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खूंखार हो रहे कुत्ते, दो साल में 50 फीसदी मामले बढ़े
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सहारनपुर। कुत्ते लगातार खूंखार हो रहे हैं। बीते दो वर्ष में कुत्ता काटने के 50 फीसदी मामले बढ़े हैं। अकेले जिला अस्पताल में हर माह करीब तीन हजार लोग एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। यदि सीएचसी और पीएचसी के मामलों को भी जोड़ा जाए तो यह संख्या चार हजार से अधिक बैठती है।
एसबीडी जिला अस्पताल में एंटी रेेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए प्रतिदिन 80 से 100 मामले पहुंच रहे हैं। अगस्त माह में कई दिन ऐसे भी गए हैं, जब टीका लगवाने वालों की संख्या 100 से अधिक रही है। इस प्रकार प्रतिमाह ढाई से तीन हजार लोग टीका लगवानेे पहुंच रहे हैं। यदि इसकी तुलना वर्ष 2019 के मामलों से करें तो 2019 में प्रति माह 1500 से 1800 मामले कुत्ता काटने के पहुंचते थे। मगर अब इनकी संख्या करीब 50 फीसदी बढ़ चुकी है। नागल स्थित सीएचसी पर भी टीका लगाने की सुविधा है। बड़गांव पीएचसी से मरीजों को नानौता सीएचसी भेजा जाता है। गंगोह सीएचसी पर सप्ताह में 30 से 40 मामले आते हैं। यहां सोमवार और बृहस्पतिवार को इंजेक्शन लगाए जाते हैं। गागलहेड़ी सीएचसी पर प्रतिदिन 10 से अधिक मामले आते हैं। नकुड़ सामुदायिक केंद्र पर सप्ताह में 40 से 50 मामले कुत्ता काटने के आते हैं। सोमवार और बृहस्पतिवार केे टीके लगाए जाते हैं। रामपुर मनिहारान और नकुड़ सीएचसी के साथ ही अंबेहटा पीएचसी पर भी कुत्ता काटने के मामले बराबर आते रहे हैं।
निगम का अभियान रुका
शहरवासियों को कुत्तों से निजात दिलाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। नगर निगम ने करीब तीन वर्ष पहले कुत्ता पकड़कर उसकी नसबंदी का अभियान शुरू किया था। करीब नौ लाख रुपये खर्च हुए थे। मगर कुत्ते कम नहीं हुए। करीब एक साल से अभियान बंद है। निगम अधिकारियों का कहना है कि कुत्तों की नसबंदी के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बनाने के आदेश हैं। नगर निगम बेहट रोड पर एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बना रहा है, जिसका निर्माण कार्य 70 फीसदी हो चुका है। सेंटर बनने के बाद निगम अभियान चलाएगा।
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वर्जन....
कुत्ता काटे के कितने मामले अस्पताल में आ रहे हैं इसकी जानकारी नहीं है, मगर एंटी रेबीज एंजेक्शन हमारे पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। अस्पताल के 22 नंबर कक्ष को एंटी रेबीज टीकाकरण के लिए ही आरक्षित किया गया है।
डॉ. आभा वर्मा, सीएमएस, एसबीडी जिला अस्पताल।
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एसबीडी जिला अस्पताल में एंटी रेेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए प्रतिदिन 80 से 100 मामले पहुंच रहे हैं। अगस्त माह में कई दिन ऐसे भी गए हैं, जब टीका लगवाने वालों की संख्या 100 से अधिक रही है। इस प्रकार प्रतिमाह ढाई से तीन हजार लोग टीका लगवानेे पहुंच रहे हैं। यदि इसकी तुलना वर्ष 2019 के मामलों से करें तो 2019 में प्रति माह 1500 से 1800 मामले कुत्ता काटने के पहुंचते थे। मगर अब इनकी संख्या करीब 50 फीसदी बढ़ चुकी है। नागल स्थित सीएचसी पर भी टीका लगाने की सुविधा है। बड़गांव पीएचसी से मरीजों को नानौता सीएचसी भेजा जाता है। गंगोह सीएचसी पर सप्ताह में 30 से 40 मामले आते हैं। यहां सोमवार और बृहस्पतिवार को इंजेक्शन लगाए जाते हैं। गागलहेड़ी सीएचसी पर प्रतिदिन 10 से अधिक मामले आते हैं। नकुड़ सामुदायिक केंद्र पर सप्ताह में 40 से 50 मामले कुत्ता काटने के आते हैं। सोमवार और बृहस्पतिवार केे टीके लगाए जाते हैं। रामपुर मनिहारान और नकुड़ सीएचसी के साथ ही अंबेहटा पीएचसी पर भी कुत्ता काटने के मामले बराबर आते रहे हैं।
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निगम का अभियान रुका
शहरवासियों को कुत्तों से निजात दिलाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। नगर निगम ने करीब तीन वर्ष पहले कुत्ता पकड़कर उसकी नसबंदी का अभियान शुरू किया था। करीब नौ लाख रुपये खर्च हुए थे। मगर कुत्ते कम नहीं हुए। करीब एक साल से अभियान बंद है। निगम अधिकारियों का कहना है कि कुत्तों की नसबंदी के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बनाने के आदेश हैं। नगर निगम बेहट रोड पर एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बना रहा है, जिसका निर्माण कार्य 70 फीसदी हो चुका है। सेंटर बनने के बाद निगम अभियान चलाएगा।
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कुत्ता काटे के कितने मामले अस्पताल में आ रहे हैं इसकी जानकारी नहीं है, मगर एंटी रेबीज एंजेक्शन हमारे पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। अस्पताल के 22 नंबर कक्ष को एंटी रेबीज टीकाकरण के लिए ही आरक्षित किया गया है।
डॉ. आभा वर्मा, सीएमएस, एसबीडी जिला अस्पताल।