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Saharanpur News: नगर निगम बोर्ड के पांच साल

Thu, 05 Jan 2023 11:44 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jan 2023 11:44 PM IST
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Development in the city, outer colonies in bad shape
नगर निगम महापौर कार्यालय - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। नगर निगम बोर्ड के पांच साल आज पूर्ण हो गए हैं। महापौर संजीव वालिया के नेतृत्व में इन पांच साल में एक ओर जहां शहर की पुरानी कॉलोनियों में विकास कार्य हुए हैं, वहीं 32 गांव समेत बाहरी कॉलोनियों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। बाहरी कॉलोनियों की जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है। अनेक कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां सड़क और नालियां तक नहीं हैं।
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नगर निगम का दावा है कि महानगर की चौड़ी और सुंदर सड़कें दी गई हैं, जिनमें दिल्ली रोड, टीपी नगर रोड, बेहट रोड, देहरादून रोड, अंबाला रोड आदि शामिल हैं, लेकिन बाहरी कॉलोनियों की गलियां तक कच्ची हैं। यह भी एक हकीकत है। पांच साल में महानगर की सफाई व्यवस्था सुधरी है। 142 डलावघरों में से 100 से अधिक डलावघर खत्म किए गए हैं। 10 से अधिक एमआरएफ सेंटर बनाए गए हैं। कचरा निस्तारण के लिए बेहट रोड पर 100 बीघा से अधिक भूमि खरीदी गई है। लेकिन बाहरी कॉलोनियों में नए डलावघर बन गए हैं, जिनकी गिनती नहीं है।
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बाहरी कॉलोनियों तक पेयजल की लाइनें बिछाई गई हैं। हजारों घरों में नए कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन दूसरा पहलू यह भी है कि जिन कॉलोनियों में तीन साल पहले लाइन बिछाई जा चुकी है। बीते एक साल से पेयजल आपूर्ति जारी दिखाई जा रही है, वहां के नलों में अभी तक पानी नहीं पहुंचा है। वार्ड आठ के गांव ज्ञानागढ़ और बिशनपुर ऐसे ही हैं, जहां नलों के हलक सूखे हैं।
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निगम का दावा है कि 50 हजार से अधिक नए भवनों को कर के दायरे में लाया गया है, लेकिन सच यह है कि निगम की कमाई फिर भी नहीं बढ़ी है। जनमंच प्रेक्षागृह के जीर्णोद्घार पर वाहवाही ली जा रही है, लेकिन जनमंच के जीर्णोद्घार पर पांच साल में दो बार दो-दो करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की गई। उसके बाद भी जनमंच की छत से पानी टपकता है। बाहरी कॉलोनियों और 32 गांवों में नालों की हालत खराब है। कलसिया रोड से सटी मुस्लिम आबादी की कॉलोनियों में सड़क और नालियां तक नहीं हैं। आईटीसी रोड क्षेत्र में नंदपुरी, रामविहार कॉलोनी सहित करीब एक दर्जन कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बिन बारिश भी जलभराव रहता है, जिसके कारण लोग पलायन कर गए हैं।
स्मार्ट सिटी में चयन हुआ, लेकिन परियोजनाएं लटकी
बोर्ड बनने के बाद ही नगर निगम सहारनपुर का चयन स्मार्ट सिटी योजना के लिए हुआ था। इसके लिए भी बोर्ड में शामिल महापौर और अन्य अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। स्मार्ट सिटी में सहारनपुर के चयन को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन तमाम परियोजनाएं अभी तक लटकी हुई हैं। जबकि कईं परियोजनाएं ऐसी हैं, जिन पर अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है।
बोर्ड बैठक के लिए सभागार तक नहीं बना
पांच साल में नगर निगम ने अरबों रुपये के विकास कार्य कराए हैं, लेकिन नगर निगम, बोर्ड बैठक के लिए सभागार तक नहीं बना सका है। पार्षदों के बैठने तक के लिए कोई जगह नहीं हैं। बीते पांच साल में कभी जनमंच, कभी आईटीसी सभागार, कभी सर्किट हाउस में बैठकें कराई गई हैं।
निगम का खजाना खाली
नगर निगम बोर्ड के पांच साल के कार्यकाल में नगर निगम का खजाना भी खाली हुआ है। आय के श्रोत नहीं बढ़ाए जाने और खर्च अधिक करने के पीछे खराब मैनेजमेंट रहा। नतीजा, निगम का खजाना खाली हो गया। वर्तमान में नगर निगम पर करीब 42 करोड़ रुपये की देनदारी है। काम करा चुके ठेकेदार पैसे के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। बीते करीब एक साल से नया कोई टेंडर नहीं हुआ है। वर्तमान में सफाई व्यवस्था बनाने के लिए भी स्मार्ट सिटी योजना से 24 करोड़ रुपये लिए गए हैं।

पांच साल के कार्यकाल में हमने निष्पक्ष रूप से विकास कार्य कराए हैं। पांच साल पहले के सहारनपुर की तस्वीर को वर्तमान की तस्वीर से तुलना करें तो बदलाव अपने आप नजर आ जाएगा। रही बात कुछ कार्यों के रह जाने की तो पांच साल में सर्वांगीण विकास करना संभव नहीं होता है, लेकिन मैंने प्रयास किया है कि लोगों को बुनियादी सुविधाएं दी जा सकें।
संजीव वालिया, महापौर।

स्मार्ट सिटी नगर निगम

स्मार्ट सिटी नगर निगम- फोटो : SAHARANPUR

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