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सुलग रहे सहारनपुर का ताप भांप कर गए डीजीपी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 08 May 2017 12:47 AM IST
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प्रमुख सचिव और डीजीपी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में जातीय हिंसा से सुलग रहे सहारनपुर की ताप भांपने को प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी सहारनपुर पहुंचे थे। करीब चार घंटे के अपने दौरे में दबाव में काम करने वाली पुलिस की छवि को बदलने की पूरी कोशिश की।
प्रदेश सरकार भी पक्षपात के लिए बदनाम पूर्व हुकूमतों से इतर बिना दबाव के प्रशासन के काम का संकेत देना चाहती है। यही कारण है कि शब्बीरपुर बवाल के तीन दिन बाद ही प्रमुख सचिव और डीजीपी को भेजकर निष्पक्ष कार्रवाई का संदेश भी दिया गया।
सभी राजनीतिक दलों से बिना भेदभाव बातचीत के जरिए ना सिर्फ इन बवालों पर होने वाली सियासतों को थामने की कोशिश हुई। इसके अलावा सुलग रहे सहारनपुर से सोशल पुलिसिंग की शुरुआत कर इसे प्रदेश भर में लागू करने की कवायद पर मंथन हुआ है।
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प्रदेश में सरकार गठन के करीब डेढ़ महीने में सहारनपुर में दो बार सुलग गया। इन बवालों में भाजपा नेताओं पर लग रहे आरोप के चलते सरकार तक इसकी आंच पहुंच रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार ऐसे बवालों को किसी कीमत पर नहीं होने देना चाहती है।
इसी वजह से प्रदेश सरकार ना सिर्फ सहारनपुर में बल्कि वहां के कारणों को जानकार पूरे प्रदेश में ऐसे बवालों को होने से पहले ही थामना चाहती है। ताकि आगे इस प्रकार की घटनाएं सामने नहीं आ सके।
बता दें कि मौजूदा हालात में ही यूपी पुलिस के मुखिया को मैदान में उतरना पड़ा है। सहारनपुर पहुंचे डीजीपी ने अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोगों से फीडबैक लेकर जमीनी स्तर पर चल रहे उथल-पुथल की नब्ज टटोली। यही कारण है कि प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के मुद्दों को खुद डीजीपी नोट करते रहे।
आपको बता दें कि सड़क दूधली प्रकरण में सांसद और विधायकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर प्रशासन ने बिना दबाव और निष्पक्षता का संकेत दिया था। जबकि इससे पहले मुजफ्फरनगर और सहारनपुर दंगों में प्रदेश सरकार पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगे थे।
प्रमुख सचिव और डीजीपी के दौरे से एक बात का साफ संकेत दिया गया है कि हाकिमों पर हुकूमत का दबाव नहीं है और अधिकारियों को निष्पक्ष कार्रवाई का संकेत दिया गया है।
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प्रदेश सरकार भी पक्षपात के लिए बदनाम पूर्व हुकूमतों से इतर बिना दबाव के प्रशासन के काम का संकेत देना चाहती है। यही कारण है कि शब्बीरपुर बवाल के तीन दिन बाद ही प्रमुख सचिव और डीजीपी को भेजकर निष्पक्ष कार्रवाई का संदेश भी दिया गया।
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सभी राजनीतिक दलों से बिना भेदभाव बातचीत के जरिए ना सिर्फ इन बवालों पर होने वाली सियासतों को थामने की कोशिश हुई। इसके अलावा सुलग रहे सहारनपुर से सोशल पुलिसिंग की शुरुआत कर इसे प्रदेश भर में लागू करने की कवायद पर मंथन हुआ है।
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प्रदेश में सरकार गठन के करीब डेढ़ महीने में सहारनपुर में दो बार सुलग गया। इन बवालों में भाजपा नेताओं पर लग रहे आरोप के चलते सरकार तक इसकी आंच पहुंच रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार ऐसे बवालों को किसी कीमत पर नहीं होने देना चाहती है।
इसी वजह से प्रदेश सरकार ना सिर्फ सहारनपुर में बल्कि वहां के कारणों को जानकार पूरे प्रदेश में ऐसे बवालों को होने से पहले ही थामना चाहती है। ताकि आगे इस प्रकार की घटनाएं सामने नहीं आ सके।
बता दें कि मौजूदा हालात में ही यूपी पुलिस के मुखिया को मैदान में उतरना पड़ा है। सहारनपुर पहुंचे डीजीपी ने अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोगों से फीडबैक लेकर जमीनी स्तर पर चल रहे उथल-पुथल की नब्ज टटोली। यही कारण है कि प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के मुद्दों को खुद डीजीपी नोट करते रहे।
आपको बता दें कि सड़क दूधली प्रकरण में सांसद और विधायकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर प्रशासन ने बिना दबाव और निष्पक्षता का संकेत दिया था। जबकि इससे पहले मुजफ्फरनगर और सहारनपुर दंगों में प्रदेश सरकार पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगे थे।
प्रमुख सचिव और डीजीपी के दौरे से एक बात का साफ संकेत दिया गया है कि हाकिमों पर हुकूमत का दबाव नहीं है और अधिकारियों को निष्पक्ष कार्रवाई का संकेत दिया गया है।