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ढिक्का टपरी को दिवाली पर मिलेगा बिजली का तोहफा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 24 Oct 2015 11:38 PM IST
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यमुना पार हरियाणा से सटा जनपद का गांव ढिक्का टपरी पहली बार दीपावली पर बिजली से रोशन होगा। जी हां! यह ऐसा गांव है, जहां आजादी के 68 साल बाद भी बिजली की चमक नहीं पहुंची थी। अमर उजाला ने गांव के 700 परिवारों के इस दर्द को उठाया था। इसके बाद जिले के अफसरों ने गांव की सुध ली है।
गांव के विद्युतीकरण के लिए यूपी के पावर कारपोरेशन ने हरियाणा से समझौता किया है। इसके बाद गांव में विद्युतीकरण का कार्य शुरू हो चुका है। आजादी से अब तक कई साल अंधेरे में गुजारने के बाद बिजली मिलने की उम्मीद से ग्रामीण गदगद हैं। इसके लिए अमर उजाला की ओर से किए गए प्रयासों पर ग्रामीणों ने धन्यवाद किया है।
बता दें कि अमर उजाला ने 26 सितंबर के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। गांव ढिक्का टपरी के यमुना पार बसे होने के कारण गांव के विद्युतीकरण के लिए भौगोलिक समस्या आड़े आ रही थी। आजादी के बाद से ही ग्रामीण गांव में बिजली देने की मांग करते आ रहे थे। इसके लिए उन्होंने ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, विधायक, सांसद तथा मंत्रियों तक से गुहार लगाई थी।
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कई बार जिला मुख्यालय पर भी प्रदर्शन कर बिजली के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया गया, मगर उनकी मांग को हमेशा अनदेखा कर दिया गया। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहारनपुर पहुंचे थे। उनके समक्ष भी ग्रामीणों ने अपनी समस्या रखी थी। उनकी बात को अनसुना कर दिया गया।
इसके बाद अमर उजाला की टीम 25 सितंबर 2015 को गांव में पहुंची तथा लोगों का दर्द जानने के बाद 26 सितंबर के अंक में समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद जिला प्रशासन की नींद टूटी। गांव में विद्युतीकरण के कार्य ने रफ्तार पकड़ी। यूपी पावर कारपोरेशन के अफसरों ने हरियाणा के अधिकारियों के साथ एक समझौता कर गांव में बिजली आपूर्ति के लिए काम शुरू कराया।
ग्रामीणों ने जताया अमर उजाला का आभार
सहारनपुर। गांव ढिक्का टपरी में विद्युतीकरण का काम शुरू होने के बाद हर कोई उत्साहित है। काम शुरू होने के बाद जैसे ही अमर उजाला की टीम शनिवार को गांव पहुंची तो ग्रामीण गदगद नजर आए। कई लोगों ने कहा कि विद्युतीकरण के लिए अमर उजाला के प्रयासों को हमेशा याद रखेंगे। छात्र रणधीर सिंह ने बताया कि गांव में बिजली न होने की वजह से गांव के छात्र पढ़ाई में शत प्रतिशत मेहनत नहीं कर पा रहे हैं।
अब बिजली मिलेगी तो वह रात में भी पढ़ाई कर सकेंगे। प्रदीप और सुग्घन ने कहा कि आजादी के 68 साल बाद भी गांव में बिजली न होना एक अभिशाप था। जब से गांव में विद्युतीकरण काम शुरू हुआ है, तब से मन में अलग तरह की खुशी छाई हुई है। अब हम भी पंखों और कूलर की हवा में सो सकेंगे। फ्रिज और टीवी का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। चुहड़ सिंह, विजय कुमार और धीरज ने गांव में विद्युतीकरण का काम शुरू होने के लिए अमर उजाला का धन्यवाद किया।
70 वर्षीय चमेली का कहना है कि वह अपने जीते गांव में बिजली आने की उम्मीद छोड़ चुकी थी। संतोष और सत्या देवी ने बताया कि गांव में बिजली न होने की वजह से कोई भी अपनी बेटी की शादी गांव के युवकों से नहीं करना चाहता था। अब ऐसा नहीं होगा। बीए कर रही सोनिया का कहना है कि बिजली न होने की वजह से गांव पिछड़ा हुआ था। बिजली मिलने से पिछड़ापन काफी हद तक दूर हो सकेगा।
700 में से 500 परिवार कनेक्शन को आगे आएं
गांव के कुल 700 में से करीब 500 परिवार बिजली का कनेक्शन लेने के लिए आगे आए हैं। अफसरों ने ग्रामीणों को दिवाली से पहले गांव के विद्युतीकरण का कार्य कंपलीट कर आपूर्ति चालू कर देने का आश्वासन दिया है। ऐसे में ग्रामीण पहली बार बिजली की रोशनी में दिवाली मनाने का सपना देख रहे हैं जो हकीकत में बदलता नजर आ रहा है।
हरियाणा से खरीदकर दी जाएगी बिजली
यमुना नदी की वजह से उत्तर प्रदेश विद्युत निगम गांव ढिक्का टपरी को बिजली भेज पाने में असमर्थ है। यदि सहारनपुर से गांव को बिजली दी जाए तो यमुना के बीच में टावर आदि लगाने में तीन से चार करोड़ रुपये का खर्च बैठता है। एक गांव के विद्युतीकरण के लिए ऐसा कर पाना निगम के लिए संभव नहीं है।
