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चुनाव आयोग की वेबसाइट में सेंध: अब तक चार आरोपी दबोचे, कोर्ट में किए गए पेश, एक की तलाश में दबिश जारी

Sat, 14 Aug 2021 11:42 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 14 Aug 2021 11:42 PM IST
सार

चुनाव आयोग की वेबसाइट में सेंध लगाकर प्रमाणपत्र बनाने वाले मास्टरमाइंड समेत चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया।

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UP News: Three accused have been arrested including the mastermind who cheated the Election Commission website in Saharanpur
आरोपी गिरफ्तार। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी कर मतदाता पहचान पत्र बनाने वाले चार और आरोपियों को साइबर थाना और पुलिस की स्पेशल टीमों ने गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से दस्तावेज और कंप्यूटर बरामद हुए हैं। इनमें दो आरोपी निर्वाचन आयोग में बतौर कंप्यूटर ऑपरेटर संविदा पर कार्य कर चुके हैं, इन्होंने ही यूजर आईडी और पासवर्ड पैसा कमाने की एवज में दूसरे आरोपियों को बताए थे। दो दिन पहले ही मामले में गांव मच्छरहेड़ी निवासी विपुल सैनी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जबकि एक आरोपी अभी फरार है। 

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एसएसपी डॉ. एस चन्नपा ने बताया कमल विहार, दिल्ली निवासी आदित्य खत्री, आजादपुर दिल्ली निवासी आशीष जैन, अमन विहार दिल्ली निवासी अरमान मलिक उर्फ मोहम्मद नियाज आलम और सराय बस्ती, दिल्ली निवासी नितिन को शुक्रवार की रात में साइबर थाना और पुलिस की स्पेशल टीमों ने दिल्ली से गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से कंप्यूटर और कुछ दस्तावेज भी कब्जे में लिए हैं। नितिन और आदित्य खत्री निर्वाचन आयोग दिल्ली के कार्यालय में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्य कर चुके हैं, जो डाटा एंट्री का काम करते थे। इन दोनों आरोपियों ने यूजर आईडी और पासवर्ड साइबर कैफे संचालक अरमान मलिक और आशीष जैन को दिया। अरमान मलिक के संपर्क में गांव मच्छरहेड़ी निवासी विपुल सैनी भी आया था। विपुल इनके बताए पासवर्ड और यूजर आईडी का इस्तेमाल कर मतदाता पहचान पत्र बना रहा था। वह तीन माह में तीस हजार से ज्यादा पहचान पत्र बनवा चुका था। 
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पुलिस ने गिरफ्तार चारों आरोपियों को शनिवार शाम कोर्ट में पेश किया है। अभी आरोपी हरिओम निवासी जनपद मुरैना मध्य प्रदेश फरार चल रहा है। यह आरोपी भी साइबर कैफे चलाता है। इसकी गिरफ्तारी को पुलिस की स्पेशल टीम मध्य प्रदेश गई हुई हैं। 
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एसएसपी ने बताया कि चारों को कोर्ट में पेश किया गया है। अदालत में चारों के रिमांड की अर्जी भी डाली गई। यदि रिमांड मिलता है तो इन चारों की निशानदेही पर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के अभा कस्बे में दबिश दी जाएगी।

बताया गया कि अरमान मलिक ही निर्वाचन आयोग में डाटा ऑपरेटर था, जबकि अब पता चला है कि आदित्य और नितिन भी डाटा ऑपरेटर थे। अरमान मलिक मध्य प्रदेश के हरदा का रहने वाला है और निर्वाचन आयोग में डाटा ऑपरेटर के रूप में कार्य कर चुका है। उसी ने विपुल सैनी को लॉगिन और पासवर्ड बताया था, जिसके जरिये विपुल सैनी मतदाता पहचान पत्र बना रहा था। बीते तीन महीने में वह 10 हजार से ज्यादा पहचान पत्र बना चुका है। 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस. चन्नपा ने बताया कि आरोपी विपुल सैनी ने यहां के नकुड़ इलाके में अपनी कंप्यूटर की दुकान खोल रखी थी। वेबसाइट में उसी पासवर्ड के जरिये लॉगइन करता था, जिसका इस्तेमाल आयोग के अधिकारी करते थे। आयोग को कुछ गड़बड़ी का अंदेशा हुआ और जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी दी। वहीं एजेंसियों की जांच के दौरान विपुल सैनी शक के दायरे में आया था। जांच में विपुल सैनी के बैंक खाते में 60 लाख रुपये पाए गए, जिसके बाद खाते से लेनदेन पर तत्काल रोक लगा दी गई है। खाते में इतनी रकम कहां से आई, इसकी जांच की जाएगी। 

आयोग ने दिया बयान, डाटाबेस है सुरक्षित 
निर्वाचन आयोग के एक प्रवक्ता ने दिल्ली में कहा कि सहायक मतदाता सूची अधिकारी (एईआरओ) नागरिकों को सेवा प्रदान करते हैं और मतदाता पहचान पत्र की प्रिंटिंग और समय पर वितरण की जिम्मेदारी उनकी होती है। प्रवक्ता ने कहा, एईआरओ कार्यालय के एक डाटा एंट्री ऑपरेटर ने अवैध रूप से अपना आईडी एवं पासवर्ड सहारनपुर के नकुड़ में एक निजी अनधिकृत सेवा प्रदाता को दी, ताकि वह कुछ वोटर कार्ड छाप सके। प्रवक्ता ने कहा, दोनों व्यक्ति गिरफ्तार हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का डाटाबेस पूरी तरह सुरक्षित है।

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