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दारुल उलूम : एक पेड़ की छांव में लिखी गई थी तालीम की इबारत
Fri, 30 May 2025 12:37 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 30 May 2025 12:37 AM IST
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देवबंद। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद की शुरुआत 158 वर्ष पूर्व एक अनार के पेड़ के नीचे हुई, जो आज पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है। इसकी खास बात यह थी कि उस समय इसके पहले उस्ताद (शिक्षक) मौलाना महमूद (मुल्ला महमूद) और पहले शार्गिद (छात्र) मौलाना महमूद (शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी) एक ही नाम के रहे। धार्मिक शिक्षा देने के साथ ही दारुल उलूम ने जंग-ए-आजादी में भी विशेष भूमिका निभाई है।
इसलिए रखी गई थी नींव
वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की विफलता के बाद भारतीय मुसलमानों की धार्मिक, शैक्षिक और राजनीतिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी। इसके बाद दारुल उलूम के शिक्षकों और विद्वानों ने ब्रिटिशराज के खिलाफ संगठित आंदोलनों का नेतृत्व किया। इसमें सबसे प्रमुख रेशमी रुमाल आंदोलन था। इसके चलते आज ही के दिन 30 मई 1866 को दारुल उलूम की नींव रखी गई थी। दारुल उलूम ने डेढ़ सदी से भी अधिक यानी लगभग 158 वर्षों का शानदार सफर तय किया है। दारुल उलूम की शैक्षिक प्रणाली दरस निजामी (नियमित अध्ययन) पर आधारित थी। इसमें कुरान, हदीस, फिक्ह, तफसीर, अरबी साहित्य जैसे विषय शामिल थे। यहां फिलहाल साढ़े चार हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं।
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कुछ चर्चित फतवे, जिनसे सुर्खियों में रहा दारुल उलूम
मुस्लिम महिलाओं को नेल पॉलिश नहीं लगाना चाहिए। बताया गया था कि महिलाओं को नाखून पर नेल पॉलिश की बजाए मेहंदी का इस्तेमाल करना चाहिए। तर्क दिया गया था कि नेल पॉलिश गैर-इस्लामिक और अवैध है। इसके बाद एक अन्य फतवे में कहा गया कि मुस्लिम महिलाओं को आईब्रो नहीं बनवाना चाहिए। फतवे में कहा गया कि आईब्रो बनवाना, वैक्सिंग करवाना या फिर बाल कटवाना गैर इस्लामिक है। वर्ष 2018 में जारी एक फतवे में कहा गया था कि जब कोई औरत घर से बाहर निकलती है तो शैतान उसे घूरता है। कई अन्य फतवे रहे, जिन्हें लेकर दारुल उलूम चर्चाओं में रहा।
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यह बोले मोहतमिम
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि दारुल उलूम अपने कयाम (स्थापना) के समय से लेकर आज तक कभी भटका नहीं। यह इदारा बिना किसी सरकारी मदद के चलता है और आगे भी कौम के चंदे पर चलता रहेगा।
दारुल उलूम के अब तक के मोहतमिम
नाम कार्यकाल
1. हाजी सैयद मोहम्मद आबिद हुसैन- 10 वर्ष
2. मौलाना रफ़ीउद्दीन - 19 वर्ष
3. हाजी फजलहक़ - 1 वर्ष
4. मौलाना मुनीर नानौतवी - डेढ़ वर्ष
5. मौलाना हाफिज मोहम्मद अहमद- 34 वर्ष
6. मौलाना हबीब-उर-रहमान उस्मानी- कुछ वर्ष
7. मौलाना कारी मोहम्मद तैय्यब- 52 वर्ष
8. मौलाना मरगूब-उर-रहमान बिजनौरी- 32 वर्ष
9. मौलाना गुलाम वस्तानवी- 7 माह
10. मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी- 2011 से लगातार
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इसलिए रखी गई थी नींव
वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की विफलता के बाद भारतीय मुसलमानों की धार्मिक, शैक्षिक और राजनीतिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी। इसके बाद दारुल उलूम के शिक्षकों और विद्वानों ने ब्रिटिशराज के खिलाफ संगठित आंदोलनों का नेतृत्व किया। इसमें सबसे प्रमुख रेशमी रुमाल आंदोलन था। इसके चलते आज ही के दिन 30 मई 1866 को दारुल उलूम की नींव रखी गई थी। दारुल उलूम ने डेढ़ सदी से भी अधिक यानी लगभग 158 वर्षों का शानदार सफर तय किया है। दारुल उलूम की शैक्षिक प्रणाली दरस निजामी (नियमित अध्ययन) पर आधारित थी। इसमें कुरान, हदीस, फिक्ह, तफसीर, अरबी साहित्य जैसे विषय शामिल थे। यहां फिलहाल साढ़े चार हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं।
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कुछ चर्चित फतवे, जिनसे सुर्खियों में रहा दारुल उलूम
मुस्लिम महिलाओं को नेल पॉलिश नहीं लगाना चाहिए। बताया गया था कि महिलाओं को नाखून पर नेल पॉलिश की बजाए मेहंदी का इस्तेमाल करना चाहिए। तर्क दिया गया था कि नेल पॉलिश गैर-इस्लामिक और अवैध है। इसके बाद एक अन्य फतवे में कहा गया कि मुस्लिम महिलाओं को आईब्रो नहीं बनवाना चाहिए। फतवे में कहा गया कि आईब्रो बनवाना, वैक्सिंग करवाना या फिर बाल कटवाना गैर इस्लामिक है। वर्ष 2018 में जारी एक फतवे में कहा गया था कि जब कोई औरत घर से बाहर निकलती है तो शैतान उसे घूरता है। कई अन्य फतवे रहे, जिन्हें लेकर दारुल उलूम चर्चाओं में रहा।
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यह बोले मोहतमिम
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि दारुल उलूम अपने कयाम (स्थापना) के समय से लेकर आज तक कभी भटका नहीं। यह इदारा बिना किसी सरकारी मदद के चलता है और आगे भी कौम के चंदे पर चलता रहेगा।
दारुल उलूम के अब तक के मोहतमिम
नाम कार्यकाल
1. हाजी सैयद मोहम्मद आबिद हुसैन- 10 वर्ष
2. मौलाना रफ़ीउद्दीन - 19 वर्ष
3. हाजी फजलहक़ - 1 वर्ष
4. मौलाना मुनीर नानौतवी - डेढ़ वर्ष
5. मौलाना हाफिज मोहम्मद अहमद- 34 वर्ष
6. मौलाना हबीब-उर-रहमान उस्मानी- कुछ वर्ष
7. मौलाना कारी मोहम्मद तैय्यब- 52 वर्ष
8. मौलाना मरगूब-उर-रहमान बिजनौरी- 32 वर्ष
9. मौलाना गुलाम वस्तानवी- 7 माह
10. मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी- 2011 से लगातार