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प्रमाणपत्रों के लिए दिव्यांग काट रहे चक्कर
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सहारनपुर। दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए भटकना पड़ रहा है। सुबह नौ बजे अस्पताल बुलाकर उन्हें शाम के छह बजे तक प्रमाणपत्र के लिए इंतजार कराया जाता है। कई बार वह हंगामा और प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। समस्या के निदान के लिए वह मुख्य चिकित्साधिकारी से भी मिल चुके हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल परिसर स्थित टीबी सेनेटोरियम में सोमवार को दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाए जाते हैं। दिव्यांगजनों से सुबह के समय फॉर्म भरवाए जाते हैं। दोपहर 12 बजे तक फॉर्म भरवाने के बाद उनका परीक्षण किया जाता है, जिसमें यह देखा जाता है कि व्यक्ति कितना प्रतिशत दिव्यांग हैं। मगर अक्सर यह होता है कि पैनल में शामिल सभी चिकित्सक इकट्ठा नहीं हो पाने की वजह से दिव्यांगजनों को शाम छह बजे तक इंतजार कराया जाता है। इन दिव्यांगजनों में पुरुषों के साथ ही महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहते हैं।
वेरीफिकेशन के लिए भी भटकते हैं दिव्यांग
दिव्यांगता प्रमाणपत्र अब ऑनलाइन भी बनने लगे हैं। ऑनलाइन दिव्यांग पत्र बनवाने के बाद अभ्यर्थी को अस्पताल जाकर प्रमाणपत्र को वेरीफाई कराना होता है। पीड़ितों ने बताया कि वेरीफाई करने के लिए उनको 10 दिन तक चक्कर कटवाए जाते हैं।
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पीड़ितों की बात
- भारतीय दिव्यांग विकास संस्था के जिलाध्यक्ष रुपेश गौतम की मांग है कि दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्रों के लिए भटकाया न जाए। ऐसी व्यवस्था की जाए कि दिव्यांग किसी भी दिन जाकर प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर सकें।
- निशांत भारती की मांग है कि प्रमाणपत्र के लिए आने वाले दिव्यांगजनों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए। उन्होंने बताया कि कई बार दिव्यांगजनों के आवेदन तक फाड़कर फेंक दिए जाते हैं, जो अच्छी बात नहीं है।
- उदय जैन का कहना है कि टीबी सेनेटोरियम में जहां दिव्यांगजनों को बिठाया जाता है वहां हवा और पानी की ठीक व्यवस्था नहीं है। दिव्यांगजन सुबह से आकर शाम तक भूखे बैठे रहते हैं, जिनके लिए कम से कम पेयजल की व्यवस्था तो की जाए।
- अंकित कश्यप का कहना है कि दिव्यांगजन शारीरिक रूप से परेशान हैं। ऐसे में उन्हें बेवजह मानसिक प्रताड़ना न दी जाए। प्रमाण पत्र सरलता के साथ बनाए जाएं। उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाए।
कुछ समस्याओं को लेकर दिव्यांगजन मिले थे। संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित कर दिया गया है। भविष्य में किसी दिव्यांग को प्रमाण पत्र बनवाने में कोई परेशानी ना आए। इसके लिए भी निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. संजीव मांगलिक, सीएमओ।
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एसबीडी जिला अस्पताल परिसर स्थित टीबी सेनेटोरियम में सोमवार को दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाए जाते हैं। दिव्यांगजनों से सुबह के समय फॉर्म भरवाए जाते हैं। दोपहर 12 बजे तक फॉर्म भरवाने के बाद उनका परीक्षण किया जाता है, जिसमें यह देखा जाता है कि व्यक्ति कितना प्रतिशत दिव्यांग हैं। मगर अक्सर यह होता है कि पैनल में शामिल सभी चिकित्सक इकट्ठा नहीं हो पाने की वजह से दिव्यांगजनों को शाम छह बजे तक इंतजार कराया जाता है। इन दिव्यांगजनों में पुरुषों के साथ ही महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहते हैं।
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वेरीफिकेशन के लिए भी भटकते हैं दिव्यांग
दिव्यांगता प्रमाणपत्र अब ऑनलाइन भी बनने लगे हैं। ऑनलाइन दिव्यांग पत्र बनवाने के बाद अभ्यर्थी को अस्पताल जाकर प्रमाणपत्र को वेरीफाई कराना होता है। पीड़ितों ने बताया कि वेरीफाई करने के लिए उनको 10 दिन तक चक्कर कटवाए जाते हैं।
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पीड़ितों की बात
- भारतीय दिव्यांग विकास संस्था के जिलाध्यक्ष रुपेश गौतम की मांग है कि दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्रों के लिए भटकाया न जाए। ऐसी व्यवस्था की जाए कि दिव्यांग किसी भी दिन जाकर प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर सकें।
- निशांत भारती की मांग है कि प्रमाणपत्र के लिए आने वाले दिव्यांगजनों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए। उन्होंने बताया कि कई बार दिव्यांगजनों के आवेदन तक फाड़कर फेंक दिए जाते हैं, जो अच्छी बात नहीं है।
- उदय जैन का कहना है कि टीबी सेनेटोरियम में जहां दिव्यांगजनों को बिठाया जाता है वहां हवा और पानी की ठीक व्यवस्था नहीं है। दिव्यांगजन सुबह से आकर शाम तक भूखे बैठे रहते हैं, जिनके लिए कम से कम पेयजल की व्यवस्था तो की जाए।
- अंकित कश्यप का कहना है कि दिव्यांगजन शारीरिक रूप से परेशान हैं। ऐसे में उन्हें बेवजह मानसिक प्रताड़ना न दी जाए। प्रमाण पत्र सरलता के साथ बनाए जाएं। उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाए।
कुछ समस्याओं को लेकर दिव्यांगजन मिले थे। संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित कर दिया गया है। भविष्य में किसी दिव्यांग को प्रमाण पत्र बनवाने में कोई परेशानी ना आए। इसके लिए भी निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. संजीव मांगलिक, सीएमओ।