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142 किमी दूर जाकर दान की प्लेटलेट्स
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सहारनपुर। फैमिली ऑफ ब्लड डोनर्स ट्रस्ट के सदस्य पार्थ माहेश्वरी ने रविवार की रात में करीब 142 किलोमीटर लंबा सफर तय करके डेंगू मरीज के लिए प्लेटलेट्स दान की। प्लेटलेट्स मिलने के बाद से मरीज की हालत में सुधार है। दावा किया जा रहा है कि पार्थ अभी तक 34 बार प्लेटलेट्स दान कर चुके हैं।
ट्रस्ट के संस्थापक तरुण प्रकाश ने बताया कि चंडीगढ़ मोहाली के एक निजी और बड़े अस्पताल में एक डेंगू का मरीज भर्ती था, इसको प्लेटलेट्स की सख्त जरूरत थी। इसकी सूचना ट्रस्ट सदस्यों को मिली तो पार्थ माहेश्वरी प्लेटलेट्स देने के लिए तैयार हो गए। पार्थ माहेश्वरी ने मोहाली जाकर मरीज के लिए प्लेटलेट्स दान की। पार्थ के तरुण प्रकाश, अंकित तनेजा भी चंडीगढ़ पहुंचे थे। प्लेटलेट्स चढ़ने के बाद से मरीज की हालत में सुधार है।
तरुण ने बताया कि पार्थ का रक्त बी पॉजिटिव है, जिसकी प्लेटलेट्स की जरूरत सबसे अधिक रहती है। पार्थ माहेश्वरी ने बताया कि वह बीमारियों के मौसम में हर 15 दिन में प्लेटलेट्स दान करते हैं। अभी तक 34 बार प्लेटलेट्स देकर मरीजों की जान बचा चुके हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष पंकज कुमार पांचाल ने बताया कि दिन हो या रात ट्रस्ट सदस्य 24 घंटे रक्तदान व प्लेटलेट्स देने को तैयार हैं। जहां से भी रक्त या प्लेटलेट्स की मांग आती है, वहां सदस्य पहुंच जाते हैं। कोशिश यही है कि रक्त और प्लेटलेट्स के अभाव में किसी मरीज की जान न जाए।
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ट्रस्ट के संस्थापक तरुण प्रकाश ने बताया कि चंडीगढ़ मोहाली के एक निजी और बड़े अस्पताल में एक डेंगू का मरीज भर्ती था, इसको प्लेटलेट्स की सख्त जरूरत थी। इसकी सूचना ट्रस्ट सदस्यों को मिली तो पार्थ माहेश्वरी प्लेटलेट्स देने के लिए तैयार हो गए। पार्थ माहेश्वरी ने मोहाली जाकर मरीज के लिए प्लेटलेट्स दान की। पार्थ के तरुण प्रकाश, अंकित तनेजा भी चंडीगढ़ पहुंचे थे। प्लेटलेट्स चढ़ने के बाद से मरीज की हालत में सुधार है।
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तरुण ने बताया कि पार्थ का रक्त बी पॉजिटिव है, जिसकी प्लेटलेट्स की जरूरत सबसे अधिक रहती है। पार्थ माहेश्वरी ने बताया कि वह बीमारियों के मौसम में हर 15 दिन में प्लेटलेट्स दान करते हैं। अभी तक 34 बार प्लेटलेट्स देकर मरीजों की जान बचा चुके हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष पंकज कुमार पांचाल ने बताया कि दिन हो या रात ट्रस्ट सदस्य 24 घंटे रक्तदान व प्लेटलेट्स देने को तैयार हैं। जहां से भी रक्त या प्लेटलेट्स की मांग आती है, वहां सदस्य पहुंच जाते हैं। कोशिश यही है कि रक्त और प्लेटलेट्स के अभाव में किसी मरीज की जान न जाए।
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