ऐसे में विद्युत निगम ने हरियाणा से बिजली खरीदकर गांव को देने का निर्णय लिया है। हरियाणा से बिजली खरीदकर यूपी कारपोरेशन बिजली उपलब्ध कराएगा। इसमें ग्रामीण बिजली तो हरियाणा की खर्च करेंगे, मगर बिल उत्तर प्रदेश को चुकाएंगे।
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गांव के विद्युतीकरण के लिए यूपी के पावर कारपोरेशन ने हरियाणा से समझौता किया है। इसके बाद गांव में विद्युतीकरण का कार्य शुरू हो चुका है। आजादी से अब तक कई साल अंधेरे में गुजारने के बाद बिजली मिलने की उम्मीद से ग्रामीण गदगद हैं। इसके लिए अमर उजाला की ओर से किए गए प्रयासों पर ग्रामीणों ने धन्यवाद किया है।
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बता दें कि अमर उजाला ने 26 सितंबर के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। गांव ढिक्का टपरी के यमुना पार बसे होने के कारण गांव के विद्युतीकरण के लिए भौगोलिक समस्या आड़े आ रही थी। आजादी के बाद से ही ग्रामीण गांव में बिजली देने की मांग करते आ रहे थे। इसके लिए उन्होंने ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, विधायक, सांसद तथा मंत्रियों तक से गुहार लगाई थी।
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कई बार जिला मुख्यालय पर भी प्रदर्शन कर बिजली के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया गया, मगर उनकी मांग को हमेशा अनदेखा कर दिया गया। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहारनपुर पहुंचे थे। उनके समक्ष भी ग्रामीणों ने अपनी समस्या रखी थी। उनकी बात को अनसुना कर दिया गया।
इसके बाद अमर उजाला की टीम 25 सितंबर 2015 को गांव में पहुंची तथा लोगों का दर्द जानने के बाद 26 सितंबर के अंक में समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद जिला प्रशासन की नींद टूटी। गांव में विद्युतीकरण के कार्य ने रफ्तार पकड़ी। यूपी पावर कारपोरेशन के अफसरों ने हरियाणा के अधिकारियों के साथ एक समझौता कर गांव में बिजली आपूर्ति के लिए काम शुरू कराया।
ग्रामीणों ने जताया अमर उजाला का आभार
सहारनपुर। गांव ढिक्का टपरी में विद्युतीकरण का काम शुरू होने के बाद हर कोई उत्साहित है। काम शुरू होने के बाद जैसे ही अमर उजाला की टीम शनिवार को गांव पहुंची तो ग्रामीण गदगद नजर आए। कई लोगों ने कहा कि विद्युतीकरण के लिए अमर उजाला के प्रयासों को हमेशा याद रखेंगे। छात्र रणधीर सिंह ने बताया कि गांव में बिजली न होने की वजह से गांव के छात्र पढ़ाई में शत प्रतिशत मेहनत नहीं कर पा रहे हैं।
अब बिजली मिलेगी तो वह रात में भी पढ़ाई कर सकेंगे। प्रदीप और सुग्घन ने कहा कि आजादी के 68 साल बाद भी गांव में बिजली न होना एक अभिशाप था। जब से गांव में विद्युतीकरण काम शुरू हुआ है, तब से मन में अलग तरह की खुशी छाई हुई है। अब हम भी पंखों और कूलर की हवा में सो सकेंगे। फ्रिज और टीवी का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। चुहड़ सिंह, विजय कुमार और धीरज ने गांव में विद्युतीकरण का काम शुरू होने के लिए अमर उजाला का धन्यवाद किया।
70 वर्षीय चमेली का कहना है कि वह अपने जीते गांव में बिजली आने की उम्मीद छोड़ चुकी थी। संतोष और सत्या देवी ने बताया कि गांव में बिजली न होने की वजह से कोई भी अपनी बेटी की शादी गांव के युवकों से नहीं करना चाहता था। अब ऐसा नहीं होगा। बीए कर रही सोनिया का कहना है कि बिजली न होने की वजह से गांव पिछड़ा हुआ था। बिजली मिलने से पिछड़ापन काफी हद तक दूर हो सकेगा।
700 में से 500 परिवार कनेक्शन को आगे आएं
गांव के कुल 700 में से करीब 500 परिवार बिजली का कनेक्शन लेने के लिए आगे आए हैं। अफसरों ने ग्रामीणों को दिवाली से पहले गांव के विद्युतीकरण का कार्य कंपलीट कर आपूर्ति चालू कर देने का आश्वासन दिया है। ऐसे में ग्रामीण पहली बार बिजली की रोशनी में दिवाली मनाने का सपना देख रहे हैं जो हकीकत में बदलता नजर आ रहा है।
हरियाणा से खरीदकर दी जाएगी बिजली
यमुना नदी की वजह से उत्तर प्रदेश विद्युत निगम गांव ढिक्का टपरी को बिजली भेज पाने में असमर्थ है। यदि सहारनपुर से गांव को बिजली दी जाए तो यमुना के बीच में टावर आदि लगाने में तीन से चार करोड़ रुपये का खर्च बैठता है। एक गांव के विद्युतीकरण के लिए ऐसा कर पाना निगम के लिए संभव नहीं है।
ऐसे में विद्युत निगम ने हरियाणा से बिजली खरीदकर गांव को देने का निर्णय लिया है। हरियाणा से बिजली खरीदकर यूपी कारपोरेशन बिजली उपलब्ध कराएगा। इसमें ग्रामीण बिजली तो हरियाणा की खर्च करेंगे, मगर बिल उत्तर प्रदेश को चुकाएंगे।