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राहत इंदौरी के निधन से उनके चाहने वालों में मायूसी
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शायर डॉ. नवाज देवबंदी।
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। शायर डॉ. राहत इंदौरी के निधन से उनकी शायरी के कद्रदानों, शायरों और कवियों में भी दुख की लहर है। दुख की एक वजह यह भी है कि राहत इंदौरी सहारनपुर में आयोजित अनगिनत मुशायरों में आए। अंतिम बार वह दो वर्ष पहले मेला गुघाल के तहत आयोजित मुशायरे में शामिल हुए थे। अमर उजाला ने राहत इंदौरी को लेकर सहारनपुर के कवियों और शायरों से बात कर राहत इंदौरी के साथ उनके अनुभवों के बारे में जानने का प्रयास किया।
राहत इंदौरी से प्रेरणा मिली : डॉ. नवाज देवबंदी
शायर डॉ. नवाज देवबंदी बताते हैं कि राहत इंदौरी ने उनकी पहली मुलाकात करीब 40 साल पहले 1982 में हुई थी। राहत इंदौरी देवबंद में आयोजित मुशायरे में आए थे। राहत ने नवाज देवबंदी से कहा था कि शायर बनने के लिए तीन से छह महीने चाहिए। डॉ. देवबंदी ने बताया कि उस समय उनके यह शब्द और कांधे पर हाथ रखना प्रेरणा बन गया। आज तक वह महसूस होता है। उनके साथ दुनिया के दर्जनों मुल्कों में मंच साझा किया। वह हमेशा छोटे शायरों को प्रमोट करते थे। उन्होंने राहत इंदौरी को मुशायरों की दुनिया का शहंशाह बताया। बताया कि उनकी तीन दिन पहले ही फोन पर बात हुई थी।
शायर के साथ ही बड़े इंसान भी थे राहत : राजन
गीतकार एवं वरिष्ठ कवि राजेंद्र राजन ने राहत इंदौरी के निधन को उर्दू जगत के लिए बड़ी क्षति बताया है। उनका कहना है कि राहत के जाने से मुशायरों की रौनत चली गई है। राजन का कहना है कि राहत इंदौरी जितने बड़े शायर थे। उतने ही बड़े इंसान भी थे। उनके साथ हिंदी कवि सम्मेलनों और उर्दू मुशायरों में कई बार शिरकत की। वो हिंदी और उर्दू दोनों ही भाषाओं के चाहने वालों के अजीज थे।
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शायरी से सिस्टम पर चोट करते थे : डॉ. शाद
शायर डॉ. नदीम शाद का कहना है कि राहत इंदौरी अपनी शाहरी में हमेशा हौसलों की बात करते थे। यदि उन्हें किसी से नाराजगी होती थी तो दिल में नहीं रखते थे। सरकारों और सिस्टम में खामियों पर भी उन्होंने चोट की। मुशायरों में नेताओं के मुंह पर ही अपनी शायरी के माध्यम से सब बात कह देते थे। उनका कहना है कि राहत इंदौरी की कमी हमेशा खलेगी।
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राहत इंदौरी से प्रेरणा मिली : डॉ. नवाज देवबंदी
शायर डॉ. नवाज देवबंदी बताते हैं कि राहत इंदौरी ने उनकी पहली मुलाकात करीब 40 साल पहले 1982 में हुई थी। राहत इंदौरी देवबंद में आयोजित मुशायरे में आए थे। राहत ने नवाज देवबंदी से कहा था कि शायर बनने के लिए तीन से छह महीने चाहिए। डॉ. देवबंदी ने बताया कि उस समय उनके यह शब्द और कांधे पर हाथ रखना प्रेरणा बन गया। आज तक वह महसूस होता है। उनके साथ दुनिया के दर्जनों मुल्कों में मंच साझा किया। वह हमेशा छोटे शायरों को प्रमोट करते थे। उन्होंने राहत इंदौरी को मुशायरों की दुनिया का शहंशाह बताया। बताया कि उनकी तीन दिन पहले ही फोन पर बात हुई थी।
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शायर के साथ ही बड़े इंसान भी थे राहत : राजन
गीतकार एवं वरिष्ठ कवि राजेंद्र राजन ने राहत इंदौरी के निधन को उर्दू जगत के लिए बड़ी क्षति बताया है। उनका कहना है कि राहत के जाने से मुशायरों की रौनत चली गई है। राजन का कहना है कि राहत इंदौरी जितने बड़े शायर थे। उतने ही बड़े इंसान भी थे। उनके साथ हिंदी कवि सम्मेलनों और उर्दू मुशायरों में कई बार शिरकत की। वो हिंदी और उर्दू दोनों ही भाषाओं के चाहने वालों के अजीज थे।
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शायरी से सिस्टम पर चोट करते थे : डॉ. शाद
शायर डॉ. नदीम शाद का कहना है कि राहत इंदौरी अपनी शाहरी में हमेशा हौसलों की बात करते थे। यदि उन्हें किसी से नाराजगी होती थी तो दिल में नहीं रखते थे। सरकारों और सिस्टम में खामियों पर भी उन्होंने चोट की। मुशायरों में नेताओं के मुंह पर ही अपनी शायरी के माध्यम से सब बात कह देते थे। उनका कहना है कि राहत इंदौरी की कमी हमेशा खलेगी।

कवि राजेंद्र राजन।- फोटो : SAHARANPUR

शायर नदीम शाद- फोटो : SAHARANPUR