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देवबंद : यूपी की जनसंख्या नियंत्रण नीति के पक्ष में नहीं उलमा, बोले - यह इंसानी हकूक के खिलाफ
Mon, 12 Jul 2021 07:04 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर/देवबंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर/देवबंद
Published by: Dimple Sirohi
Updated Mon, 12 Jul 2021 07:04 PM IST
सार
दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम अबुल कासिम नोमानी का कहना है कि वैसे तो यह कोर्ट का मामला है, इसमें हम ज्यादा कुछ नहीं कह सकते हैं, लेकिन यदि समान नागरिक संहिता लागू होती है तो इससे मुल्क की एकता को धक्का लगेगा
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मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार की नई जनसंख्या नीति को दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने इंसानी हकूक (मानवाधिकार) के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि जिनके दो से अधिक बच्चें होंगे उन्हें सरकार की सुविधाओं से वंचित किए जाने की घोषणा उन बच्चों के साथ नाइंसाफी है।
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इससे पहले उलमा ने समान नागरिक संहिता लागू करने के पक्ष में भी उलमा नहीं दिखे। समान नागरिक संहिता को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही थी तो अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इसे लागू करने का सही वक्त कहा है। उलमा की तरफ से समान नागरिक संहिता का विरोध होता आया है। अब भी वह इसी बात पर कायम हैं और कहते हैं कि यदि समान नागरिक संहिता लागू हुई तो इससे देश की एकता को धक्का लगेगा।
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विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम अबुल कासिम नोमानी का कहना है कि वैसे तो यह कोर्ट का मामला है, इसमें हम ज्यादा कुछ नहीं कह सकते हैं, लेकिन यदि समान नागरिक संहिता लागू होती है तो इससे मुल्क की एकता को धक्का लगेगा, क्योंकि यह किसी भी लिहाज से सही नहीं है।
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वहीं, फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुखी कहते हैं कि समान नागरिक संहिता को देश का कोई भी वर्ग कबूल नहीं करेगा, क्योंकि यह एक लिबास की तरह है और देश के सभी लोगों ने एक जैसा लिबास पहन लिया हो, इसलिए यह ठीक नहीं है।