{"_id":"60f718df8ebc3e6d8e5cb301","slug":"dilapidated-building-accident-can-happen-anytime-saharanpur-news-mrt54828401","type":"story","status":"publish","title_hn":"जर्जर भवन, कभी हो सकता है हादसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जर्जर भवन, कभी हो सकता है हादसा
विज्ञापन
ुराने शहर स्थित जर्जर इमारते
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जिले भर के कई इलाकों और पुराने शहर में बारिश के बीच जर्जर भवनों से हादसों का खतरा बना है। पहले भी कई बार हादसे हो चुके हैं। प्रशासन की ओर से इन भवनों को चिह्नित कर नोटिस भी दिए गए, लेकिन न भवन खाली हो पाए और न ही इन्हें ठीक कराया गया।
इन दिनों बारिश का सीजन चल रहा है। महानगर में 150 से अधिक ऐसे जर्जर भवन हैं, जो बारिश की वजह से कभी भी गिर सकते हैं। शहर में मोहल्ला छत्ता जंबूदास, रानी बाजार, दीनानाथ बाजार, हलवाई हट्टा, मोरगंज बाजर, हिरनमारान, बड़तला यादगार, कंबोह का पुल, ढोलीखाल सहित कई जगहों पर जर्जर भवनों में परिवार रहते हैं। पूर्व में कई बार घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन घटना के बाद ही सरकारी तंत्र सतर्कता दिखाता है और लोगों को मकान खाली करने या ठीक कराने को नोटिस दिया जाता है, लेकिन मानसून के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इसी तरह देहात क्षेत्रों देवबंद, रामपुर मनिहारान, बेहट, नकुड़ और गंगोह में भी कुछ मोहल्लों में जर्जर भवन है। ऐसे लापरवाही कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है।
कब्जा जमाए रखने को नहीं छोड़ते घर
प्रशासन और नगर निगम ने चार साल पहले भवनों को चिह्नित करने के साथ ही उनमें रह रहे लोगों से वार्ता भी की थी। ज्यादातर भवनों पर अधिकार का विवाद है। इसके अलावा कई भवनों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। यही वजह है कि जो लोग उनमें रह रहे हैं, वह कब्जा छोड़ना नहीं चाहते हैं।
विज्ञापन
बीते वर्षों में हो चुुकी हैं घटनाएं
-- रानी बाजार में एक जर्जर भवन के गिरने से मां-बेटे की दबकर मौत हुई थी।
-- हिरनमारान में जर्जर भवन के गिरने से तीन मजदूरों की दबकर मौत हो गई थी।
-- हिरनमारान में पुुराने भवन का एक हिस्सा गिर जाने से कई लोग दब गए थे। एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी।
-- मानकमऊ में एक मकान की छत गिरने से तीन भाई और बहनों की मौत हो गई थी।
जर्जर भवनों को खाली कराने के लिए समय-समय पर कार्रवाई होती है। कुछ मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, जिस वजह से प्रशासन को दिक्कत आती है। फिर भी पूरा प्रयास रहता है किसी तरह का हादसा न हो, इसके लिए लोगों को भी जागरूक किया जाता है।
- अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी
विज्ञापन
इन दिनों बारिश का सीजन चल रहा है। महानगर में 150 से अधिक ऐसे जर्जर भवन हैं, जो बारिश की वजह से कभी भी गिर सकते हैं। शहर में मोहल्ला छत्ता जंबूदास, रानी बाजार, दीनानाथ बाजार, हलवाई हट्टा, मोरगंज बाजर, हिरनमारान, बड़तला यादगार, कंबोह का पुल, ढोलीखाल सहित कई जगहों पर जर्जर भवनों में परिवार रहते हैं। पूर्व में कई बार घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन घटना के बाद ही सरकारी तंत्र सतर्कता दिखाता है और लोगों को मकान खाली करने या ठीक कराने को नोटिस दिया जाता है, लेकिन मानसून के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इसी तरह देहात क्षेत्रों देवबंद, रामपुर मनिहारान, बेहट, नकुड़ और गंगोह में भी कुछ मोहल्लों में जर्जर भवन है। ऐसे लापरवाही कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है।
विज्ञापन
कब्जा जमाए रखने को नहीं छोड़ते घर
प्रशासन और नगर निगम ने चार साल पहले भवनों को चिह्नित करने के साथ ही उनमें रह रहे लोगों से वार्ता भी की थी। ज्यादातर भवनों पर अधिकार का विवाद है। इसके अलावा कई भवनों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। यही वजह है कि जो लोग उनमें रह रहे हैं, वह कब्जा छोड़ना नहीं चाहते हैं।
विज्ञापन
बीते वर्षों में हो चुुकी हैं घटनाएं
-- रानी बाजार में एक जर्जर भवन के गिरने से मां-बेटे की दबकर मौत हुई थी।
-- हिरनमारान में जर्जर भवन के गिरने से तीन मजदूरों की दबकर मौत हो गई थी।
-- हिरनमारान में पुुराने भवन का एक हिस्सा गिर जाने से कई लोग दब गए थे। एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी।
-- मानकमऊ में एक मकान की छत गिरने से तीन भाई और बहनों की मौत हो गई थी।
जर्जर भवनों को खाली कराने के लिए समय-समय पर कार्रवाई होती है। कुछ मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, जिस वजह से प्रशासन को दिक्कत आती है। फिर भी पूरा प्रयास रहता है किसी तरह का हादसा न हो, इसके लिए लोगों को भी जागरूक किया जाता है।
- अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी

पुराने शहर स्थित जर्जर इमारते- फोटो : SAHARANPUR

पुराने शहर स्थित जर्जर इमारते- फोटो : SAHARANPUR

पुराने शहर स्थित जर्जर इमारते- फोटो : SAHARANPUR

पुराने शहर स्थित जर्जर इमारते- फोटो : SAHARANPUR

पुराने शहर स्थित जर्जर इमारते- फोटो : SAHARANPUR