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जनपद के तीन ब्लाक हाई रिस्क, मलेरिया का खतरा बढ़ा

Tue, 07 Jun 2016 12:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Tue, 07 Jun 2016 12:22 AM IST
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District three blocks of high-risk, increased risk of malaria
mosquitoe - फोटो : getty images
सहारनपुर में अच्छे मानसून की उम्मीद से भले ही लोग राहत की सांस ले रहे हो, मगर स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर बेहद चिंतित है। कारण, साफ है कि गांवों में साफ-सफाई के अभाव में मलेरिया के प्रकोप की आशंका है।
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स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में जिले के तीन ब्लाक को हाई रिस्क जोन में डाल दिया गया है। इनमें सबसे ज्यादा यमुना किनारे स्थित सौ से ज्यादा गांवों में इसके प्रकोप की आशंका जताई जा रही है।
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यही कारण है कि मलेरिया विभाग अपने ही सर्वे के बाद बेहद अलर्ट हो गया है। कारण, हर साल सहारनपुर में मलेरिया से भी कई जानें जाती हैं। ऐसे में मलेरिया की रोकथाम को लेकर नए सिरे से योजना भी बनाई जाने लगी है।
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यमुना नदी के किनारे बसे गांवों में हर साल बुखार, मलेरिया सहित इस तरह के अन्य रोगों से सैकड़ों लोगों की मौत होती है। यही कारण है बारिश की दस्तक के साथ ही एक बार फिर जल जनित रोगों का खतरा बढ़ने लगा है।

उधर, मलेरिया विभाग के प्री-मानसून सर्वे ने भी अफसरों की नींद उड़ा दी है। इसमें गंदगी के कारण सौ से ज्यादा गांवों में बरसात के पानी जमा होने और उसमें मच्छरों के प्रजनन की आशंका जताई जा गई है। 

सहारनपुर के सरसावा, गंगोह और साढ़ौली कदीम को मलेरिया विभाग के सर्वे में हाई रिस्क एरिया घोषित कर दिया गया है। इसकी पूरी रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है। इसमें इन क्षेत्रों में विशेष तैयारी के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है।

आपको बता दें कि यमुना किनारे के गांवों में नमी के चलते हर साल सैकड़ों लोग बीमार होते हैं। कई मौतें भी होती हैं और उस वक्त स्वास्थ्य विभाग कागजी खानापूर्ति में जुटा रहता है।

पिछले कुछ सालों में सहारनपुर में बुखार से मौत का आंकड़ा 500 की संख्या पार कर चुका है। अब मलेरिया विभाग के सर्वे के बाद इस बार फिर इन गांवों में बीमारी की आशंका है।

ग्रामीण इलाकों में सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ ही जलभराव को रोकना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती है। कारण, नगर पालिकाओं और ब्लाक स्तर से सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति तो गांवों में है।


मगर, कम संख्या और लापरवाही के चलते गांवों में  कूड़े का ढेर लग जाता है। बारिश के बाद इन्हीं जगहों पर मच्छरों के पनपने की आशंका रहती है। इसके अलावा जलभराव वाली जगहों पर समय से पहले एंटी लार्वा का छिड़काव भी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती होगी।
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