुआ कुपोषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोशिशें तो हुईं, पर खत्म नहीं हुआ कुपोषण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- जनपद में 20357 कुपोषित और 2746 अत्यंत कुपोषित बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। कुपोषण को समाप्त करने के लिए की जा रही तमाम कवायदों के बावजूद नौनिहालों पर कुपोषण का दंश हॉवी है। जिले में वर्तमान में 20357 कुपोषित और 2746 अत्यंत कुपोषित बच्चे हैं। बीते चार वर्षों में कुपोषित बच्चों की संख्या तो कम हुई है, लेकिन कुपोषण पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है।
संभव अभियान के तहत बीते तीन माह में कुपोषण को कम करने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से तमाम कवायद की गई। बच्चों को शुष्क पुष्टाहार बांटने के साथ ही उनके अभिभावकों को जागरूक किया गया। 50 से अधिक नई पोषण वाटिकाओं का निर्माण कराने के साथ जागरूकता कार्यक्रम हुए। कोरोना काल के बीच घर-घर जाकर बच्चों की निगरानी की गई। इसके बाद भी कुपोषित बच्चों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। फिर ये सारी कवायद कागजाें में ही रही, क्योंकि वर्तमान में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, जिनको स्वास्थ्य में सुधार के लिए अब सितंबर माह में राष्ट्रीय पोषण माह में विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।
बांटा गया गेहूं, चावल और दाल
स्वयं सहायता समूहों की ओर से कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को गेहूं, दाल, चावल बांटा गया है। प्रत्येक बच्चे एक किलो चावल, सवा किलो गेहूं और दाल मिलने पर एक किलो दाल के पैकेट भी वितरित किए। शुष्क पोषाहार वितरण प्रणाली में बाल विकास पुष्टाहार विभाग, स्वयं सहायता समूह और जिला पूर्ति विभाग की ओर से संयुक्त रूप से कार्य किया गया, जिसकी मॉनीटरिंग शासन की ओर से की जा रही है।
विज्ञापन
इस माह होने हैं यह कार्यक्रम
-- प्रथम सप्ताह -- सरकारी स्कूलों, आवासीय स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायतों में पोषण वाटिकाओं का निर्माण होगा।
-- द्वितीय सप्ताह -- बालक-बालिकाओं व गर्भवती महिलाओं योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
-- तृतीय सप्ताह -- पोषण संबंधी प्रचार प्रसार करने के साथ ही अनुपूरक पुष्टाहार का वितरण होगा।
-- चौथे सप्ताह -- कुपोषित व अत्यंत कुपोषित बच्चों के चिह्नीकरण को दोबारा सर्वे होगा। इसके साथ ही कुपोषण को दूर करने के लिए विभिन्न संस्थाओं और विभागों के प्रस्ताव लिए जाएंगे।
चार वर्षों में कुपोषण की स्थिति
वर्ष ----- कुपोषित ---- अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5550
2021------20357-----------2746
--------------वर्जन -
कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं। बुधवार से राष्ट्रीय पोषण माह की शुरूआत की जाएगी। कुपोषण को कम करने के प्रयास होंगे, साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी एनीमिया से बचाने की कवायद होगी। -- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। कुपोषण को समाप्त करने के लिए की जा रही तमाम कवायदों के बावजूद नौनिहालों पर कुपोषण का दंश हॉवी है। जिले में वर्तमान में 20357 कुपोषित और 2746 अत्यंत कुपोषित बच्चे हैं। बीते चार वर्षों में कुपोषित बच्चों की संख्या तो कम हुई है, लेकिन कुपोषण पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है।
संभव अभियान के तहत बीते तीन माह में कुपोषण को कम करने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से तमाम कवायद की गई। बच्चों को शुष्क पुष्टाहार बांटने के साथ ही उनके अभिभावकों को जागरूक किया गया। 50 से अधिक नई पोषण वाटिकाओं का निर्माण कराने के साथ जागरूकता कार्यक्रम हुए। कोरोना काल के बीच घर-घर जाकर बच्चों की निगरानी की गई। इसके बाद भी कुपोषित बच्चों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। फिर ये सारी कवायद कागजाें में ही रही, क्योंकि वर्तमान में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, जिनको स्वास्थ्य में सुधार के लिए अब सितंबर माह में राष्ट्रीय पोषण माह में विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।
विज्ञापन
बांटा गया गेहूं, चावल और दाल
स्वयं सहायता समूहों की ओर से कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को गेहूं, दाल, चावल बांटा गया है। प्रत्येक बच्चे एक किलो चावल, सवा किलो गेहूं और दाल मिलने पर एक किलो दाल के पैकेट भी वितरित किए। शुष्क पोषाहार वितरण प्रणाली में बाल विकास पुष्टाहार विभाग, स्वयं सहायता समूह और जिला पूर्ति विभाग की ओर से संयुक्त रूप से कार्य किया गया, जिसकी मॉनीटरिंग शासन की ओर से की जा रही है।
विज्ञापन
इस माह होने हैं यह कार्यक्रम
-- प्रथम सप्ताह -- सरकारी स्कूलों, आवासीय स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायतों में पोषण वाटिकाओं का निर्माण होगा।
-- द्वितीय सप्ताह -- बालक-बालिकाओं व गर्भवती महिलाओं योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
-- तृतीय सप्ताह -- पोषण संबंधी प्रचार प्रसार करने के साथ ही अनुपूरक पुष्टाहार का वितरण होगा।
-- चौथे सप्ताह -- कुपोषित व अत्यंत कुपोषित बच्चों के चिह्नीकरण को दोबारा सर्वे होगा। इसके साथ ही कुपोषण को दूर करने के लिए विभिन्न संस्थाओं और विभागों के प्रस्ताव लिए जाएंगे।
चार वर्षों में कुपोषण की स्थिति
वर्ष ----- कुपोषित ---- अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5550
2021------20357-----------2746
--------------वर्जन -
कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं। बुधवार से राष्ट्रीय पोषण माह की शुरूआत की जाएगी। कुपोषण को कम करने के प्रयास होंगे, साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी एनीमिया से बचाने की कवायद होगी। -- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी